1 इतिहास 21:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और यह बात परमेश्‍वर को बुरी लगी, इसलिए उसने इस्राएल को मारा।

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1 इतिहास 21:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

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यह पद जिस संदर्भ में है, वह वही प्रसंग है जिसमें दाऊद ने प्रभुवाक्य के अनुसार सिन्ने के गिनती कराने का निर्णय लिया और परमेश्वर ने इस आचार-भ्रष्टि से क्रोध किया। 1 इतिहास 21:7 स्पष्ट करता है कि परिणामस्वरूप परमेश्वर की दृष्टि में Israel (इस्राएल) को दण्ड मिला। यहाँ पाठक यह समझता है कि परमेश्वर के बुलावे और मानव निर्णय के बीच गलती होने पर परमेश्वर की योजना कैसे संचालित होती है, और कौन-सी शिक्षा हमारी आज की ज़िंदगी में मानवीय निर्णय और परमेश्वर की इच्छित मार्गदर्शिका के बीच संतुलन बनाती है।

verse in its chapter

यह वचन, 1 इतिहास (यूहओशियाह) के एक अध्याय का छोटा भाग है जहाँ दाऊद ने जनगणना कराने का विचार किया, जो परमेश्वर की आज्ञा के विपरीत था। परिणामस्वरूप परमेश्वर ने आक्रोशित होकर इस्राएल को प्रकोप के कारण मारा। यह घटना हमें दिखाती है कि परमेश्वर की पवित्र व्यवस्था और जन-गणना के नतीजे किस प्रकार मानवीय अहंकार, घमंड या भय से प्रेरित हो सकते हैं, और किस प्रकार परमेश्वर योग्यता और शक्ति से इसे पलट सकता है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

इस व sentence का प्रमुख पाठ यह है: परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध किसी भी निर्णय के परिणाम स्पष्ट भयावह हो सकते हैं, और उस स्थिति में मनुष्य को जल्द से जल्द निराश्रित नहीं, बल्कि तुव्रित रूप से फिर से परमेश्वर की ओर मुड़ना चाहिए। यह एक चेतावनी भी है कि आदमियों के चयन में प्रभु की हानि-रहित योजना के विरुद्ध कदम उठाने पर दंडित होना संभव है, भले ही वह अभी व्यक्तिगत या राष्ट्रस्तरीय हो।

मार्गदर्शक उद्धरण (शिक्षा के लिए चयनितisiones)

Matthew Henry और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों की चीजें में से एक-दो छोटे उद्धरण मिलते हैं जो इस प्रकार के पाठ की भावना को उजागर करते हैं:

Henry: “धर्म के विरुद्ध लिया गया निर्णय परमेश्वर के क्रोध को उकसाता है।”

Clarke: “लोक-पालन के लिए परमेश्वर की इच्छा के भीतर रहने में ही शांति है; हमारे निर्णय जहाँ तहाँ तोड़फोड़ ला सकते हैं।”

इनमें शाब्दिक शब्द नहीं, पर भाव यही है—मनुष्य के विकल्प परमेश्वर की योजना से भिन्न हों तो परिणाम भयावह होते हैं।

क्रॉस-रेफरेंस (संवाद-संदर्भ) – छोटे संदर्भ और उनका संक्षिप्त संबंध

  • 2 समुएल 24:1 – राजा के मन परिवर्तन की घटनाओं पर नियंत्रण का प्रश्न: परमेश्वर के अधीनता और मानव प्रयास के बीच संतुलन।
  • निर्गमन 30:12-13 – जनगणना को लेकर परमेश्वर के निर्देशों में सावधानी, निर्भयता और पवित्रता।
  • कमाल-उद्धार की प्रेरणा—यह घटनाक्रम दया और क्रोध के बीच संतुलन की चर्चा करता है, कि परमेश्वर चाहें तो दंड के साथ चंगाई भी दे सकते हैं।

संक्षेप में इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की योजनाओं के विरुद्ध कदम उठाने पर परिणाम सामान्य नहीं रहते, परन्तु परमेश्वर की असल शक्ति और कृपा से पुनः मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

व्यावहारिक आवेदन

- सावधानी: किसी भी स्पष्ट निर्णय से पहले परमेश्वर की इच्छा के अनुसार सत्यापन करें—पवित्रशास्त्री की बातों, प्रार्थना और परमेश्वर के नियमों के आलोक में।

- निर्भयता नहीं; भविष्य के डर से नहीं, बल्कि विश्वास से कदम उठाएं, पर अन्याय, घमंड या भय से प्रेरित न हों।

- समुदाय के प्रति उत्तरदायित्व: राष्ट्र के निर्णयों में भी परमेश्वर के मन की जानकारी हेतु प्रार्थना करें और सलाह करें।

संक्षेप

1 इतिहास 21:7 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की दृष्टि में मानव के अन्धेरे निर्णयों के परिणाम कभी-कभी समाज पर भारी पड़ते हैं, परन्तु परमेश्वर की प्रेरणा और पवित्रता के अनुरूप लौटना ही बुद्धिमानी है। यह पाठ हमें विश्वास, विनम्रता और ईमानदारी के साथ अपने विकल्पों की समीक्षा करना सिखाता है, ताकि हमारी आशा उसी परमेश्वर पर बनी रहे जो कभी अपनी योजना को छोड़ता नहीं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 इतिहास 21:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहोशू 7:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहोशू 7:5 (HINIRV) »
तब आई के रहनेवालों ने उनमें से कोई छत्तीस पुरुष मार डाले, और अपने फाटक से शबारीम तक उनका पीछा करके उतराई में उनको मारते गए। तब लोगों का मन पिघलकर जल सा बन गया।

यहोशू 7:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहोशू 7:13 (HINIRV) »
उठ, प्रजा के लोगों को पवित्र कर, उनसे कह; “सवेरे तक अपने-अपने को पवित्र कर रखो; क्योंकि इस्राएल का परमेश्‍वर यहोवा यह कहता है, “हे इस्राएल, तेरे मध्य में अर्पण की वस्तु है; इसलिए जब तक तू अर्पण की वस्तु को अपने मध्य में से दूर न करे तब तक तू अपने शत्रुओं के सामने खड़ा न रह सकेगा।”

यहोशू 22:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहोशू 22:16 (HINIRV) »
“यहोवा की सारी मण्डली यह कहती है, कि 'तुम ने इस्राएल के परमेश्‍वर यहोवा का यह कैसा विश्वासघात किया; आज जो तुम ने एक वेदी बना ली है, इसमें तुम ने उसके पीछे चलना छोड़कर उसके विरुद्ध आज बलवा किया है?

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