दानिय्येल 4:35 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पृथ्वी के सब रहनेवाले उसके सामने तुच्छ गिने जाते हैं, और वह स्वर्ग की सेना और पृथ्वी के रहनेवालों के बीच अपनी इच्छा के अनुसार काम करता है; और कोई उसको रोककर उससे नहीं कह सकता है, “तूने यह क्या किया है?”

दानिय्येल 4:35 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधी समझ: दानियइयेल 4:35 का अर्थ

इस आयत में कहा गया है कि पृथ्वी के रहनेवाले उसकी उपस्थिति में तुच्छ गिने जाते हैं और वह स्वर्ग-और-भृथ्वी की सत्ता के बीच अपनी इच्छा से काम करता है; कोई उसे रोककर नहीं कह सकता, तूने यह क्या किया है। इसका मतलब यह है कि परमप्रधान परमेश्वर का शासन सबके ऊपर है और जो कुछ भी घटित होता है, वह उसकी इच्छा के अनुसार होता है।

प्रसंगिक पृष्ठभूमि

दानिय्येल के इस भाग में राजा नाबukat्नessar के सपने और उसे समझाने का संदर्भ है। संदिग्ध घटनाओं के बीच दानिय्येल परमेश्वर के अधिकार को दिखाते हैं—वह उसी के विवेक से इतिहास को नियंत्रित करते हैं। यह आयत व्यापक रूप से ईश्वर की सार्वभौमिक सत्ता को प्रतिध्वनित करती है: राज्य, भाषा, राष्ट्र—सबकुछ उसी के हाथ में है।

व्याख्यान–आवधान (मुख्य अवलोकन)

  • ईश्वर की सत्ता का सार्वभौमिकत्व: पृथ्वी पर रहनेवालों की परवाह नहीं—सब उसके सामने तुच्छ गिने जाते हैं।
  • निर्णय की स्वतंत्रता ईश्वर के हाथ में: “अपनी इच्छा के अनुसार” वह चलाते हैं; यह मानव स्वातंत्र्य नहीं, divine sovereignity है।
  • उत्तरदायित्व और बचनबद्धता: कोई उसे रोककर नहीं कह सकता कि उसने यह क्यों किया; ईश्वर की क्रिया अकथनीय परिपूर्ण है।

कथन-उद्धरण से प्रेरित सूझ-बुझ

मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क—इन सार्वजनिक डोमेन टिप्पणियों में ईश्वर की सत्ता के सत्य को उभारते हैं, कि शासक हों या सामान्य जन—सबका ताना-बना उसी के हाथ में है। (यदि उनके स्पष्ट वाक्य मिलते हैं, उन्हें नीचे संकेत किया जाएगा।)

सहयोगी बिंदु (संकेतित क्रॉस-रेफरेंस)

  • यशायाह 46:10 — ईश्वर सभी योजनाओं को पूरा करते हैं; वे शुरू से अंत तक रहते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि “उसकी इच्छा के अनुसार” संचालित होना ईश्वर की सियासत नहीं, सृष्टि-निर्माण है।
  • नीतिवचन 16:9 — मनुष्य अपने मार्ग चुन सकता है, परन्तु निर्णयों का परिणाम ईश्वर के ज्ञान के अधीन रहता है। यह आयत दानिय्येल के आशय को संयमपूर्वक पुष्ट करती है।
  • रोमियो 9:20–21 — संभव है, परन्तु ईश्वर की व्यवस्था सर्वोपरि है; यह कसौटी में विश्वास को परखता है कि वह किन्हीं घटनाओं का कारण है।

इन संदर्भों से समाहित धारणा निकलती है कि ईश्वर की नियंत्रण-शक्ति विश्व-चर्या के हर मोड़ पर सक्रिय है, और मनुष्य की समझ से परे चलते हैं।

संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway

1) आशा रखें कि सभी घटनाएं परमेश्वर की योजना में फिट होती हैं। 2) भय या उभरते प्रश्नों के समय भी ईश्वर की सामर्थ्य को याद रखें—वह सब कुछ कर सकते हैं। 3) अपनी समझ से आगे ईश्वर की सत्तामत्ता पर विश्वास बनाए रखें, क्योंकि “उसके कामों के पीछे उसका ज्ञान है।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

दानिय्येल 4:35 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

भजन संहिता 135:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 135:6 (HINIRV) »
जो कुछ यहोवा ने चाहा उसे उसने आकाश और पृथ्वी और समुद्र और सब गहरे स्थानों में किया है।

भजन संहिता 115:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 115:3 (HINIRV) »
हमारा परमेश्‍वर तो स्वर्ग में हैं; उसने जो चाहा वही किया है।

अय्यूब 42:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
अय्यूब 42:2 (HINIRV) »
“मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है*, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती। (यशा. 14:27, नीति. 19:21, मर. 10:27)

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें