नीतिवचन 17:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो दूसरे के अपराध को ढाँप देता* है, वह प्रेम का खोजी ठहरता है, परन्तु जो बात की चर्चा बार-बार करता है, वह परम मित्रों में भी फूट करा देता है।

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नीतिवचन 17:9 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 17:9 पर टिप्पणी

वाक्य यह दिखाता है कि सामाजिक संबंधों में प्रेम और शांति की कुंजी दूसरों की त्रुटियों के बारे में फालतू चर्चा को रोकना है। जो लोग अपराध या गलतियों को छिपाने की कोशिश नहीं करते, वे रिश्तों में दूरी और फूट के बीज बोते हैं; जो लोग प्रेम के साथ गलतियों को ढँकते हैं, वे मित्रता और विश्वास को मजबूत करते हैं। संदर्भ में, नीतिवचन के प्रत्येक उक्ति का लक्ष्य व्यवहारिक ज्ञान के जरिए लोक-जीवन में अच्छाई और विनय स्थापित करना है।

केंद्रीय भावार्थ

कहावत दो opposite प्रवृत्तियों को स्पष्ट करती है: एक है करुणा और गोपनीयता जो प्रेम को गहरा बनाती है; दूसरा है अति-चर्चा और आलोचना जो संबंधों को नुकसान पहुँचाती है। ढाँपकर प्रेम दिखाने से भरोसा और एकजुटता बढ़ती है, जबकि बार-बार चर्चा करना रिश्तों में फूट डाल देता है।

मुख्य विषय

  • परस्पर प्रेम और गोपनीयता: प्रेमपूर्ण ढाँपना एक संरक्षक की तरह है जो मित्रता की रक्षा करता है।
  • विवेक की सीमा: सत्य परिपक्वता के साथ भी, हर बात का खुलासा नहीं करना चाहिए—कभी-कभी दया और समय का चयन अधिक श्रेष्ठ रहता है।
  • समुदाय की स्थिरता: ट्रस्ट और प्रति-सम्बन्ध सुरक्षा के आधार हैं; खुले आरोपों से नहीं, बल्कि समझौतों से मजबूत होते हैं।

संबद्ध पाठ

1) नीतिवचन 10:12 — प्रेम और घृणा के पीछे के क्रोध का प्रभाव; क्रोध के कारण झगड़े बढ़ते हैं।

2) मत्ती 18:15-17 — यदि किसी का दोष है, तो उसे व्यक्तिगत रूप से चेक करना और समाधान ढूंढ़ना; बात-चीत की प्रक्रिया का महत्व।

3) गलतियों का ढाँपना बनाम न्याय: समुदाय में विश्वास कैसे बनता है, इस पर नीतिवचन मार्गदर्शन देता है।

व्यावहारिक विचार

- जब किसी की गलती सामने आती है, तो सबसे पहले प्रेम-भाव से विचार करें कि क्या उनका सम्मान बनाए रखते हुए परिस्थिति हल हो सकती है।

- यदि आप किसी के बारे में चर्चा कर रहे हैं, तो यह प्रश्न करें: क्या यह चर्चा किसी की भलाई के लिए है, या अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए?

छोटा समापन

यह नीतिशास्त्र बताता है कि भरोसेमयी रिश्ते उसी समय बनते और टिकते हैं जब हम दूसरों के दोषों को उचित ढंग से ढँक कर प्रेम का प्रदर्शन करें, न कि उनकी आलोचना कर के फूट पैदा करें।

संक्षिप्त निष्कर्ष

जो दूसरे के अपराध को ढाँप देता है, वह प्रेम का वास्तविक परिचय देता है; जो बार-बार बात करती है, वह मित्रों के बीच दूरी पैदा करती है। विवेक और प्रेम के संतुलन से समुदाय मजबूत होता है।

सूत्र उद्धरण (सिर्फ वही जो सीधे उद्धृत किए गए हैं):

“उस प्रकार जो दूसरे के अपराध को ढाँप देता है, वह प्रेम का खोजी ठहरता है” — वर्णनात्मक रूप में genutzt, सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी पर आधारित सन्निवेश

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 17:9 समानांतर पद और संबंधित वचन

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बैर से तो झगड़े उत्‍पन्‍न होते हैं, परन्तु प्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैं।* (1 कुरिन्थियों. 13:7, याकूब. 5:20,1 पतरस 4:8)

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सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है*। (नीति. 10:12)

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टेढ़ा मनुष्य बहुत झगड़े को उठाता है, और कानाफूसी करनेवाला परम मित्रों में भी फूट करा देता है।

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