Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 6:1 2 कुरिन्थियों 6:2 2 कुरिन्थियों 6:3 2 कुरिन्थियों 6:4 2 कुरिन्थियों 6:5 2 कुरिन्थियों 6:6 2 कुरिन्थियों 6:7 2 कुरिन्थियों 6:8 2 कुरिन्थियों 6:9 2 कुरिन्थियों 6:10 2 कुरिन्थियों 6:11 2 कुरिन्थियों 6:12 2 कुरिन्थियों 6:13 2 कुरिन्थियों 6:14 2 कुरिन्थियों 6:15 2 कुरिन्थियों 6:16 2 कुरिन्थियों 6:17 2 कुरिन्थियों 6:18



2 कुरिन्थियों 6:14 — संदर्भ और अर्थ
यह पवित्र वचन ईसा मसीह के पहले शाब्दिक रिश्ते-झगड़े से भरे एक मिशनरी समुदाय के संदर्भ में लिखा गया है। पॉल ने ठोस रूप से चेतावनी दी है कि विश्वासियों को अविश्वासियों के साथ मिलकर “आसमान-भूमि” के समान नहीं होना चाहिए—यानी उनका धर्म-जीवन और नैतिक मानक एक-दूसरे से टकरा न जाएं। यह चेतावनी दो चीजों को उजागर करती है: परमेश्वर की पवित्रता और मसीह-विश्वास की एक-अर्थता की ज़रूरत; तथा यह कि राज्यों, विचारधाराओं और जीवन-शैली के बीच असमानता का प्रभाव समुदाय और आस्था पर पड़ता है।
पद का मूल भाव और प्रभु का स्वरूप
पौलुस स्पष्ट करते हैं कि इस संसार की धार्मिकता-आस्था का विशिष्ट चिह्न प्रेम और सत्य है, न कि साझा भागीदारी के रूप में असंगत जीवन-शैलियाँ। “जो देव-निष्ठा और अधर्म” के बीच संतुलन बनाते हैं, वे न तो प्रभु के निकट रहते हैं और न ही उनके आशीर्वाद की अनुभूति। यह एक चेतावनी है कि जो रोशनी में चल रहा है, वह अंधकार के साथ नहीं हो सकता; जो पवित्रता में रहता है, वह अधर्म के साथ नहीं ढल सकता।
शब्द-चित्र और महत्वपूर्ण विचार
अनुशंसित क्रॉस-रेफ़रेंसेस और उनके सार
1) याकूब 4:4— विश्वासी बनकर भी संसार के साथ मित्रता बहाल रखना विश्वास के भागीदारी के लिए खतरा।
2) योहन्ना 1:5— प्रभु प्रकाश है, जहाँ अंधकार नहीं; विश्वास का जीवन प्रकाश के अनुरूप होना चाहिए।
3) यूहन्ना 17:14–17— यीशु के अनुयायों को संसार से नहीं, बल्कि खरे सिद्धांतों से अलग रहने की शिक्षा।
अनुवादित शब्दों का छोटा स्पष्टीकरण
“अविश्वासियों के साथ असमान जूए में न जुतो” का तात्पर्य यह है कि एक ईमानदार और पवित्र आचरण एक सम्मानित गठबंधन है, न कि किसी भी स्थिति में धर्म-जीवन के साथ असंगतता। “धार्मिकता और अधर्म का मेल” का उल्लेख यह संकेत करता है कि मसीही चरित्र और पापपूर्ण जीवन एक ही स्रोत से निष्कासित नहीं हो सकते।
आज का व्यवहारिक अनुप्रयोग
इन विचारों का समेकन करना 19वीं-शताब्दी के प्रसिद्ध टीका-लेखकों के स्पष्ट संकेतों के साथ होता है, जिसमें मोड़ पर अनुशासन और प्रेम के संतुलन की चर्चा मिलती है; परन्तु मुख्य संदेश आज भी स्पष्ट है: विश्वास के प्रकाश में जीना, और अंधकार के साथ नहीं मिलना।