यशायाह 5:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हाय उन पर जो अपनी दृष्टि में ज्ञानी और अपने लेखे बुद्धिमान हैं! (नीति. 3:7, 26:12, रोम. 12:16)

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यशायाह 5:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 5:21 का सिरला अर्थ और संदर्भ

इस पद का मूल संदेश है—जो लोग अपनी बुद्धि को परमेश्वर की ज्ञान से ऊँचा मानते हैं, वे विपत्ति के समय भी सच्ची दृष्टि नहीं पा पाते। यहाँ अभिमान के कारण लोग नैतिक और नैतिक विवेक से अंधे होकर रहते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने आप को उच्च मान लिया है।

व्याख्यात्मक पृष्ठभूमि

यशायाह के समय ईश्वरीय दबाव और विशेषकर यरूशलम और यहूदिया के नेताओं के व्यभिचार, अन्याय और भ्रष्टाचार के कारण परमेश्वर एक दया-भक्ति की चेतावनी दे रहे हैं। अध्याय पांच में “आकाशी फसल” के रूपक के भीतर, परमेश्वर ने एक vineyard (बाग) का उदाहरण देकर देश के सामाजिक-आर्थिक असमानताओं और नैतिक पतन की कड़ी निंदा की है। यह Verse 21 उन्हीं प्रवृत्तियों की कड़ी आलोचना है—जो अपनी बुद्धि और गुस्से से परमेश्वर की योजना को चुनौती देते हैं।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • हाय उन पर—यह एक चेतावनी-आह्वान है, नीतिगत अभिमान का निषेध।
  • जो अपनी दृष्टि में ज्ञानी हैं—मानसिक अति-विश्वास, आत्म-गौरव और धर्म-कृत्य में स्वार्थ की हद तक प्रचलन।
  • अपने लेखे बुद्धिमान हैं—कानून, नीति और विवेक को भी अपने हिसाब से पढ़ना, ईश्वर की भूमिका को छोड़ना।

संकेतात्मक संदर्भ

यहाँ अन्य आयतनिक विचारधाराएँ हैं जो इस प्रकार के अभिमान के खिलाफ चेतावनी देती हैं—

  • नीति से भरी बुद्धिमत्ता पर निर्भरता बनाम परमेश्वर की मार्गदर्शक दृष्टि—जिनमें चेतावनी है कि ज्ञान बिना भक्ति के चातुर्य नहीं।
  • धर्म के बाहरी प्रदर्शन के साथ आंतरिक बदलाव की कमी—आचार-विचार में नम्रता और न्याय चाहिए, न कि दिखावा।

मूल उद्धरण से नीति-संदेश (सारांश)

इस पद के अनुसार ज्ञान और बुद्धि का सबसे बड़ा उद्देश्य परमेश्वर के अनुरूप जीवन है—जो अपनी दृष्टि को, परमेश्वर के प्रेरित नियम से ऊँचा मानते हैं, वे अंततः गलत दिशा में जाते हैं।

अनुसर्ग-आध्याय से 2-3 क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेपित व्याख्या)

  • नीतिसंस्मरण 3:7 – अपने आप को ऊँचा न समझो; परमेश्वर की कृपा से ही सच्चा ज्ञान आता है।
  • नीति 26:12 – क्या तुम्हें ज्ञान है? उसे नम्रता और विवेक के साथ ग्रहण करो।
  • रोम 12:16 – एक-जन की तरह सोचो, आत्म-गौरव से दूर रहो, विनम्रतापूर्वक दूसरेों के अनुसार चलो।

सिर्फ संदर्भ नहीं, व्यावहारिकtakeaway

  1. अपने ज्ञान पर हावी होने के बजाय परमेश्वर के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।
  2. धर्म-आचरण में दिखावा छोड़कर सत्य और न्याय के साथ व्यवहार करें।
  3. हमारी स्थापत्य परख: क्या हमारे निर्णय परमेश्वर के नियमों के अनुरूप हैं, न कि सामाजिक मान्यताओं के अनुसार?

कथनात्मक निष्कर्ष

यशायाह 5:21 हमें याद दिलाता है कि आत्म-गौरव और बुद्धिमानी का दायरा तब तक ही सही है जब वह परमेश्वर की योजना और न्याय के अनुरूप हो। यदि ज्ञान केवल स्वार्थ से संचालित हो, तो उसका परिणाम अन्याय और पतन ही होता है।

नोट: इस पाठ के विश्लेषण में पुराने पवित्र-ग्रंथ टिप्पणीकारों के सामान्य मूल्यांकन को समाहित किया गया है, जिसमें उनके विचारों का संक्षिप्त संदर्भ और “सीधे उद्धरण” आवश्यकतानुसार शामिल किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 5:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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