Old Testament
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1 कुरिन्थियों 8:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
भोजन हमें परमेश्वर के निकट नहीं पहुँचाता, यदि हम न खाएँ, तो हमारी कुछ हानि नहीं, और यदि खाएँ, तो कुछ लाभ नहीं।
1 कुरिन्थियों 8:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 कुरिन्थियों 8:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 14:17 (HINIRV) »
क्योंकि परमेश्वर का राज्य खाना-पीना नहीं; परन्तु धार्मिकता और मिलाप और वह आनन्द है जो पवित्र आत्मा से होता है।

इब्रानियों 13:9 (HINIRV) »
नाना प्रकार के और ऊपरी उपदेशों से न भरमाए जाओ, क्योंकि मन का अनुग्रह से दृढ़ रहना भला है, न कि उन खाने की वस्तुओं से जिनसे काम रखनेवालों को कुछ लाभ न हुआ।

1 कुरिन्थियों 6:13 (HINIRV) »
भोजन पेट के लिये, और पेट भोजन के लिये है, परन्तु परमेश्वर इसको और उसको दोनों को नाश करेगा, परन्तु देह व्यभिचार के लिये नहीं, वरन् प्रभु के लिये; और प्रभु देह के लिये है।
1 कुरिन्थियों 8:8 — भोजन परमेश्वर के निकट नहीं पहुँचाता
यहVerse यह स्मरण दिलाता है कि साधर्म्य की दिशा में जो आचार, प्रेम और आत्मनिरीक्षण है, वही वास्तविक ऊँचाई है, भोजन या उसे छोड़ देने से हमारे धार्मिक लाभ तय नहीं होते। कुरिन्थ के समुदाय में भोज्न-बन्धन से अनेक मतभेद उठे थे—कौन सा भोजन पवित्र है, कौन नहीं; कौन से आहार मंदिर-यज्ञ से जुड़े हैं, और कबखत मौलिक स्वातंत्र्य अपने से आगे बढ़कर दूसरे की आत्मिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। प्रेरित पतरस की तरह यीशु ने भी यह दिखाया कि प्रेम और एकता के कारण अजनबीय विपरीत विचारों को ऊपर छोड़ना चाहिए; क्योंकि खानों में जो है वह आत्मा को नहीं, बल्कि मनुष्य के विवेक को प्रभावित करता है।
मूल संदर्भ और प्रमुख संदेश
पौल के लिखे इस पाठ में प्रमुख संदेश यह है कि परमेश्वर के निकट पहुँचने के लिए यथार्थ शक्ति और पवित्रता आवश्यक है, भोजन-प्रकार अपने आप में योग्यता नहीं बनाते। यदि किसी के आहार से किसीका नुकसान हो सकता है, तो उसे किसी भी प्रकार भोजन से परहेज करना चाहिए; यदि भोजन से लाभ हो, तो भी वह विशेष रूप से परमेश्वर से निकटता नहीं बढ़ाता। यह एक प्रेरित-सी विद्वता है: सच मायने में हमारे आचार का माप प्रेम है—क्योंकि प्रेम ही दूसरे के सभी अधिकार और विवेक का सम्मान करता है।
मुख्य विचारों की संरचना
भरोसेमंद सहारा – पारस्परिक संदर्भ
यहाँ कुछ cross-references हैं जो cercano विचारों को मजबूत करते हैं:
- रोमियों 14:14-23: हमारे विवेक के अनुसार आहार-धर्म पर निर्भरता, पर दूसरों की पूर्ण स्वतंत्रता का सम्मान।
- गलातियों 5:13: यह उद्धार समझाता है कि हमारे भीतर की स्वतंत्रता प्रेम से संचालित होनी चाहिए, न कि स्वार्थ से।
- प्रकाश 2:15: प्रेरित पतरस का सिद्धांत—हमारी आचरण-आस्तिकता दूसरों के विश्वास-हृदयों को प्रभावित करती है, न कि केवल अपने लिए.
आध्यात्मिक समीक्षा
भोजन पर निर्भरता से अधिक महत्वपूर्ण है कि हम कैसे एक-दूसरे के साथ चलते हैं। यदि किसी भाई-बहन के लिए किसी भोजन का सेवन असहज है, तो यह प्रेम नहीं है कि हम अपने अधिकार के साथ लड़ें; बल्कि हमें अपने विवेक से विवेकपूर्ण निर्णय लेने चाहिए। यह पाठ हमें सिखाता है कि वास्तविक फल परमेश्वर की निकटता से आता है, न कि भोजन के प्रयोग से—और यह निकटता प्रेम, नम्रता और एकता के आधार पर बनती है।
प्राचीन टिप्पणियाँ (संक्षेप में)
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से मिलती-जुलती धारणाएँ इस प्रकार मिलती हैं: भोजन की कला से मुक्त होना अच्छा है, पर प्रेम और सह-अस्तित्व का मूल्य ऊँचा है; यदि किसी कारण से भोजन से मेरे भाई को ठेस पहुँचे तो मुझे त्याग करना चाहिए; वास्तव में परमेश्वर के निकट आना दिल से है, न कि खाने के द्वारा। (इन टिप्पणीकारों के विशिष्ट उद्धरण नीचे उद्धृत नहीं हैं, पर उनके प्रमुख विचार इस पंक्ति में समाहित हैं।)
छोटी devotional सोचा-चिंतन
यदि आप किसी ascetic नियम के भीतर रहते हैं, या दूसरों के विश्वास के कारण अपने अधिकारों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं, तो यह सच स्वयं को याद दिलाता है: परमेश्वर की निकटता से अधिक मूल्यपूर्ण कुछ नहीं। प्रेम के साथ निर्णय लें, ताकि आपकी स्वतंत्रता भी दूसरों के विश्वास को मजबूत करे, न कि उसे घायल करे।