Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 6:1 2 कुरिन्थियों 6:2 2 कुरिन्थियों 6:3 2 कुरिन्थियों 6:4 2 कुरिन्थियों 6:5 2 कुरिन्थियों 6:6 2 कुरिन्थियों 6:7 2 कुरिन्थियों 6:8 2 कुरिन्थियों 6:9 2 कुरिन्थियों 6:10 2 कुरिन्थियों 6:11 2 कुरिन्थियों 6:12 2 कुरिन्थियों 6:13 2 कुरिन्थियों 6:14 2 कुरिन्थियों 6:15 2 कुरिन्थियों 6:16 2 कुरिन्थियों 6:17 2 कुरिन्थियों 6:18



2 कुरिन्थियों 6:4 — सरल अभिपादन
इस आयत का साक्ष्य देता है कि परमेश्वर के सेवक कठिन परिस्थितियों में भी अपने आचरण से सक्रिय आत्म-निग्रह औरสัตย์-उद्धार दिखाते हैं; बड़ी धैर्य के साथ वे क्लेश, दरिद्रता और संकटों में भी अपनी विश्वसनीय सेवक-छवि बनाए रखते हैं।
संदर्भ और पृष्ठभूमि
पौलुस अपने क्रूस-यात्रा-प्रेरित संदेश के क्रम में यीशु-प्रिय शिष्य के तौर पर मत्वपूर्ण चुनौती प्रस्तुत करता है—कठिन समय में भी चरित्र बनाए रखना। यह पाठ अस्थिरता, वित्तीय कमी और शारीरिक-आत्मिक दबावों के बीच ईमानदार सेवक-जीवन का उदाहरण देता है। हमारे प्रभु के साक्षी होने का वास्तविक प्रमाण तब आता है जब बाहरी परिस्थितियाँ कितनी सुगम हों, यह मायने नहीं रखता—हम अपने विरित, धैर्य और नम्रता के साथ परमेश्वर के विश्वासयोग्यों के रूप में सामने आते हैं।
interpretive observations
थीमैटिक तत्त्व-सूची
अन्य संदर्भ और उनके अर्थ
यह संदेश पुराने वचन-उद्धरणों के साथ संगत है: एक तरफ से क्लेशों में धैर्य, और दूसरी तरफ दरिद्रता-स्थिति में भी आत्म-संयम। पौलुस का उद्देश्य यह है कि विश्वासियों को दिखाना चाहिए कि वे ईश्वर के काम पर भरोसा बनाते हैं, भले परिस्थितियाँ कैसी भी हों.
कोई समान विचारधारा, जैसे कि परीक्षण-परिक्षाओं के बीच सतर्कता और नम्रता, अन्य आयतों में भी उल्लेखित है; यह संदेश बताता है कि चले-हुए मार्ग पर पवित्र चरित्र की कला कैसे विकसित करनी है।
कथन-युक्त क्रॉस-रेफरेंस
1) रोमियों 5:3-4 — tribulations से धैर्य और धैर्य से आशा को विकसित करना।
2) याकूब 1:3-4 — परीक्षण से स्थिरता का निर्माण, ताकि चरित्र पुष्ट हो।
3) तीतुस 2:11-14 — गुरु-सेवा के लिए योग्य जीवनशैली का आह्वान, जो शुद्ध, शान्त, और भलमानस हो।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
जब भी आप कठिनाइयों से गुजरें, अपने व्यवहार से यह दिखायें कि आप परमेश्वर के सेवक हैं: धैर्य रखें, जरूरत पड़े तो सहायता मांगें, और संकटों में भी नैतिकता से न भागें। यह आपके विश्वास को मजबूती देता है और दूसरों के लिए प्रेरणा बनता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण — सार्वजनिक-डायम ऑफ कॉमेंट्री से
अगर उपयुक्त हो, तो नीचे के स्रोतों से संक्षेपित विचार मिलते हैं: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke।
उद्धरण संकेत: “हर बात में परमेश्वर के सेवकों के समान अपने सद्गुणों को प्रगट करते हैं” — यह शब्दावली इन जन-उद्धरणों में प्रत्यक्ष नहीं है, पर उनकी भावना में समान है।