यूहन्ना 17:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और अब, हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर जो जगत की सृष्टि पहले, मेरी तेरे साथ थी।

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यूहन्ना 17:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

यूहन्ना 17:5 का आस्वादन: पिता के साथ मेरी महिमा

परोक्ष रूप से ईसा मसीह अपने प्रार्थना-आकाशी क्षण में पिता के साथ अपनी महिमा की स्मृति और पुनःस्थापना की इच्छा व्यक्त करते हैं। यह सुविचारित वाक्य उस क्षण की दिशा दर्शाता है जब यीशु अपनी पृथ्वी-यात्रा के अन्तिम चरणों में स्वर्गीय महिमा को पुनः प्राप्त करने की मांग कर रहे हैं और परमपिता के साथ उनके प्रेम-संबंध की असीम गहराई को उजागर कर रहे हैं।

इस पाठ से परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या स्पष्ट होता है

ईसा कहते हैं: “और अब, हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उसी महिमा से कर जो जगत की सृष्टि पहले, मेरी तेरे साथ थी।” यहाँ महिमा से उनका आशय एक सन्निकटन, आत्मीय सहभागिता और दिव्य सम्मान से है—जो पिता के साथ उनके पूर्व-युगीन संबंध को प्रदर्शित करती है। यह बतलाता है कि मसीह की महिमा केवल पृथ्वी-कार्य से नहीं, बल्कि परमेश्वर-जीवन के एक साथी के रूप में है। यह भी संकेत देता है कि ईसाई जीवन में महिमा का आ जाना तब ही संभव है जब हम पिता के साथ उसी अनन्य प्रेम-संबंध को पकड़ लेते हैं।

महत्वपूर्ण शब्दों/चित्रों की स्पष्टता

  • महिमा— यहाँ यह दरसाता है कि ईसा का सम्मान, पवित्रता और दिव्य सत्ता उनके संबंध-आधार से आता है; यह ऐतिहासिक-गौण नहीं बल्कि स्वर्गीय तथ्य है।
  • मेरे साथ थी— पूर्व-युगीन संबंध की याद जो पवित्र पुत्र और परम पिता के बीच असीम प्रेम को दर्शाती है; यह बताता है कि मसीही महिमा व्यक्तिगत भागीदारी के परिणामस्वरूप है, न कि केवल मानवीय प्रयास से।

संबंधित पवित्र वचन

लगभग मिलते-जुलते विचार निम्न स्थानों में मिलते हैं:

  • यूहन्ना 1:14— दासत्व-रूप से महिमा का अवतरण: “और हमने उसकी महिमा देखी, जैसी एकौके के पुत्र के समान परमपिता के अनुग्रह एवं सत्य से भरी है।”
  • यूहन्ना 16:15— पिता की महिमा में सब कुछ क्रिया-संयोजन के साथ जुड़ा है; यह यीशु के पृथ्वी-कार्य से परे एक असीम संबंध दिखाता है।
  • यहीबर 1:3— “वह उसी की महिमा का प्रतिनिधित्व है और उसके स्वरूप का छाया”— यीशु की दिव्यता का प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति।

इन संदर्भों में महिमा का विचार एकीकृत है: परमेश्वर के साथ अविनाशी संबंध, पवित्रता का प्रदर्शन, और उद्धार-कार्य का उद्देश्य।

आज-के-दिन की व्यावहारिकता

  • दिल में पिता के साथ गहरे संबंध को बनाए रखना: ईश्वर के साथ दैनिक संवाद और आस्था का एकत्व, जिससे हमारी जीवन-यात्रा भी उसकी महिमा बढ़ाए।
  • परम-पिता के सच्चे प्रेम को समझना: मसीह की महिमा में भागीदारी केवल ज्ञान नहीं, बल्कि आचरण-परिवर्तन है—दयालुता, सत्कार, और त्याग की cenन्द्रीयता।
  • विश्वास의 चढ़त में धैर्य: महिमा की पूर्णता ईश्वर के समय में प्रकट होती है; हमें उसकी योजना में भरोसा बनाए रखना है।

सूत्रधारक साक्ष्य (जाँच के लिए संकेत)

यूहन्ना 17:5 के संदर्भ में, प्रार्थना-संवाद में ईसा अपने पिता के साथ अपने पूर्व-युगीन महिमा को स्मरण कर रहे हैं—जो उनकी दैवीय प्रकृति और कार्य की एकता को बताता है। यह संकेत देता है कि उद्धार-यात्रा में महिमा और ग्लोरिया एक साथ चलते हैं।

नोट: नीचे उद्धृत उन पंक्तियों से विशिष्ट शब्द-संयोजन समय-समय पर दोहराए जाते हैं; परन्तु यहां केवल संक्षेप-उद्धरण प्रयोग किया गया है, ताकि पाठ के अर्थ का स्पष्ट संरेखण बना रहे:

“पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा ...”—उद्धृत विचार की प्रेरक धारा

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यूहन्ना 17:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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आदि में* वचन था, और वचन परमेश्‍वर के साथ था, और वचन परमेश्‍वर था।

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मैं और पिता एक हैं।”

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जिसने परमेश्‍वर के स्वरूप में होकर भी परमेश्‍वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।

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