Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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अर्थ का प्रत्यक्ष सार
कुलुस्सियों 3:25 में स्पष्ट निर्देश है कि जो कोई बुरा करता है, उसकी बुरी इच्छा या कृत्य का फल उसे अवश्य प्राप्त होगा, और यहाँ ईश्वर के पक्षपात से रहित न्याय की बात है— हर कदम पर निष्पक्ष निर्णय होगा।
संदर्भ पृष्ठभूमि
पत्र के इस भाग में प्रेरित पौलुस विश्वासियों को संसार के पूर्वाग्रहों से बचने के लिए कड़ाई से चेतावनी देते हैं। यदि कोई किसी के साथ अन्याय करता है या गलत काम करता है, तो उसे उसका परिणाम भुगतना पड़ेगा, और यह परिणाम किसी के पक्ष या ग़ैर-न्याय से नहीं बदलेगा। ऊपर उद्धृत प्रेरितों के अभिमुख बोध (प्रेरि. 10:34; रोम. 2:11) में भी यह विचार मिलते हैं कि ईश्वर सबके मामले में निष्पक्ष सिंहासन से निर्णय लेते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक संक्षेप
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनके संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) प्रेरितों के प्रेरिती बोध: बुरे कर्मों के फल का सिद्धांत—ईश्वर की न्यायप्रियता सभी के लिए समान है।
2) रोम 2:11: “ईश्वर के बारे में किसी का पक्षपात नहीं है”—कथा-तत्व की पुष्टि करते हुए यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत ग्रंथों के बाहर भी ईश्वर का न्याय निष्पक्ष है।
3) नीतिवचन-संदर्भ: अर्थात् व्यवहार के अनुसार परिणाम का विधान—सीधे–सीधे कर्मों का फल मिलता है, चाहे व्यक्ति कितना भी शीर्ष स्तर का क्यों न हो।
संक्षेपित व्यावहारिक takeaway
अपने आचरण की देखरेख करें: जो लोग सत्य और निष्पक्षता से चलेंगे, उन्हें ईश्वर के न्याय में सुरक्षा मिलेगी; जो बुराई करें, उन्हें फल भुगतने होंगे। हर स्थिति में ईश्वर के पक्षपात-रहित न्याय का सम्मान करें।
कुलुस्सियों 3:25 के साथ अन्य संदर्भों का सार यह है कि सामाजिक दबाव या व्यक्तिगत स्थिति चाहे जैसी भी हो, ईश्वर का न्याय समान रहता है और प्रत्येक कर्म का फल अवश्य मिलता है।
उद्धरण-नोट: नीचे दिए मुख्य टिप्पणीकारों के संकलन से सामान्य समझ को संवेदी किया गया है, परन्तु पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं किया गया है।