Old Testament
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1 इतिहास (2 Samuel) 24:24 — संदर्भ और संवाद
कथा क्रम में राजा दाऊद ने यूजर-अनुग्रह और ईश्वर की महिमा के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए ओर्णान से कहा: “नहीं, मैं अवश्य इसका पूरा दाम ही देकर इसे मोल लूंगा; जो तेरा है, उसे मैं यहोवा के लिये नहीं लूंगा, और न सेंत-मेंत का होमबलि चढ़ाऊँगा।” यह वाक्य दाऊद के दृढ़ विश्वास और पवित्रता के संकल्प को दर्शाता है कि वह ईश्वर के लिए सर्वोच्च दाम चुकाने को तैयार है, भले ही राज्य या समाज उसे कितने ही युक्तियों से प्रेरित करे।
Textual setting — पाठ के तत्कालीन संदर्भ
यह घटना दाऊद के समकालीन शासन के समय की है, जब शासन-व्यवस्था एवं धार्मिक आचार-विचार एक दूसरे के पूरक हैं। दाऊद एक खेत के मूल्य के बारे में निश्चय कर रहा है ताकि वह उसे वेदी के लिये समर्पित कर सके, ताकि यहोवा की कृपा और शांति बनी रहे। इस समय धार्मिक नियमों के अनुसार होमेबलि और चढ़ावे का महत्त्व स्पष्ट है: मनुष्य के पूजा-कार्य और दाम-धन के इस्तेमाल में स्पष्ट शुद्धता और समर्पण की मांग है।
देवत्व और आस्था के बारे में पाठ की शिक्षा
इस वाक्य से भगवान की देखरेख में आस्था और ईमानदारी की महत्ता उभरती है। दाऊद कहता है कि जो कुछ भी उसका है, उसे वह ईश्वर के लिये पुर्ण दाम देकर ही चढ़ाएगा—साक्ष्य है कि आस्था के मूल में मूल्य-निर्धारण केवल धन-सम्पदा का नहीं, बल्कि समर्पण की शुद्धता है। इसके साथ यह भी स्पष्ट है कि परमेश्वर के पक्ष में प्रत्यक्ष सामग्री के मूल्य पर भी उसकी ईमानदार इच्छा सर्वोपरि है, ताकि परमेश्वर की प्रतिष्ठा बनी रहे और प्रजा में पवित्रता बढ़े।
शब्दार्थ और चित्रण
- “पूरा दाम”: दाऊद किसी भी सेंत-मेंत या अंश-दान से work नहीं लेना चाहता; उसकी आस्था साफ है कि पूर्ण समर्पण ही स्वीकार्य है।
- “यहोवा के लिये”: होमबलि और अर्पण का केंद्र जरूरी है—ईश्वर के महिमियों के लिये पूर्ण अर्पण।
अन्य पवित्रभूमिका-सम्बद्ध संदर्भ
- 2 इतिहास 7:1-3: शिल्व-आशिष्यों की उद्घोषणा के समय परमेश्वर के अनुयायियों के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति दिखती है।
- 1 इतिहास 21:26: दाऊद ने इब्रानी धर्म के अनुसार बलिदान को महत्ता दी और इसे ठीक प्रकार से किया ताकि यहोवा से कृपा प्राप्त हो।
आज के संदर्भ में व्यावहारिक अनुप्रयोग
संदर्भ-गूंज
यहोवा के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना हमें यह दर्शाती है कि बाइबल में परमेश्वर के लिए अर्पण का मूल्यांकन बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि आंतरिक निष्ठा से होता है। यह प्रेरणा 2 इतिहास के अन्य भागों में भी मिलती है, जहां आकृतियाँ और बलिदानों के पीछे का उद्देश्य मन की पवित्रता बनाम दिखावे का संघर्ष प्रस्तुत करता है।
हाँडे: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार-उद्धरण उपलब्ध हैं—ये विचार धार्मिक आचरण में ईमानदारी, समर्पण और परमेश्वर के महिमामय नाम के लिए सही दाम चुकाने की प्रेरणा पर हैं।