Old Testament
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यूहन्ना 17:6 का सार: यहोवा के नाम का उद्घाटन और चुने हुओं की अलग पहचान
सीधी nghĩa: यीशु कह रहा है कि उसने पिता के नाम को उन लोगों पर प्रगट किया जो पिता ने संसार में से उसे दिये थे; वे यीशु के थे, और उन्होंने पिता के वचन को माना।
प्रसंगात्मक पृष्ठभूमि
यह आयत यूहन्ना 17 में जीसस का प्रार्थनात्मक प्रार्थना है, जिसे “महान प्रार्थना” कहा जाता है। प्रभु यीशु अपने पिता के साथ एक आत्म-स्थिति में है और अपने चेलों के प्रति उनकी भूमिका की समर्पितता पढ़ाते हैं। उस समय यीशु ने जिन लोगों को संसार से चुना है, उनके बारे में स्पष्ट किया कि वे उनके संदिग्ध नहीं, बल्कि पिता के नाम के सत्य के प्रतिनिधि हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
एतिहासिक और पारंपरिक दृष्टिकोण से विश्लेषण (संक्षेप)
फादर मैथ्यू हेनरी का संकेत है कि यहाँ यीशु उन लोगों की सुरक्षा-स्थापना की बात कर रहे हैं जो पिता के चयन से उनके साथ जुड़ते हैं; वह उनका विश्वास और पालन कराने के लिए प्रेरित है। एलबर्ट बार्न्स के अनुसार यह तुम्हारा मत है कि अंततः यीशु के शब्द, “वह उसे दे दी गई थी”—यह बताता है कि प्रेरित-समूह के पास आध्यात्मिक अधिकार और संबद्धता है। एडम क्लार्क भी इस बात को समझते हैं कि यीशु ने पिता के नाम को प्रकट किया ताकि उन चुनिंदा लोगों के साथ एक निकटता बना रहे, जो वचन को मानते हैं।
तुर्की किस प्रकार की प्रेरक बातें देती है
– चयनित अवयव: पिता ने चुना, पुत्र ने उद्घाटन किया।
– विश्वासी-जीवन: वचन मानना और पिता की प्रतिष्ठा को बनाए रखना।
सार विषयगत बिंदु
अनुबंधित पारस्परिक संदर्भ
1) यूहन्ना 6:37 — पिता जो देता है, वे आते हैं; यह वचन बताता है कि चयनित आवरण परमेश्वर के निर्णय से होता है।
2) यूहन्ना 10:28-29 — पालनहार की सुरक्षा और पिता के हाथों की सुरक्षा; यह उद्धार की योजना का सुरक्षित भाग है।
3) यूहन्ना 14:23 — प्रेम और वचन के अनुसार रहने का अनुभव; पिता का नाम और उसकी उपस्थिति हमारी जीवन-शैली को निर्देशित करते हैं।
व्यावहारिक takeaway
यदि आप यीशु के साथ एकता और विश्वास को स्वीकारते हैं, तो आप पिता के नाम के वचन में टिके रहते हैं। जीवन में कठिनाई के समय भी यह पहचान का आधार बना रहा कि आप वे लोग हैं जिन्हें पिता ने दिया है और जिन्हें यीशु ने वचन के प्रकाश में कहा है कि वे आत्म-विश्वास और शुद्धता से जीएं।