Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 कुरिन्थियों 13:6 बाइबल पद की व्याख्या
1 कुरिन्थियों 13:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
कुकर्म से आनन्दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्दित होता है।
1 कुरिन्थियों 13:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 कुरिन्थियों 13:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

3 यूहन्ना 1:3 (HINIRV) »
क्योंकि जब भाइयों ने आकर, तेरे उस सत्य की गवाही दी*, जिस पर तू सचमुच चलता है, तो मैं बहुत ही आनन्दित हुआ।

2 यूहन्ना 1:4 (HINIRV) »
मैं बहुत आनन्दित हुआ, कि मैंने तेरे कुछ बच्चों को उस आज्ञा के अनुसार, जो हमें पिता की ओर से मिली थी, सत्य पर चलते हुए पाया।

सीधी समझ: कुकर्म से आनंद नहीं, पर सत्य से आनंदित होना
1 कुरिन्थियों 13:6 का यह कथन बताता है कि प्रेम और नैतिक सहीपन में वास्तविक आनंद वही है जो सत्य पर टिका रहता है, न कि किसी भी पाखण्ड या गलत कर्म पर। यह वाक्य कहता है कि प्रेम कभी कुकर्म से प्रसन्न नहीं होता, बल्कि सत्य के साथ rejoicing करता है; यह दर्शन क्रिस्तान जीवन के मूल चरित्र को पकड़े हुए है — प्रेम की रोशनी में सत्य के अनुरोधों को स्वीकारना।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद 13वें अध्याय के अंत में है, जहां प्रेरित पतरस मसीह के प्रेम की महिमा, गुण और व्यवहार पर अंतःकरण से चर्चा कर रहे हैं। समुदाय के भीतर टिकाऊ और परस्पर सम्मानजनक जीवन कैसे जिएं, इस पर जोर है। यहाँ “ख़ुदगर्जी, ईर्ष्या, अहंकार” जैसे कर्म सत्य के साथ मेल नहीं खाते, जबकि प्रेम सत्य और न्याय के साथ चलने की प्रेरणा देता है।
व्याख्या के प्रमुख बिंदु
संबद्ध मार्गदर्शक विचार
- मैথ्यू हेनरी के अनुसार, प्रेम कुकर्म के साथ सह-अस्तित्व नहीं ढूंढ़ता, क्योंकि उसकी प्रकृति नैतिकता और सत्य पर टिकती है।
- अलबर्ट बार्न्स ने कहा कि 真यता और प्रेम का संयोजन हर प्रकार के पाप से मुक्ति दिलाने वाला है, और सच्चाई की उपासना ही वास्तविक आनन्द का स्रोत है।
- एडम क्लार्क ने समझाया कि यह वाक्य हमें यह सिखाता है कि प्रेम के अनुभव में, संकीर्णता नहीं, बल्कि सत्य की स्वतंत्रता तथा नैतिक आयामों की सराहना आवश्यक है।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप) और उनके अर्थ
- अन्य स्थान जो योद्धा-प्रेम और सत्य के साथ न्याय की आवश्यकता बताते हैं: वे जो प्रेम के कारण अन्याय नहीं करते; सत्य में चलना ही प्रेम का असली विकास है।
- समान विचारधारा वाले संदर्भ—जो कुकर्म बनाम सत्य के बीच चयन दिखाते हैं—यह दिखाते हैं कि क्रिश्चियन चरित्र कैसे सच और प्रेम को एक साथ जोड़ता है।
व्यावहारिकTakeaway
अपने व्यवहार में ऐसे स्थिर मानदंड बनाएं जो कुकर्म को कृत्रिम प्रसन्नता के बजाय सत्य के अनुसार स्पष्ट फ़ायदा दें। यदि आप प्रेम में हैं, तो आप सत्य के साथ खुलकर संवाद करेंगे, और गलत सुखों की जगह स्थायी संतोष चुनेंगे।
सार-संक्षेप
यह संदेश प्रेम की उच्चतम पारी के भीतर सत्य के प्रति प्रतिबद्धता की मांग करता है। प्रेम एक such आनंद देता है जो पाप की चमक से नहीं जुड़ता, बल्कि परमेश्वर के पथ पर चलकर सत्य में खुश होता है।