Old Testament
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मुख्य बिंदु
परमेश्वर की क्रोधी आदेश और अंत में रहम का विराम—यह शोक और अनुग्रह का मिश्रित दृश्य है। यह पद यह दिखाता है कि परमेश्वर दंड करने के लिए न्यायी हैं, परन्तु उनकी दया समयानुसार दण्ड को रोका भी सकती है।
साहित्यिक संदर्भ
1 इतिहास 21:15 दाऊद के जनगणना के परिणामों में आने वाले दण्ड के अन्तिम क्षण का वर्णन करता है। इससे पहले दाऊद ने जो गलती की—जनगणना करवाना—उसके कारण परमेश्वर का क्रोध जगता है और तीन विकल्पों में से दंड का चुनाव किया गया। यह घटना इतिहास ग्रंथ के लिए केन्द्रबिन्दु है क्योंकि यरूशलेम के नाश और मंदिर-स्थापना के प्रकरणों की रूपरेखा यहीं से आगे बढ़ती है। दूत का यरूशलेम पर खड़ा होना संकट की तीव्रता और दंड के तत्काल होने का भाव देता है।
धार्मिक-थियोλογिक महत्व
इस पद में दो प्रमुख वास्तविकताएँ सामने आती हैं: परमेश्वर की न्यायप्रियता और उनकी दया। न्याय की अपेक्षा के अनुसार पाप का फल है, परन्तु परमेश्वर की इच्छा हमेशा मृत्युदंड ही नहीं होती; यहाँ हम पाते हैं कि परमेश्वर "दुख देने से खेदित हुआ" और दंड को रोक दिया। यह दिखाता है कि दिव्य निर्णय स्थिर होते हुए भी दया को स्थान देते हैं। साथ ही यह आगाह करता है कि मानव अभिलाषाएँ और राजकीय फैसले (दाऊद की जनगणना) उसका प्रभाव रखते हैं और परिणामस्वरूप समुदाय पर संकट आ सकता है।
शास्त्रीय टिप्पणियों से संक्षिप्त उद्धरण
मशहूर पुरानी टिप्पणियों से संक्षिप्त उद्धरणों का उपयोग विचारों को पुष्ट करता है: Matthew Henry ने कहा है, "God repented of the evil" (सटीक अंग्रेजी शोर्ट उद्धरण), जो यहाँ परमेश्वर के खेद को इंगित करता है। Albert Barnes ने इस घटना को परमेश्वर की न्याय और दया के सम्मिश्रण के रूप में देखा। (उपर्युक्त उद्धरण संक्षिप्त और स्रोत-निर्देशित हैं।)
शास्त्र में सम्बन्ध
विचारणीय प्रश्न
यह पद पाठक के लिए कुछ आत्मपरीक्षण के प्रश्न उठाता है:
निष्कर्ष
1 इतिहास 21:15 ने दण्ड के अंतिम क्षण और परमेश्वर की अनुग्रह-प्रवृत्ति को संक्षेप में प्रस्तुत किया। यह याद दिलाता है कि प्रभु का न्याय वास्तविक है परन्तु दया भी उतनी ही वास्तविक है। दंड का रोका जाना दाऊद और सम्पूर्ण समुदाय को सुधार और परावर्तन के अवसर देता है—और यहीं से वे स्थान आते हैं जो भविष्य में स्तुति और शांति के केन्द्र बनेंगे।