Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 17:25 का संदर्भात्मक परिचय
यह पद अपने समय की पारिवारिक परस्थिति को उजागर करता है: एक मूर्ख पुत्र के कारण पिता उदास होता है और माता को शोक होता है। यह एक व्यावहारिक शिक्षण है जो माता-पिता के अनुभवों के कारण जीवन के कठिनाईपूर्ण परिणामों की ओर संकेत करता है।
पाठ का संदेश: परमेश्वर और विश्वास के प्रति संकेत
कहावतें इस बात पर जोर देती हैं कि परमेश्वर की व्यवस्थाओं के अनुरूप जीवन बिताने से परिवार में शान्ति और सम्मान बना रहता है, जबकि अन्यायपूर्ण या बिना-विचार व्यवहार से परिवार में पीड़ा बढ़ती है। मूर्खता—जो यहाँ पुत्र के व्यवहार में दिखती है—परिवारिक जीवन में अस्थिरता और दुख का कारण बनती है। ईश्वर की कृपा वही है जो चतुर, नैतिक और जिम्मेदार जीवन को प्रोत्साहित करती है; परन्तु जब व्यक्ति आलसी या हठीला रहता है, तब उसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टता
अन्य सन्निकट टिप्पणियाँ: कुछ तुलनात्मक पंक्तियाँ
नीतिवचन में बच्चों की शिक्षा और परिवार की कर्तव्यनिष्ठा पर केंद्रित अनेक आयतें हैं। MAS, BE, Clarke-आधारित सार: परमेश्वर की वाणी में अनुशासन और चरित्र निर्माण का महत्व बार-बार प्रस्तुत होता है; दुष्कारण व्यवहार से समाज और घर-वापसी में अपमान और पीड़ा बढ़ती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका छोटा परिचय
1) नीतिवचन 13:1— बुद्धिमान पुत्र अपनी माता की शिक्षा को ग्रहण करता है; मूर्ख नहीं। यह पाठ स्पष्ट करता है कि शिक्षा और विवेक परिवार की स्थिरता के लिए किस प्रकार आवश्यक है।
2) नीतिवचन 15:20— सुशिक्षित पुत्र खुशहाली का मार्ग बनाता है; माता-पिता के लिये शांति बनती है।
3) याकूब 1:19— सभी से पहले धीमे बोलना और सचेत रहना—यह युवा के लिए एक नैतिक मार्गदर्शन है ताकि गलतियों से बच सके।
आज के समय में व्यावहारिक अनुप्रयोग
- परिवार के भीतर सम्मान और संवाद की स्थापना करें: बच्चों को समझदारी से मार्गदर्शन देना और गलतियों पर प्रेमपूर्वक सुधारना।
- शिक्षा, नैतिकता और आत्म-नियंत्रण को प्रमुख बनाएं: अनुशासन के साथ भी करुणा और स्पष्ट सीमाएँ दें ताकि बच्चे जिम्मेदारी समझें।
- कठिन समय में धैर्य और नम्रता बनाए रखें: माता-पिता के लिए यह समय संकट नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का अवसर है।
संयुक्त सार
यह पद एक साधारण家庭-प्रश्न नहीं, बल्कि जीवन की वास्तविकता की स्मृति कराता है: बच्चों के आचरण के लिए माता-पिता का कर्तव्य और परमेश्वर की व्यवस्था में विश्वास से ही परिवार स्वस्थ रहता है। अगर हम बच्चों को विवेकशील बनाकर उनकी समझ में उन्हें सही दिशा दिखाते हैं, तो माता-पिता का शोक कम होगा और घर में आनंद और सम्मान बना रहेगा।
लेखन में उद्धरणीय बिंदु (Public-domain टीका से मिली संयुक्त अंतर्दृष्टियाँ)
यदि चाहें तो नीचे दी गयी पंक्तियाँ संदर्भ के रूप में देखी जा सकती हैं, परन्तु पूर्ण पाठ नहीं उद्धृत किया गया है:
“बच्चों का व्यवहार परिवार की स्थिति का दर्पण है; माता-पिता के लिए धैर्य और शिक्षण का हुनर आवश्यक है।”