Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 17:1 नीतिवचन 17:2 नीतिवचन 17:3 नीतिवचन 17:4 नीतिवचन 17:5 नीतिवचन 17:6 नीतिवचन 17:7 नीतिवचन 17:8 नीतिवचन 17:9 नीतिवचन 17:10 नीतिवचन 17:11 नीतिवचन 17:12 नीतिवचन 17:13 नीतिवचन 17:14 नीतिवचन 17:15 नीतिवचन 17:16 नीतिवचन 17:17 नीतिवचन 17:18 नीतिवचन 17:19 नीतिवचन 17:20 नीतिवचन 17:21 नीतिवचन 17:22 नीतिवचन 17:23 नीतिवचन 17:24 नीतिवचन 17:25 नीतिवचन 17:26 नीतिवचन 17:27 नीतिवचन 17:28



पाठ का परिचय
नीतिवचन 17:23 कहता है: "दुष्ट जन न्याय बिगाड़ने के लिये, अपनी गाँठ से घूस निकालता है।" यह संक्षेप वाक्य अनैतिक आचरण और रिश्वत की प्रवृत्ति पर तीखा प्रकाश डालता है। संदर्भ में यह पंक्ति उस générale बुद्धि को व्यक्त करती है कि दुष्ट व्यक्ति व्यवस्था को तोड़कर अपने हित साधते हैं — वह न्याय को खरीदने या प्रभावित करने के लिये चुपके से घूस देता है।
अध्याय के भीतर स्थान और संदर्भ
नीतिवचन 17 में व्यक्तिगत चरित्र, परिवारिक संबंध तथा सामाजिक व्यवहार पर कई छोटे-छोटे सबक हैं। यह आयत उन अन्य कहानियों के साथ खड़ी है जो ईमानदारी, विवेक और सत्य के पक्ष में हैं। यहाँ विरोधाभास स्पष्ट है: सत्कर्मी वचन और कार्य समाज को बनाते हैं, जबकि दुष्टों की चालें व्यवस्था को खोखला कर देती हैं।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
यह आयत दो स्तरों पर बोलती है—नैतिक और आध्यात्मिक। नैतिक रूप से यह बताती है कि रिश्वत और अनैतिक साधन न्याय को विकृत करते हैं। आध्यात्मिक रूप से यह चेतावनी है कि आत्मा के भीतर की गाँठ—लालच, लोभ और भ्रष्ट इरादा—इंसान का मार्ग भटकाते हैं। जो व्यक्ति अपने हृदय की "गांठ" से घूस निकालता है, वह बाहरी हीनता नहीं बल्कि अंतरात्मा की पतनशीलता प्रदर्शित करता है।
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व्यावहारिक अनुप्रयोग
हमारे समय में भी घूस और अनुचित लाभ के रूप अनेक रूपों में मौजूद हैं—छोटी-छोटी रियायतें, अनैतिक कम्प्रोमाइज़ या सत्ता के अनैतिक प्रयोग। नीतिवचन हमें याद दिलाता है कि न्याय और ईमानदारी दीर्घकालिक समुदाय के लिये आवश्यक हैं। व्यक्तिगत स्तर पर इसका अर्थ है:
प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के संक्षिप्त उद्धरण
मैथ्यू हेनरी ने इस सिद्धांत को रेखांकित करते हुए लिखा: "रिश्वत से न्याय का विनाश होता है"। (संक्षिप्त उद्धरण)। एल्बर्ट बार्न्स ने भी याद दिलाया कि घूस न केवल दूसरे को प्रभावित करती है बल्कि देने वाले के चरित्र को भी पतित कर देती है।
संक्षेप
नीतिवचन 17:23 सरल शब्दों में यह सत्य कहता है कि रिश्वत और अनैतिक साधन न्याय को भ्रष्ट कर देते हैं और दुष्ट का स्वभाव अंततः सामाजिक और आत्मिक हानि का कारण बनता है। पाठ हमें व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, न्याय और स्वच्छ आचरण बनाए रखने की चुनौती देता है। छोटे-छोटे निर्णयों में भी सत्य का पालन हमारा चरित्र और समाज दोनों बचा सकता है।