भजन संहिता 115:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हमारा परमेश्‍वर तो स्वर्ग में हैं; उसने जो चाहा वही किया है।

भजन संहिता 115:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 115:3 का अर्थ

यह पद कहता है कि हमारा परमेश्वर स्वर्ग में है और उसने जो चाहा वही किया। सरल शब्दों में इसका तात्पर्य है कि परमेश्वर का शासन सर्वोच्च है, तथा पृथ्वी पर घटने वाले सभी घटनाओं के पीछे उसकी इच्छा और योजना का हाथ है। उसकी सत्ता मानवीय सीमाओं से ऊपर है, और उसका उद्देश्य मोक्ष, उद्धार और उसकी महिमा के लिए सर्वत्र प्रयत्नशील रहता है।

संदर्भ पीछे का अंश

भजन 115 की पंक्तियाँ परमेश्वर के वैभवपूर्ण शासन और मूर्त-प्रचलनों के विपरीत असत्य और मूर्तिपूजा के व्यर्थ स्वभाव पर निर्भरता का विरोध करती हैं। इस अध्याय में भक्तगण कहते हैं कि उन मूर्तिभंजक देवी-देवताओं के विपरीत हमारे परमेश्वर ही जीवित और सर्वशक्तिमान है, जो स्वर्ग में विराजमान है और जो चाहा वही किया।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • स्वर्गीय स्थिति: परमेश्वर की सत्ता की ऊँचाई स्वर्गीय स्थान पर केंद्रित है, जहाँ से वह सब कुछ संचालित करता है।
  • कर्म का अधिकार: “जो चाहा वही किया है” से आशय यह है कि परमेश्वर के निर्णय स्वतंत्र, निर्बाध और न्याय-समर्थ हैं। Muster के अनुसार उसकी प्रेरणा और व्यवस्था सभी घटनाओं के पीछे कारण बनती है—स्वर्ग और पृथ्वी दोनों उसी के वश में हैं।
  • कठोर विरोध के विरुद्ध आस्था: भजनकार यह स्मरण कराते हैं कि मूर्तिपूजा से प्राप्त होने वाला अभिमान अभीष्ट नहीं है; सच्चे भरोसे का केंद्र Yahweh है, न कि मानव निर्मित मूर्तियाँ।

गूढ़ बिंदु: तीन संक्षिप्त विचार

  1. ईश्वर की सर्वोच्च सत्ता और आधारभूत नियंत्रण की認識 बनाइए—हर घटना उसी की अनुमति से होती है।
  2. आत्म-प्रशंसा और मूर्तिपूजा से दूरी बनाए रखें; परमेश्वर के विरुद्ध अन्यत्र भरोसा अंधविश्वास है।
  3. धैर्यपूर्वक आशीषों को स्वीकार करें—जो कुछ वह करता है, उसी में उद्धार और महिमा है।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त संदर्भ और उचित अर्थ)

1) इब्रानियों 1:3 में कहा गया है कि परमेश्वर के पुत्र के द्वारा सब कुछ स्थिर रहता है; यह वही विचार दोहराता है कि परमेश्वर का शासन हर जगह निर्णायक है।

2) दजावत 4:11 में स्पष्ट होता है कि संसार की हर चीज़ उसकी इच्छा से चलती है; यह भजन के इस भाग के समान धारा को मजबूत करता है कि उसका उद्देश्य सर्वोच्च है।

3) यूहन्ना 5:19 में Jesus ने कहा कि वे ही जो करता है वही देखते हैं; यह दिखाता है कि परमेश्वर के कार्य हमारे अनुभव के भीतर स्पष्ट प्रस्फुटित होते हैं।

पाठ्य संदर्भ से सम्बन्धी व्याख्या

इन संदर्भों के साथ, यह पद एक विश्वासयोग्य समुदाय की खिंचाई करता है कि परमेश्वर का शासन और उसकी इच्छा ही सत्य का मापदंड है। मूर्तिपूजा और मानव के विचारों की महिमा क्षणिक है, जबकि परमेश्वर की योजना स्थायी है और उसी के अनुसार जीवन बनना चाहिए।

संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway

  • अपने जीवन के निर्णयों में परमेश्वर की इच्छा को सर्वोपरि मानिए; घटनाओं के पीछे उसका हाथ रहता है।
  • मूर्ति-भक्ति तथा आत्म-स्वीकृति के विरुद्ध दृढ़ विश्वास रखें कि केवल वही है जो स्वर्ग में है और जो चाहता है वही करता है।

याद रखने योग्य उद्धरण (ध्यान दें: पूर्ण अभिवचन नहीं दिए गए)

Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन संसार से जुड़ी संकल्पनाएँ वही स्रोत बताती हैं कि परमेश्वर की सत्ता सर्वशक्तिमान है और उसकी इच्छा सर्वोपरि है; नीचे दिए गए शब्दों से यह विचार आसानी से स्पष्ट होता है:

“हमारा परमेश्वर स्वर्ग में है, उसने जो चाहा वही किया है।” (अनूदित सारांश, स्रोत उल्लेखित तत्त्वों के अनुसार)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 115:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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