1 कुरिन्थियों 3:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि अब तक शारीरिक हो। इसलिए, कि जब तुम में ईर्ष्या और झगड़ा है, तो क्या तुम शारीरिक नहीं? और मनुष्य की रीति पर नहीं चलते?

1 कुरिन्थियों 3:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधी बात का अर्थ

1 कुरिन्थियों 3:3 में पवित्र लेखक स्पष्ट कहते हैं कि यह असल में बात शारीरिक और ईर्ष्या-झगड़े से भरी हुई है। जब among you there is अभी भी ईर्ष्या और झगड़ा, तो आप सचमुच शारीरिक ढंग से नहीं चलते? आप मानव रीति-रिवाज के अनुसार जीवन नहीं जीते हैं। यह वाक्य एक चिंता को दर्शाता है कि ईसाई समुदाय परमेश्वर की आत्मिक योजना के अनुरूप नहीं चल रहा, बल्कि अपने हित, प्रतिस्पर्धा और व्यक्तित्वों के अनुसार चल रहा है।

प्रसंगिक पृष्ठभूमि

पत्र कुिन्थ के लोगों के बीच मंदिर की संस्कृति के प्रभाव में विभाजन और व्यक्तिपरक नेतृत्व की मांग दिखती है। पॉल यह स्पष्ट कर रहे हैं कि विश्वसनीय ईसाई जीवन परमात्मा की आत्मा के निर्देश और प्रेम-भाव के अनुसार चलता है, न कि पार्टीबाजी, ईर्ष्या या व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के आधार पर।

व्याख्यात्मक दृष्टिकोण

- ईर्ष्या और झगड़ा आत्मिक नहीं, बल्कि सांसारिक प्रवृत्ति का फल हैं; यह सूचित करता है कि वे पवित्र आत्मा से संचालित नहीं होते।

- “शारीरिक” से तात्पर्य वह जीवनशैली है जो फिजिकल स्वाद, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत फायदे की खोज में है, न कि प्रेम, एकता और परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप।

- कुरिन्थ की सभा को पुनः याद दिलाते हैं कि उनका आचरण यह दर्शाता है कि वे सत्य के अनुसार नहीं बल्कि प्राकृतिक रीति-रिवाजों के अनुसार चल रहे हैं।

छोटा थीमेटिक सार

  • आत्मीय बनाम सांसारिक नहीं चलना
  • ईर्ष्या-झगड़े को पहचानना और खत्म करना
  • परमेश्वर की योजना के अनुरूप एकता का pursuing

संबद्ध वचन और विचार

1) कोरिन्थियों के पहले अध्याय में—कथन कि यदि एक से सुनकर दूसरे से, आदि, तो मानव-सत्ता के बजाय ঈশ্বর के मार्ग का अनुसरण करें।

2) गालातियों 5:16-26—आत्मा से चलना बनाम शरीर से चलना; फल–स्वरुप प्रेम, Joy, शांतिपूर्ण व्यवहार।

3) योहन्ना 13:34-35—ईश्वर प्रेम के नए आदेश के साथ एकता को मजबूत करना।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतित उद्धरणों की पूर्ण पाठ नहीं, पर संकेत)

- रोमियों 8:5-8: आत्मा से जीवन, शारीरिक मन की राहों से नहीं; यह बताता है कि सांसारिकता से चलना परमेश्वर के लिये मरघट है।

- गलातियों 5:19-21: शरीर की फलों को बताता है कि वे अधर्म की राह का परिणाम हैं; पर आत्मा के फलों को विकसित करने पर जीवन मिलता है।

- यूहन्ना 17:21: एकता का प्रार्थना-संदेश—ताकि संसार विश्वास करे कि पिता ने भेजा है।

शाब्दिक-आचार-रोपण (व्यावहारिक विवेचना)

हम कैसे शारीरिक रीति-रिवाज से ऊपर उठ सकते हैं? एकता के लिए विचार करें: क्या हमारी चर्चाई, समूह या नेता-चाहत एक ऐसी शक्ति बन गई है जो प्रेम के बजाय प्रतिस्पर्धा को बढ़ाती है? पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में प्रेम, विनम्रता और एकता की संस्कृति बनाइए।

संक्षिप्त उपयोगी निष्कर्ष

  • ईर्ष्या और झगड़े को पहचानें—ये आत्मिक जीवन के विरुद्ध हैं।
  • पवित्र आत्मा के नेतृत्व के अनुरूप चलना चाहिए, न कि मानव रीति-रिवाजों के अनुसार।
  • समान लक्ष्य और प्रेम की नींव पर चर्चाओं को आगे बढ़ाएं, ताकि एकता बनी रहे।

महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सीधे पाठ नहीं उद्धृत किया गया है; समुच्चय में उनके आम-शैली के विचारों का आपने-देखा-डाला गया संकलन किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 कुरिन्थियों 3:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इसलिए कि जहाँ ईर्ष्या और विरोध होता है, वहाँ बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्कर्म भी होता है।

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पर यदि तुम एक दूसरे को दाँत से काटते और फाड़ खाते हो, तो चौकस रहो, कि एक दूसरे का सत्यानाश न कर दो।

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क्योंकि मुझे डर है, कहीं ऐसा न हो, कि मैं आकर जैसा चाहता हूँ, वैसा तुम्हें न पाऊँ; और मुझे भी जैसा तुम नहीं चाहते वैसा ही पाओ, कि तुम में झगड़ा, डाह, क्रोध, विरोध, ईर्ष्या, चुगली, अभिमान और बखेड़े हों।

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