Old Testament
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1 कुरिन्थियों 13:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूँ, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूँ, और प्रेम न रखूँ, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।
1 कुरिन्थियों 13:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 कुरिन्थियों 13:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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याकूब 2:14 (HINIRV) »
हे मेरे भाइयों, यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो, तो उससे क्या लाभ? क्या ऐसा विश्वास कभी उसका उद्धार कर सकता है?


मुख्य Interpretive बिन्दु
1 कुरिन्थियों 13:3 में पवित्र प्रेम के अभाव में गतिविधियों का मूल्य न रहने की बात पृथक-सी नहीं, बल्कि आंतरिक मापदण्ड की गहराई दिखाती है। पौलुस बताते हैं कि भौतिक दान, आत्म-त्याग या दैहिक बलिदान तब भी व्यर्थ हो सकता है जब वह प्रेम के बिना किया जाए। प्रेम वह ईंधन है जो हर उन्नति को परमेश्वर के सामने ठहराता है और उसकी महान्ताओं को सार देता है।
साहित्यिक संदर्भ (लेखन-संदर्भ के अनुसार)
पौलुस ने बार-बार प्रमाणित किया है कि.charity-प्रेम सच्चे कुथा है; इत्यादि अध्याय 13 में प्रेम का चरित्र—दयालु, नहीं ईर्ष्या, नहीं अभिमान—प्रकाशीत है। यहाँ, चार कलाओं में निहित गुणों के साथ, यदि प्रेम नहीं है तो दिखावा ही रह जाएगा: धैर्य, दया, विनम्रता आदि बिना प्रेम के खोखले प्रतीक बन जाते हैं।
कथनात्मक महत्व (थियोलॉजिकल एहमियत)
यह वाक्य कहता है कि परमेश्वर के सामने हमारी धार्मिक क्रिया का मूल्य प्रेम के बिना व्यर्थ है। बोनस: न तो खुशी, न निष्ठा, न व्यक्तिगत बलिदान—सब कुछ प्रेम के साथ सार्थक होते हैं। प्रेम तब ही पूर्ण होता है जब वह अनुदान नहीं, बल्कि जीवन का तत्त्व बन जाए।
पवित्रशास्त्र में अन्य क्रॉस-रेफरन्स
विचार-विमर्श के कुछ प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यदि सब कुछ दे दें—आर्थिक वैभव, तात्कालिक बलिदान—परन्तु प्रेम न हो, तो वह सब निरर्थक है। प्रेम ही वह शक्ति है जो गतिविधियों को सार देती है, और उसे ईश्वर के सामने मान्य बनाती है।
इतिहास-आधारित उद्धरण (जो सीधे उल्लेखित हैं)
यह पाठ सीधे Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-संदर्भों से प्रेरणा ले सकता है। नीचे इन विचारों के संक्षिप्त सार शामिल हैं; परन्तु पूर्ण उद्धरण केवल संदर्भ के लिये हैं:
• Matthew Henry: "Love is the rule of every duty; without it all outward duties are but sounding brass." (संरक्षित सार)
• Albert Barnes: प्रेम के बिना दान और बलिदान का कठोरता से मूल्यांकन किया गया है, क्योंकि प्रेम के बिना कर्म निष्क्रिय रहते हैं।
• Adam Clarke: प्रेम के वास्तविक गुण और उसका आचरण—धैर्य, करुणा, विनम्रता—यही कृपा को परखते हैं।
क्लिप-निर्देशन (Cross-References के साथ)
1. रोम 12:9-10 — प्रेम के वास्तविक चरित्र को क्रियात्मक बनाता है. यह बताता है कि प्रेम कैसे व्यवहार में उत्पन्न होता है।
2. 1 योह 4:7-12 — प्रेम के कारण हमारी पहचान और ईश्वर के साथ सम्बन्ध मजबूत होते हैं।
3. मत्ती 22:37-40 — प्रेम परमेश्वर और पड़ोसी के प्रति मुख्य नियम बनकर सभी ढाँचों को संचालित करता है।