Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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कुलुस्सियों 3:7 का संदर्भ और अर्थ
पढ़ना: कुलुस्सियों 3:7 में प्रेरित पवित्र आत्मा बताता है कि जिन पापी जीवनों में पहले वे जीते थे, वे उन बुराइयों के अनुसार चलते थे। यह वाक्य क्लेश भरे पूर्व जीवन की याद दिलाता है और बताता है कि किस प्रकार निर्माता के पुत्र होने के नाते नए जीवन में आकर वे पुराने कदमों को छोड़ दें। पवित्र पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि चेहते-चाहते, पुराने व्यवहार पीछे छूटते हैं और नई पहचान प्रभु यीशु-Christ के साथ बनती है।
मुख्य अर्थ
इस आयत में विश्वासियों को उनके पूर्व जीवन के यथार्थ पर पुनः निगाह डालने को प्रेरित किया गया है ताकि वे अपने नए जीवन की दिशा स्पष्ट देख सकें। “इन बुराइयों” का संदर्भ उन सभी अवगुणों, अधर्मों और असंतोषजनक व्यवहारों से है जो ईश्वर के पुत्रों के रूप में उनके पहले रहने के तरीके थे। नया जीवन शुरू होने पर इन अतीत क्रियाओं के साथ सह-अस्तित्व नहीं रहा जा सकता—क्योंकि ईश्वर के साथ संबंध और नयापन इसके लिए बाध्य है।
तीन केंद्रीय विषय
अन्य प्रतिनिधि टिप्पणीकारों के संकेत
मैथ्यू हेन्की, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की पुरानी टिप्पणियाँ इस आयत की दिशा को स्पष्ट करती हैं:
हेन्की ने कहा कि पुराने नियम के प्रभाव और शुटा के पापी जीवन से उद्धार प्राप्त होने के बाद भी कभी-कभी मनुष्य लौटना चाह सकता है; परन्तु नया जीवन चर्चित में नया उद्देश्य देता है। (संक्षेप सार) “You once walked in these things, but now you must put them away.” (संदर्भ का संकेत)
बार्न्स ने स्पष्ट किया कि पापी व्यवहार से मुक्त होना केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि चरित्रगत परिवर्तन है जो ईश्वर के साथ सार्थक संबंध को स्थिर बनाता है।
क्लार्क ने पुराने जीवन के बुराइयों को मृत्यु के समान माना है, जिन्हें मरण पर छोड़ना और नया जीवन शुरू करना आवश्यक है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
1) रोमियों 6:11-13: बुत-परिवर्तन के बाद मरे हुए नहीं होने और नए जीवन के अनुरूप आचरण की पुष्टि। यह दिखाता है कि विश्वास से नया स्वभाव आता है।
गलातियों 5:16-25: आत्मा के फलों के अनुसार चलना, और कच्चे जीवन के हिस्सों से मुक्त रहना—जो प्रत्यक्ष रूप से पुराने बुरे मार्गों से विचलित रहने की प्रेरणा देता है।
इफिसियों 4:22-24: पुरानी ईमानदारी से हटकर नई बनावट में ढालना—नए आदमी की प्रकृति को धारण करना।
व्यावहारिक विवेचन
- आत्म-न्याय: अपने दैनिक निर्णयों में यह पूछना कि क्या यह व्यवहार मसीह की पहचान के अनुरूप है? यदि नहीं, तो उसे बदला जाना चाहिए।
- समुदाय-जीवन: विश्वासियों के समुदाय में पुरानी आदतों के स्थान पर प्रेम, क्षमा और सहयोग को बढ़ाना।
- मार्गदर्शक प्रार्थना: पवित्र आत्मा से क्षमा और सहायता माँगना ताकि पुराने रास्तों को पीछे छोड़कर नई राह पर चलना संभव हो।
संक्षिप्त निष्कर्ष
कुलुस्सियों 3:7 बताते हैं कि ईश्वर के सदस्य के रूप में हमारा इतिहास बदलता है—पूर्व बुराइयों के अनुसार जीवन जीना अब स्वीकार नहीं—तथा नया जीवन परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप आचरण और चरित्र में प्रकट होता है। यह परिवर्तन सच होने पर ही स्थिर होता है, जब हम प्रभु यीशु के साथ अपनी नई पहचान को जीवित तरीके से निभाते हैं।