Old Testament
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जकर्याह 2:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि सेनाओं का यहोवा यह कहता है, उस तेज के प्रगट होने के बाद उसने मुझे उन जातियों के पास भेजा है जो तुम्हें लूटती थीं, क्योंकि जो तुम को छूता है, वह मेरी आँख की पुतली ही को छूता है।
जकर्याह 2:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 2:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 32:10 (HINIRV) »
“उसने उसको जंगल में, और सुनसान और गरजनेवालों से भरी हुई मरूभूमि में पाया; उसने उसके चारों ओर रहकर उसकी रक्षा की, और अपनी आँख की पुतली के समान उसकी सुधि रखी।

भजन संहिता 17:8 (HINIRV) »
अपनी आँखों की पुतली के समान सुरक्षित रख*; अपने पंखों के तले मुझे छिपा रख,

यूहन्ना 15:21 (HINIRV) »
परन्तु यह सब कुछ वे मेरे नाम के कारण तुम्हारे साथ करेंगे क्योंकि वे मेरे भेजनेवाले को नहीं जानते।
जकर्याह 2:8 का मौलिक अर्थ
इस वाक्य में परमेश्वर कहता है: जो कोई तुम को छूता है, वह मेरी आँख की पुतली को छूता है। यह बात यह दर्शाती है कि यहोवा अपने चुने हुए शहर और लोगों से अत्यन्त सघन रिश्ता रखता है। उनका संरक्षण परमेश्वर के अत्यंत साक्ष-संबंध और निष्ठा के दायरे में है; जो भी उन्हें नुकसान पहुँचाने की ठानी, वह सीधे ईश्वर की आँखों में नज़र आता है और उसका दंड इससे जुड़ा होता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह बाइबल के खत्म होते काल के समय का भाग है जब यहोवा ने ज़्र रब्बी (जकर्याह) के मार्फत यरूशलम और यहूदियों को यह आश्वासन दिया कि वे फिर से सुरक्षा और प्रतिष्ठा पाएंगे। अलग-अलग जातियाँ उनकी जीत के प्रयास कर सकती हैं, पर परमेश्वर का प्रतिरक्षित लोगों पर अनुग्रह है और वह उनकी रक्षा के लिए जागृत रहता है। यह वाक्य मंदिरों, बस्तियों, और लोगों के साथ God के “आँख की पुतली” जैसे सीधे रिश्ते को दर्शाता है—यानी उनके विरुद्ध कुछ भी किया जाए, वह सीधे ईश्वर के सामने है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
महत्त्वपूर्ण क्रॉस-रेफरेंसे
गिनती-आधार पर नीचे 3 भरोसेमंद संदर्भ जो इस विचार को नहीं तोड़ते बल्कि गहरा करते हैं:
संकेतित पंक्तियाँ रूहानी सुरक्षा के दायरे को स्पष्ट करती हैं: खतरा चाहे जैसा भी हो, परमेश्वर अपने लोगों के जीवन में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करता है।
थीम-चिन्ह और संक्षिप्त व्यावहारिक takeaways
चरित-उद्धरण (संभावित विचारधारा)
इस टिप्पणी में कड़ाई से उद्धृत रचना देखें: “जो तुम को छूता है, वह मेरी आँख की पुतली ही को छूता है”—यह धारणा Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समान सरल भावों से जुदा नहीं है, बल्कि उनके विचारों की प्रेरणा के अनुरूप है कि परमेश्वर की सुरक्षा उनके लोगों के लिए अखण्ड है। प्रस्तुत उद्धरणों का प्रयोग स्वयं लेखक के विचार में किया गया है, ताकि पाठक धारण करे कि यह संरक्षण ईश्वर के दृढ़ प्रेम का प्रमाण है।
संक्षेप निष्कर्ष
जकर्याह 2:8 यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों पर अत्यंत सतर्क है। जो उन्हें नुकसान पहुँचाने की कोशिश करें, वे परमेश्वर की दृष्टि में सीधे मुँह दिखाई गड़बड़ी हैं। यह विश्वास-आधार है कि ईश्वर न केवल इतिहास में बल्कि आज के जीवन में भी अपनी सुरक्षा और स्मरण की प्रतिज्ञा बनाए रखते हैं।