Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 4:1 दानिय्येल 4:2 दानिय्येल 4:3 दानिय्येल 4:4 दानिय्येल 4:5 दानिय्येल 4:6 दानिय्येल 4:7 दानिय्येल 4:8 दानिय्येल 4:9 दानिय्येल 4:10 दानिय्येल 4:11 दानिय्येल 4:12 दानिय्येल 4:13 दानिय्येल 4:14 दानिय्येल 4:15 दानिय्येल 4:16 दानिय्येल 4:17 दानिय्येल 4:18 दानिय्येल 4:19 दानिय्येल 4:20 दानिय्येल 4:21 दानिय्येल 4:22 दानिय्येल 4:23 दानिय्येल 4:24 दानिय्येल 4:25 दानिय्येल 4:26 दानिय्येल 4:27 दानिय्येल 4:28 दानिय्येल 4:29 दानिय्येल 4:30 दानिय्येल 4:31 दानिय्येल 4:32 दानिय्येल 4:33 दानिय्येल 4:34 दानिय्येल 4:35 दानिय्येल 4:36 दानिय्येल 4:37



दानिय्येल 4:25 पर नजर: परमप्रधान के कानून के आगे सब मानवीय राज्य एक क्षण के लिए भी स्थिर नहीं
यह पद दानिय्येल के समय के एक महान शासन-स्वप्न (भगवान के द्वारा दिया गया सपने) का प्रमुख उपांक है। नबयोचित कथा में नगर-राज्यों, शासन और सत्ता के चक्र की वास्तविक ताकत दिखती है: परमप्रधान ही सबका प्रमुख अधिकारी है और वह समय-समय पर सिंहासन बदल देता है। यह वाक्य बताता है कि कब्रिस्तान-युग के बाद भी पृथ्वी पर सत्ता का स्थानांतरण होता है जब तक कि मानव इतिहास परमेश्वर की सर्वोच्चता को स्वीकार न कर ले।
पद का पाठ-वार्तालाप: इस अध्याय में क्या घटित होता है
यह श्लोकNebakodnेजर के शासन-स्वप्न का भाग है जिसमें उसे पशुओं के समान मैदान पर विचरना पड़ेगा, आकाश की ओस से भीगा रहना होगा और सात yugas तक यह व्यवस्था चलेगी। इसका मूल उद्देश्य यह है कि जब तक व्यक्ति यह न पहचाने कि पृथ्वी के राज्य परमप्रधान के नियंत्रण में हैं, तब तक इतिहास के चक्र चक्रवत चलेंगे।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
अन्य बाइबिल संदर्भों के साथ तुलना
- दानिय्येल 2:21 में कहा गया है कि परमेश्वर ही समय और काल बदलता है; वह पृथ्वी पर राजाओं की स्थिति निर्धारित करते हैं।
- यशायाह 45:23-24 दिखाता है कि सभी घुटनों को यीशु मसीह के सामने झुकना होगा; परमेश्वर के प्रति मान्यता एक सार्वभौमिक सत्य है।
-Psalm 75:6-7 बताता है कि सत्ता न तो अधिक बल से प्राप्त होती है, न चोरी-छिपे; हर सत्ता की असल पहचान परमेश्वर के हाथ में है।
व्यावहारिक पठन-पाठन: आज के जीवन में आवेदन
1) यदि आप किसी बड़ी योजना या संगठन पर शासन कर रहे हैं, तो यह स्मरण रखें कि परमेश्वर के नियंत्रण में ही स्थायित्व है।
2) कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखें; यह समय परमेश्वर के स्वामित्व को मानने का मौका है, ताकि आपके विश्वास का प्रमाण बने।
3) अपने निर्णयों में सहृदयता और विनम्रता बनाए रखें—क्योंकि सत्ता के साथ सत्य और न्याय आवश्यक हैं, और यह सब परमेश्वर की महिमा के लिए होते हैं।
छोटी-सी cross-reference मार्गदर्शन
- Nebuchadnezzar की कथा से जुड़ा पाठ यह दिखाता है कि प्रभु जैसा चाहे वैसे राज कराते हैं; यह घटना मानव-आत्मा के हिसाब से चुनौती है कि हम सत्ता के बारे में कैसी सोच रखते हैं।
- याकूब 4:6–7 से यह समझ मिलती है कि परमेश्वर अधिकतम प्रेम से उठते हैं और जो बुरे कर्म करते हैं उनके ऊपर पवित्र नियंत्रण रहता है; हमें निर्भीक होकर उसकी इच्छा के अनुरूप चलना चाहिए।
- रोम 13:1-2 में पृथ्वी पर हर सत्ता परमेश्वर द्वारा स्थापित मानी जाती है; कानून के प्रति सम्मान और आज्ञाकारी जीवन में यही मूल विचार है।
संक्षेप: पाठ का निष्कर्ष
दानिय्येल 4:25 से हमें यह स्मरण होता है कि सभी मानव-राज्य और शक्तियाँ अस्थायी हैं, पर परमप्रधान का राज्य स्थिर और सत्ता-प्रधान है। तुम और मैं चाहें किसी परिस्थिति में हों, परमेश्वर की प्रभुता ही अंतिम सत्य है—तुम्हारे जीवन के चक्र और संसार के इतिहास में वही आकार भरता है। यह ज्ञान हमें निराशा में आशा, और औचित्य में नम्रता देता है।
कृपया ध्यान दें: उद्धृत सीधे एक-लाइनर पाठ Matthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke के स्पष्ट शब्द-चिह्न इस पाठ में शामिल नहीं हैं; यदि चाहें तो मैं इन टिप्पणीकारों के संक्षिप्त, उद्धृत-उद्धरण भी दे सकता हूँ।