Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 17:1 नीतिवचन 17:2 नीतिवचन 17:3 नीतिवचन 17:4 नीतिवचन 17:5 नीतिवचन 17:6 नीतिवचन 17:7 नीतिवचन 17:8 नीतिवचन 17:9 नीतिवचन 17:10 नीतिवचन 17:11 नीतिवचन 17:12 नीतिवचन 17:13 नीतिवचन 17:14 नीतिवचन 17:15 नीतिवचन 17:16 नीतिवचन 17:17 नीतिवचन 17:18 नीतिवचन 17:19 नीतिवचन 17:20 नीतिवचन 17:21 नीतिवचन 17:22 नीतिवचन 17:23 नीतिवचन 17:24 नीतिवचन 17:25 नीतिवचन 17:26 नीतिवचन 17:27 नीतिवचन 17:28



नीतिवचन 17:6 का संदर्भ: बूढ़ों की शोभा उनके नाती पोते हैं; और बाल-बच्चों की शोभा उनके माता-पिता हैं।
पूर्वकथन का केन्द्र और संदर्भ-स्थिति: इस पद में अकालीन परिवार-जीवन के उन मूल्यवान तत्वों को दर्शाया गया है जो समाज की शक्ति और स्थिरता बनते हैं। "बूढ़ों की शोभा" से धनी-फलित अनुभव, सिद्धांतों और नीतियों के गोपनीय भंडार का संकेत मिलता है; "बाल-बच्चों की शोभा" से परिवार-वंश और संतानों के कारण बनती प्रतिष्ठा उभरती है। यह एक समाज के नैतिक ढांचे की ईमानदार तस्वीर है जहाँ वृद्धों का सम्मान और बच्चों की सुरक्षा, दोनों एक साथ बढ़ते संकेत हैं।
ईश्वर-विश्वास और विश्वासघट के संकेत
परमेश्वर के दृष्टिकोण में यह कहना है कि परिवार के क्रम और परिवार-जनित सम्मान का अस्तित्व ही समाज के पवित्र दायित्वों को निभाने की दिशा देता है। वृद्धों की मान्यता, अनुभव और परख-समझ पर आधारित नेतृत्व को मान्यता देती है, जो परमेश्वर की व्यवस्था के अनुरूप है। साथ ही बच्चों के अनुपालन और माता-पिता के कारण पूजा-इतिहास में स्थान बनता है; यह बताता है कि ईश्वर परिवार को कैसे एक ठोस इकाई बनाकर समाज के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता है।
महत्त्वपूर्ण शब्दों और तस्वीरों की शुद्घता
अन्य से जुड़ी संदर्भ-व्याख्या
धीमे-धीमे परिवार की समृद्धि और बुजुर्गों का सम्मान अन्य आयतों में भी संकल्पित रूप में मिलता है:
- स्वयं धर्मशास्त्र में वृद्धों का सम्मान करने का निर्देश मिलता है, ताकि परिवार और समाज में नीति-नयम बने रहें।
- वंश परंपरा और उत्तराधिकार के बारे में भी निर्देश मिलते हैं कि बच्चों का सही मार्गदर्शन कैसे अंततः समाज के कल्याण में सहायक बने।
आधार-वाक्यों से मिलते संकेत
नीतिवचन के इस छोटे से वाक्य में दो मुख्य सिद्धांत निकलते हैं: एक, बुज़ुर्गों का सम्मान और अनुभव समाज की स्थिरता बनाते हैं; दो, संतानों की शिक्षा और माता-पिता के प्रभाव से परिवार की शोभा और प्रतिष्ठा बनती है।
आज के संदर्भ में'application
आज के समाज में इसका संदेश दोहराया जा सकता है—वृद्धों को सम्मान दें, उनकी कहानियों से सीख लें और बच्चों को प्रेम, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के साथ बड़ा करें। यह परिवार-आधार की संस्थागत शक्ति को मजबूत बनाता है और सामाजिक कर्तव्य की प्रेरणा देता है।
कैंवर Cross-References with brief notes
1) उत्पत्ति 18:19— पिता के धर्म-परम्पराओं के पालन की भूमिका।
2) यूहन्ना 13:34–35— एक दूसरे के प्रेम का नया आदेश, जो घर-परिवार में व्यवहार-आचरण को मार्गदर्शित करता है।
3) औपनिषद-प्रचलन में वृद्धों के सम्मान के गुणक— परिवार की नैतिकता और शिक्षा-परंपरा का संरक्षण।
उद्धृत sounding quotes: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के विशिष्ट शब्दים को संक्षेप में शामिल किया गया है; नीचे उद्धृत शाब्दिक अंश उपलब्ध नहीं हैं, पर उनकी व्याख्याओं के संकेत एकीकृत रूप से प्रस्तुत किये गए हैं:
Matthew Henry: बूढ़ों की शोभा—समाज में अनुभव और बुद्धि का सम्मान; बच्चों की शोभा—परिवार की सुदृढ़ता।
Albert Barnes: परिवार-सम्बन्धों की भूमिका, जहाँ वृद्ध-कर्तव्य और पितृत्व-पालन एक दूसरे के पूरक हैं।
Adam Clarke: यह वाक्य परिवार की नैतिक संरचना की दृढ़ता का प्रमाण है; माता-पिता-आचरण और बच्चों-उद्धार के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
समापन: यह पद हमें याद दिलाता है कि समाज की शोभा परिवार-आधार पर टिकी है—बूढ़ों के अनुभव का सम्मान और बाल-बच्चों के लिए सुरक्षित, शिक्षित परिवेश बनाना—यही परमेश्वर की व्यवस्था के अनुरूप जीवन जीने का रास्ता है।