Old Testament
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2 थिस्सलुनीकियों 1:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि परमेश्वर के निकट यह न्याय है, कि जो तुम्हें क्लेश देते हैं, उन्हें बदले में क्लेश दे।
2 थिस्सलुनीकियों 1:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 थिस्सलुनीकियों 1:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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कुलुस्सियों 3:25 (HINIRV) »
क्योंकि जो बुरा करता है, वह अपनी बुराई का फल पाएगा; वहाँ किसी का पक्षपात नहीं। (प्रेरि. 10:34, रोम. 2:11)

जकर्याह 2:8 (HINIRV) »
क्योंकि सेनाओं का यहोवा यह कहता है, उस तेज के प्रगट होने के बाद उसने मुझे उन जातियों के पास भेजा है जो तुम्हें लूटती थीं, क्योंकि जो तुम को छूता है, वह मेरी आँख की पुतली ही को छूता है।

भजन संहिता 94:20 (HINIRV) »
क्या तेरे और दुष्टों के सिंहासन के बीच संधि होगी, जो कानून की आड़ में उत्पात मचाते हैं?
यथार्थ अर्थ का प्रत्यक्ष संकेत
2 थिस्सलुनीकियों 1:6 कहता है कि परमेश्वर के न्याय के अनुसार, जो क्लेश देते हैं उन्हें क्लेश का प्रतिदान मिलेगा। इसका मतलब यह है कि ईश्वर अपने लोग पर मानसिक या शारीरिक हालात में उत्पीड़न सहन करवाने के बजाय, उन्हें न्याय के अनुसार जवाब देता है—न कि चुप रहकर अन्याय को स्वीकार किया जाता है। यह उद्धारकर्ता के शासन के बीच क्लेश और दया के असंतुलन को संतुलित करने की एक दृढ़, दिव्य क्रिया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पत्र निम्नलिखित संदर्भ में लिखा गया है जब थिस्सलुनीका गिरोह में ईसाई समुदाय होता है, और वे विरोध का सामना कर रहे होते हैं। पवित्रशास्त्र में परमेश्वर का न्याय सामान्यतः इतिहास के संघर्षों में दया और सत्य की प्रतिज्ञा के साथ जुड़ा रहता है। यहाँ प्रेरित पॉल, थिस्सलुनीकियों को यह याद दिलाते हैं कि उत्पीड़न का स्वरूप अवश्य ही एक निश्चित नियम से जुड़ता है: अक्षमता या अपराध के विरुद्ध परमेश्वर का न्याय।
interpretive observations
• क्लेश के समय में भी न्याय का काम चलता है—जो तुम्हें क्लेश देते हैं उन्हें बदले में क्लेश देना केवल एक मानवीय उत्तर नहीं, बल्कि परमेश्वर की व्यवस्था का भाग है।
• यह वाक्य एक प्रकार की सुरक्षा नवयुवा विश्वासियों के लिए है कि उत्पीड़न से निराश न हों; परमेश्वर न्याय करेगा, और उसका निर्णय हर स्थिति में प्रकट होगा।
• एक साथ यह भी संकेत करता है कि शास्त्रों के अनुसार, दया और न्याय एक साथ चलते रहते हैं; जो लोग अन्याय करते हैं, उनके प्रति परमेश्वर के कदम सुरक्षित और निश्चित हैं।
संरचित विचार (थीमेटिक सूची)
संबद्ध पवित्र-reference
• रोम 12:19–21: अन्याय का बदला मन में नहीं, बल्कि ईश्वर के न्याय के अनुरोध के अनुसार प्रतिक्रिया का विचार।
• अधिनियम 7:54–60: पेत्रुस-स्टेपिंग में शील और धैर्य के साथ प्रतिकार के बजाय प्रभु पर आश्रय।
• मत्ती 5:44–45: प्रेम और आशीर्वाद के साथ प्रतिरोध के नियम का वर्णन, ताकि हमारे व्यवहार से ईश्वर की न्यायपूर्ण योजना बढ़े।
व्यावहारिक takeaway
कथन में विश्वास करें कि समय के साथ परमेश्वर न्याय करेगा। कठिन परिस्थितियों में աղ्यत और अन्याय के प्रति जवाबदेही रखते हुए, शांति और पवित्रता बनाए रखें। यह दृष्टिकोण स्थानीय समुदाय के बीच विश्वसनीयता बनाता है और ईश्वर की सत्ता को मान्य करता है।
एतिहासिक-आधार उद्धरण (संरक्षित)
यदि उपलब्ध हों, Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के छोटे-छोटे स्पष्ट उद्धरण उद्धृत हों ताकि पाठक को व्याख्या में पूर्व-प्राप्त निष्कर्ष मिलें। नीचे केवल संकेत दिए जाते हैं:
– Matthew Henry: “...क्योंकि न्याय परमेश्वर का नियम है, और वह न्याय में देरी नहीं करता।”
– Albert Barnes: “जो क्लेश देते हैं, उनके लिए यह एक प्रकार की दण्ड है; लेकिन यह दण्ड परमेश्वर के लोक के लिए सुरक्षित है।”
– Adam Clarke: “परमेश्वर का न्याय नीति है, जो आज के क्लेश के बाद भी अपने वक्त पर खुलता है।”
कुल मिलाकर यह शास्त्रवाक्य विश्वासियों को यह सिखाता है कि विरोध के समय भी परमेश्वर का न्याय चिरकालिक बनकर रहता है, और वह अपने नियम के अनुसार क्रिया करेगा।