Old Testament
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जकर्याह 2:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा की यह वाणी है, “देखो, सुनो उत्तर के देश में से भाग जाओ, क्योंकि मैंने तुम को आकाश की चारों वायुओं के समान तितर-बितर किया है। (यशा. 48: 20, व्य. 28: 64, मत्ती 24:31)
जकर्याह 2:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
जकर्याह 2:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहेजकेल 17:21 (HINIRV) »
उसके सब दलों में से जितने भागें वे सब तलवार से मारे जाएँगे, और जो रह जाएँ वे चारों दिशाओं में तितर-बितर हो जाएँगे। तब तुम लोग जान लोगे कि मुझ यहोवा ही ने ऐसा कहा है।”

उत्पत्ति 19:17 (HINIRV) »
और ऐसा हुआ कि जब उन्होंने उनको बाहर निकाला, तब उसने कहा, “अपना प्राण लेकर भाग जा; पीछे की ओर न ताकना, और तराई भर में न ठहरना; उस पहाड़ पर भाग जाना, नहीं तो तू भी भस्म हो जाएगा।”

व्यवस्थाविवरण 28:64 (HINIRV) »
और यहोवा तुझको पृथ्वी के इस छोर से लेकर उस छोर तक के सब देशों के लोगों में तितर-बितर करेगा; और वहाँ रहकर तू अपने और अपने पुरखाओं के अनजाने काठ और पत्थर के दूसरे देवताओं की उपासना करेगा।
मुख्य व्याख्या-बिंदु
यहोवा कहता है कि वह अपने लोगों को आकाश के समान ऊर्ध्वगामी व्याप्ती के भीतर सुरक्षित करके भाग-जाने की योजना बनाता है, ताकि वे लोक-परिवर्तनों और विरोधों से बच सकें। यह उद्धार के संकेत के साथ साथ विपत्ति के समय आशीर्वाद के मार्ग की ओर इशारा है: वे निर्जन स्थानों में नहीं, बल्कि उसकी करुणा और संरक्षण में पुनर्स्थापित होंगे।
साहित्यिक संदर्भ
जकर्याह 2 का संदर्भ एक स्पष्ट इशारा है कि यहोवा अपने निवासियों को तुरंत आकाश की निकासी के समान शीघ्र फैलाव से सुरक्षित करेगा, ताकि वे किसी भी खतरे से दूर रहें। यह वाणी विभाजन-भवन और विचलन के समय में एक आशा-प्रतीक है। यशया 48:20, रेव. 28:64, मत्ती 24:31 जैसे संदर्भ यह दर्शाते हैं कि परमेश्वरीय बचाव का रूप कभी-कभी अलग-थलग नहीं, बल्कि व्यापक चुम्बन और फिर से एकत्रीकरण का होता है।
धर्मशास्त्रीय महत्व
यह वाक्य यह सिखाता है कि दृढ़ श्रद्धा में परमेश्वर अपने चेलों को अस्थिर राजनीतिक-निग्रह के समय भी सुरक्षित रखता है। यह भागना-यात्रा एक प्रतीक है: भौतिक स्थानों के बजाय परमेश्वर के उद्देश्य में स्थिति परिवर्तन, ताकि उनके भाग्य में नई ईमानदार शुरुआत हो। साथ ही, तितर-बितर होना, फिर एकत्रित होना—ये दो धक्के एक साथ मिल कर यह दर्शाते हैं कि परमेश्वर की कृपा किस प्रकार उथल-पुथल के बीच लोगों को एक नई पहचान दे सकती है।
पवित्र ग्रंथों के साथ संबंध
इन संदर्भों से समन्वय यह निकलता है कि परमेश्वर के लोग आपदा में भी भाग नहीं छोड़ते, बल्कि उसकी योजना के अनुसार सुरक्षित और संगठित रहते हैं, ताकि भविष्य का उद्धार साकार हो सके।
परिचर्चा योग्य प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वाणी एक दिव्य सुरक्षा की गारंटी है — जब लोग आकाशीय दिशा में-यात्रा करते हैं, तब भी परमेश्वर उन्हें विभाजन नहीं, बल्कि एक साथ पुनःस्थापित करता है। भागना-फिर आना, उथल-पुथल के बीच ईश्वर की योजना को पहचानना और उस पर भरोसा करना—यही इस पद का सार है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (मार्गदर्शक टिप्पणीकारों से): जहां आवश्यक हो, नीचे उल्लेखित स्रोतों के संक्षिप्त संकेत दिए गए हैं।
Cross-references के संक्षेपगत सुझाव: - यशया 48:20 – जो उद्धार के लिए बाहर जाने की प्रेरणा देता है, वह आंतरिक भरोसे के साथ जीवन-यात्रा को नया बनाता है। - मत्ती 24:31 – अंत समय के बोध में एकत्रीकरण का नियम स्पष्ट करता है। - रेव. 7:9-14 – परमेश्वर के निवासियों की विशाल संख्या और उनकी सुरक्षा का चित्रण विशेष है।
उद्धृत टिप्पणियाँ (यदि उपलब्ध हों):
यह भाग एक सामान्य सार है; नीचे के अनुभागों में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सामान्य-धारणात्मक टिप्पणियाँ संदर्भ के अनुसार मिलती हैं—किसी एक से सीधे उद्धरण नहीं हैं जब तक कि पाठ-ग्रंथ में पूर्ण उद्धरण उपलब्ध न हो।