Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22



प्रकाशितवाक्य 5:12 — ऊँचे शब्द से कहा गया, “वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ्य, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और स्तुति के योग्य है”
स्थिति की पहचान: पूर्व-परिदृश्य में आकाश का सिंहासन खुलता है और मोती और राजसी किताबें दिखती हैं जिनमें समस्त ब्रह्मांड की इतिहास-यात्रा और क्रम निर्धारित है। 5:12 में जो पवित्र स्वर्गीय गायन है, वह विशिष्टतः मुक्तिदायी मेहमना के बल के अभिमान और महिमा के 宣य के रूप में आता है—वह मनुष्य के राजा नहीं, बल्कि मरे हुए और फिर जी उठे मसीह के लिए समर्पित है।
देवता और विश्वास के बारे में पाठ से मिलने वाले संकेत
यह काव्यात्मक पूजन क्रोध, भय या धन के बजाय मसीह के बल, ज्ञान, और महिमा की आधिकारिक मान्यता है। प्रभु यीशु के विनय से नहीं, पर उसकी मृत्यु और पुनःजिन्गलन से मिलने वाली सत्ता का उद्घोष है। कथन यह बताता है कि निष्कासन, उद्धार, और कर्तव्य-भाव के लिए सभी शक्तियाँ, धन-संपत्ति, ज्ञान, शक्ति, आदर, महिमा और स्तुति एक ही केन्द्र से आती हैं: मसीह के अधिष्ठान के तहत।
महत्त्वपूर्ण शब्दों/छवियों की स्पष्टता
संयुक्त व्याख्या: प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के संकेत
हेन्री, बार्न्स और क्लार्क जैसी सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों के संकलित निष्कर्षों का संक्षेप इस प्रकार है: यह पाठ यीशु के महत्व को सब कुछ पर उच्च स्थान देता है—उसी के कारण दुनिया के सभी मूल्यवान तत्व उसकी स्तुति में एक साथ गूँजते हैं।
मैथ्यू हेन्क्रे (Matthew Henry) के अनुसार, यह गीत यह दिखाता है कि मसीह की विजय से शाश्वत सम्मान और महिमा उद्धार की उपलब्धि बन जाती है; बल्कि सबसे अधिक मूल्य उसकी आस्था और प्रेम में प्रकट होती है। “वध किया हुआ मेम्मना” से उद्धार का स्रोत स्पष्ट होता है।
Albert Barnes यह बताते हैं कि शक्ति, धन, ज्ञान आदि सब उसकी सत्ता के अधीन हैं; वे सभी वस्तुएं मसीह के हो जाने पर परमसत्ता के प्रत्यक्ष प्रमाण बन जाती हैं।
Adam Clarke यह संकेत करते हैं कि यह पंक्तियाँ एक काल-आधार उद्धार के द्योतक हैं—जहाँ पश्चात्ताप और विश्वास के परिणामस्वरूप सभी ब्रह्मांडीय सम्मान उसका बन जाता है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त संबंध
- यूनानी सिद्धांत में यीशु की प्रतिमा, जो परमेश्वर का चिह्न है, और उसका पश्चात्ताप-बलिदान—यूहन्ना 1:14 के साथ संबंध बनता है।
- फिलिप्पियों 2:9-11 में हर घुटने झुकाने का विचार—सत्ता, नाम, और महिमा के मान्य होने का दृश्य।
- 9:24-26 के प्रभु के विराम और विजय के संदर्भ में उद्धार के साथ सम्मान का समीकरण।
आज के संदर्भ में व्यवहारिक अनुप्रयोग
इस पाठ से सीख मिलती है कि जीवन के बहु-आयामी मूल्य तब भी धार्मिकता में संरेखित रहते हैं जब वे मसीह की महिमा के फ्रेम में हों। धन, शक्ति, ज्ञान आदि के लिए अधिकतर हमारी दृष्टि स्थिर होती है, पर वास्तविक सामर्थ्य और महिमा वे ही तत्व हैं जो यीशु के लिए प्रस्तुत होते हैं। विश्वासियों के लिए यह प्रेरणा है कि किसी भी स्थिति में हमारे सम्मान, धन-दौलत या बुद्धि को परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप उपयोग करें, ताकि उसका इरादा पूरे ब्रह्मांड में प्रकट हो।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह काव्य-गीत बताता है कि मसीह की विजय में सभी मूल्यवान गुण—सामर्थ्य, धन, ज्ञान, शक्ति, आदर, महिमा, और स्तुति—उसके चरणों में एकसार हो जाते हैं। हमारी प्रतिक्रिया भी परम कृपा के अनुरूप, उसके नाम के लिए जीवनभर के लिए समर्पण और स्तुति होनी चाहिए।