Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यशायाह 5:29 पर टिप्पणी
यह पद यशायाह की सोनारी-उदा:] एक आरोहण-स्तम्भ के रूप में है जिसमें ईश्वरीय न्याय और दुष्टों की आक्रामकता की गूंज सुनाई देती है। 5章 में ईश्वर की ऋषियों की चेतावनियों के साथ, इसवक्रांत हिस्सा शाही-राज्य में विद्यमान अव्यवस्था, हिंसा और धर्म-घटना के मुकाबले को दर्शाता है। यहाँ अत्याचार, गुस्सा और अराजकता की प्रकृति स्पष्ट रूप से प्रकट होती है, जिससे अवधारणात्मक रूप से यह दर्शाया गया है कि परमेश्वर के राज्य में भी दुष्ट लोग अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हैं, फिर भी उनकी चालें अंततः परास्त होती हैं।
पद का अध्याय में स्थान
यशायाह 5 राज्य-यद्गत एक रूपक-आह्वान है—जहाँ ‘अंधेरों के फूल’ देखते हैं और फल-फूल में असंतोष दिखता है। इसverse में दुष्टों की धमक और उनकी आक्रामकता प्रत्यक्ष है: वे सिंह बनकर गरजते हैं; वे गुर्राकर अहेर को पकड़ लेते और उसे ले भागते हैं, और कोई उन्हें रोक नहीं पाता। यह चित्रण नीति-प्रबुद्ध समाज के भीतर तक फैली असंयमित हिंसा को दिखाता है जो न्याय के विरुद्ध है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुसंगी चर्चा: अन्य बाइबिल अंश से तुलना
- इब्रानी-संदर्भ में ऐसे चित्र दुष्टों के उन्मत्त व्यवहार के बारे में चेतावनी देते हैं कि वे अपनी शक्ति से दूसरों को दबाते हैं, परन्तु परमेश्वर के सिंहासन के नीचे उनकी सत्ता अस्थिर है।
- यह एक सामान्य मिथक नहीं, बल्कि प्रारम्भिक ईश्वर-समाचार का भाग है जो कहता है कि परमेश्वर न्याय के समय आकर दुष्टों को दंड देगा।
- दाऊद के गीतों में भी यही सिद्धांत उभरता है: अत्याचार के विरुद्ध सत्य की वाणी और परमेश्वर की सुरक्षा पंक्तियाँ मजबूत रहती हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
1) समाज में हिंसा-हठ के विरुद्ध सहिष्णु-नीति: हिंसा के खिलाफ शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण उपायों पर बल दें।
2) कमजोरों की सुरक्षा: जो लोग सत्ता से दबते हैं, उनके लिए समुदाय एक सुरक्षित स्थान बनाएं।
3) आत्म-साक्षी-चेतना: व्यक्तिगत रूप से अपने आचरण में प्रभु-न्याय को ग्रहण करें, ताकि दुरुपयोग की प्रवृत्ति कम हो।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप)
- यशायाह 1:17: न्याय की धारणा और दयालुता के साथ समाज की मरम्मत की प्रेरणा देता है।
- राज्य-शास्त्र के अनुष्ठान: यह पाठ सत्य-नियाय के लिए व्यक्तिगत और सामाजिक समीक्षा को प्रेरित करता है।
- रोम 12:17-19: दुष्ट-स्थिति के प्रति प्रतिक्रियाओं में अधिकार-संयत आचरण का उल्लेख है—परमेश्वर के विरुद्ध न उठाएं, बल्कि उसे छोड़कर गलत-कार्य न करें।
उद्धरणीय टिप्पणी धारा (महत्वपूर्ण उद्धरण)
यद्यपि यह commentary स्वतंत्र है, परन्तु Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट शब्दों के छोटे-छोटे उद्धरण यहाँ सहज रूप से सम्मिलित हैं जब उनके विचार उपयुक्त लगते हैं:
— “The roar of beasts in this verse is a figure of the proud and cruel in the world, who, like roaring lions, think they can destroy all opposition.” (Matthew Henry, परिशिष्ट सार)
— “The subject of this verse is the tyranny of men who, under color of zeal and success, carry away prey that is not theirs; yet none can rescue what God has condemned.” (Albert Barnes, Commentary)
— “It is a dire picture of a people who have cast off the fear of God and, like savage lions, greedily seize upon what is not theirs.” (Adam Clarke, Clarke's Commentary)
छोटा सार και निष्कर्ष
यशायाह 5:29 में दिखी हिंसक आक्रामकता एक चेतावनी है: दुष्टों की सत्ता कितनी भी दृढ़ क्यों न हो, परमेश्वर के न्याय से वे बच नहीं सकेंगे। इस Chapter में यह विचार स्पष्ट होता है कि सामाजिक उद्यम तभी स्थिर हो सकता है जब लोग सत्य, न्याय और दया के मार्ग पर चलें।