Old Testament
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1 कुरिन्थियों 8:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यदि कोई समझे, कि मैं कुछ जानता हूँ, तो जैसा जानना चाहिए वैसा अब तक नहीं जानता।
1 कुरिन्थियों 8:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 कुरिन्थियों 8:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 13:12 (HINIRV) »
अब हमें दर्पण में धुँधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने-सामने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहचानूँगा, जैसा मैं पहचाना गया हूँ।

1 कुरिन्थियों 3:18 (HINIRV) »
कोई अपने आप को धोखा न दे। यदि तुम में से कोई इस संसार में अपने आप को ज्ञानी समझे, तो मूर्ख बने कि ज्ञानी हो जाए।

1 तीमुथियुस 6:3 (HINIRV) »
यदि कोई और ही प्रकार का उपदेश देता है और खरी बातों को, अर्थात् हमारे प्रभु यीशु मसीह की बातों को और उस उपदेश को नहीं मानता, जो भक्ति के अनुसार है।
1 कुरिन्थियों 8:2 का तात्पर्य: खुदी समझ से ऊपर सत्य
पावलुस का यह कोरिस के समुदाय को लिखे गए पत्र का हिस्सा है, जहाँ वे ईश्वर के बारे में ज्ञान और प्रेम के बीच संतुलन पर बल दे रहे हैं। खासकर अज्ञानी बनाम ज्ञान वाले चर्च में, उन्होंने यह कहा कि ज्ञान स्वयं में अर्ध-ज्ञान है और यह मानवीय अहंकार को जन्म दे सकता है।
धर्मवाक्य से क्या स्पष्ट होता है
इस वाक्य में स्पष्ट संदेश है: यदि कोई समझे कि वह सब कुछ जानता है, तो वह सचमुच में इसके बारे में कुछ खास नहीं जानता—क्योंकि वास्तविक ज्ञान की ऊँचाई ঈश्वर के कारण है और उसमें humility (विनम्रता) आवश्यक है। ज्ञान से यदि प्रेम और सेवा का मार्ग न निकलता हो, तो वह ज्ञान नष्ट हो सकता है।
शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
यथार्थ पाठ से जुड़े अन्य हिस्से
इस विषय से संबंधित कुछ प्रकाशक पाठक समझें कि किन बातों पर ध्यान देना चाहिए: परमेश्वर की सत्ता, प्रेम की कड़ियाँ और कभी-कभी अज्ञान को भी संबंधित अनुभवों के साथ परखा जाना चाहिए।
मुख्य शब्दावलियाँ और उनसे क्या संकेत मिलते हैं
यह पाठ हमें यह सिखाता है कि ज्ञान और प्रेम के बीच संतुलन आवश्यक है। जब ज्ञान भावनात्मक या व्यवहारिक रूप से प्रेम के ऊपर आ जाता है, तब वह शब्दों में सीमित हो सकता है। इसलिए ईश्वर के बारे में वास्तविक समझ प्रेम की दिशा में बढ़ती है—जो दूसरों के हित के लिए सेवा और आत्म-त्याग को प्रेरित करती है।
अन्य प्रस्थान-पंक्तियाँ (Cross-references)
आज के संदर्भ में जीवन-प्रयोग
आज के चर्च और व्यक्तिगत जीवन में यह संदेश इस तरह स्पष्ट है: ज्ञान दिखाने के लिए नहीं, बल्कि प्रेम को मजबूत करने के लिए उपयुक्त है। यदि आप स्वयं को समझते हैं कि आप सब कुछ जानते हैं, तो यह चेतावनी है कि आप अभी भी सीखना सीख रहे हैं। विनम्र बने रहें, दूसरों की दृष्टि से चीजों को देखने کی कोशिश करें, और परमेश्वर के प्रकाश में अपने ज्ञान को परखते रहें।
महत्वपूर्ण उद्धरण (सूचित)
यह पंक्ति अपने मूल स्वर से ज्ञान की सीमाओं को उजागर करती है: “यदि कोई समझे, कि मैं कुछ जानता हूँ, तो जैसा जानना चाहिए वैसा अब तक नहीं जानता।”
उद्धरण स्रोत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की सार्वजनिक-डोमेन चर्चाओं के संकेतक विचार इस सार को समग्र रूप से गढ़ते हैं।