Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 17:4 का संदर्भ-बिन्दु
इस पद में कुकर्मी, छलने वाले और झूठे मनुष्य की वृत्ति स्पष्ट हो जाती है। पंक्ति कहती है कि “कुकर्मी अनर्थ बात को ध्यान देकर सुनता है, और झूठा मनुष्य दुष्टता की बात की ओर कान लगाता है।” यह संदर्भ हमें यह दिखाता है कि सत्य और असत्य दोनों के प्रति दिलो-दिमाग की आदतें कैसे आचरण के ढांचे बनाती हैं।
परमेश्वर की दृष्टि में धारणा और नैतिकता
यह उद्धरण दिखाता है कि परमेश्वर के सामने नैतिक विवेक की असल परीक्षा बाहरी व्यवहार से अधिक अंतःकरण की दिशा पर निर्भर करती है। जो लोग छल, धोखा और नुकसान की बातें सुनते हैं, वे अपने अंतःकरण में उसी दुष्ट बात की संवेदना को पनपाते रहते हैं। परमेश्वर न्याय करता है कि कौन सच बोलता है और कौन छल को बढ़ावा देता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टता
Related passages का सार-तत्व
नीतिवचन की अन्य आयतें इस बात की पुष्टि करती हैं कि मनुष्य के आंतरिक दृष्टिकोण से ही बाहर का आचरण बनता है:
चर्च-कोर-समझ: 2-3 cross-reference
नीतिवचन 12:23 बताता है कि समझदार मनुष्य अनावश्यक बातों से दूर रहता है और ज्ञान को संभाल कर बोलता है; नीतिवचन 19:5 चेतावनी देता है कि झूठे लोग दंड पाएंगे। यह विचार इस पद के साथ संगत है कि झूठ और दुष्टता की ओर कान लगाना समाज में दुष्कर परिणाम लाता है।
आधुनिक toepassing (आज के संदर्भ में)
आज के समय में भी जब आपत्तिजनक से समाचार, अफवाहें या गपशप के बीच हैं, तो यह पाठ याद दिलाता है कि सत्य-प्रवृत्ति और आचरण के अनुसार सुनना-समझना आवश्यक है। कुकर्मी और झूठे लोग अपने उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए अनर्थ बातों की सुनवाई को बढ़ावा देते हैं। इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति चुनौतियों के बीच सत्य को पहचानने, सत्य बोलने और दुष्ट प्रवृत्तियों की सूचना से दूरी बनाए रखने के लिए सजग रहता है।
हिंदी निरूपण में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त विचार
मैथ्यू हेनरी, ऐबेर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार-सार विचार इस प्रकार रहे हैं: वे दर्शाते हैं कि दिल की स्थिति बाहरी शब्द-व्यवहार को मार्गदर्शित करती है; जो सुनते हैं और बोलते हैं, वे अपनी आत्मा के गुणों के प्रतिरूप बनते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण:
“कुकर्मी अनर्थ बात को ध्यान देकर सुनता है, और झूठा मनुष्य दुष्टता की बात की ओर कान लगाता है।” (नीतिवचन 17:4)
यदि किसी टिप्पणीकार के शब्द सीधे उद्धृत होते हैं, तो वे नीचे बताए गए पाठकों के संदर्भ के लिए संग्रहीत रहते हैं: मैथ्यू हेनरी, Albert Barnes, Adam Clarke के छोटे-छोटे विचार जिनमें यह स्पष्ट है कि मनुष्य के विचार उसकी आचरण-उन्मुख दिशा तय करते हैं।
संक्षिप्त समेकित निष्कर्ष
इस पद से स्पष्ट होता है कि सत्य-निष्ठा और नैतिक आत्मा के बिना आवाज़ें असत्य, धोखा और नुकसान को बढ़ावा देती हैं। परमेश्वर के सामने हमारे सुनने और बोलने के तरीके का चयन जीवन-निर्णय है: सत्य की दिशा में सुनना, और सत्य बोलना, ताकि दुष्ट प्रवृत्तियाँ पीछे छोड़ दी जाएँ।