Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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पाठ का संक्षिप्त परिचय
1 इतिहास (यहु.) अध्याय 21 में दाऊद के संपूर्ण इतिहास का एक प्रमुख चरण है, जिसमें प्रभु के निर्देश और दाऊद की उसकी अनुमति से की गई रैंकिंग का चित्रण है। इस पद में दाऊद ने योना के के स्थान के लिए ओर्नान से अधिक दाम देकर उसे पवित्र भूमि के संस्थापन के लिए खरीदा। यह पाठ दाऊद की सत्ता और पराक्रम के साथ-साथ परमेश्वर के निर्देशों के प्रति उनकी जवाबदेही का मिश्रित चित्र प्रस्तुत करता है।
पद-वच्च पठन: 1 इतिहास 21:25
तब दाऊद ने उस स्थान के लिये ओर्नान को छः सौ शेकेल सोना तौलकर दिया।
पद का अध्याय के भीतर अर्थ
यहाँ दाऊद ने एक विशिष्ट स्थान—जो बाद में अग्नि-बलिदान-स्थल के रूप में जाना गया—के लिए बहुत मूल्यवान दाम चुकाकर उसे ईश्वर के लिए आराधना-स्थल के रूप में खरीदा। यह क्रिया दाऊद की धार्मिक उत्तरदायित्व और सामर्थ्य का संकेत है। उन्होंने शहर की शक्ति से अधिक परमेश्वर के अनुरोध को महत्त्व दिया, ताकि वह परमेश्वर की इच्छा के अनुसार त्याग और बलिदान कर सके।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ—क्या सिखाया गया
इस verse से दो प्रमुख विवेचन निकलते हैं: - परमেশ्वर के लिए साधना का मूल्य: दाऊद ने वस्तुओं के माध्यम से भी परमेश्वर की आराधना के लिए समर्पण दिखाया, यह दर्शाता है कि पुकार की कीमत का मोल ऊँचा है जब वह परमेश्वर के सम्मान के लिए हो। - मन की ईमानदारी और नीति: पाश्चात्य महिमा की चाह से नहीं, बल्कि परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार कार्य करने की इच्छा से दाऊद प्रेरित हैं। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि आराधना और मंदिर-स्थापना के लिए हर वस्तु और संपत्ति की असल कीमत परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार चलना है।
अन्य बाइबिल पाठों के साथ संगति
- राजा दाऊद की नीति बनाम परमेश्वर की इच्छा: पवित्र ग्रंथ में बार-बार यह दिखाया गया है कि राजा की योजनाओं को भी परमेश्वर के मार्ग-निर्देशों से मिलाना चाहिए। इससे आधुनिक विश्वासियों को यह सीख मिलती है कि सेवा-कार्य के लिए योजनाओं का मूल्य परमेश्वर की योजनाओं के अनुरूप होना चाहिए।
- बलिदान और गति: बलिदान की कीमत में सामर्थ्य होने पर भी, अगर वह परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध हो, तो उसका मूल्य निरर्थक हो सकता है। यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि हमारी समर्पित सेवा में उद्देश्य परमेश्वर की इच्छा होनी चाहिए।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेस
1) 2 इतिहास 3-6—यहाँ मंदिर के स्थल के लिए चयन और पूर्वधारणाओं का संकेत मिलता है; यह दिखाता है कि परमेश्वर के घर के निर्माण में नीतिगत समर्पण कितना आवश्यक है।
2) 2 समुएल 7—राजा के अधिकार, आशीर्वाद और परमेश्वर से-संवाद के साथ कर्तव्य का संतुलन; यह बतलाता है कि ईश्वर की योजनाएं राजा की महत्वाकांक्षा से ऊँची होती हैं।
3) 5:7-9—भक्तिपूर्ण आचरण और परमेश्वर के आनंद-स्थान के प्रति जवाबदेही; यह हमारे समर्पण को एक ठोस अभ्यास देता है।
संक्षेप निष्कर्ष
इस verse में दाऊद ने परमेश्वर के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्थल के लिए उचित विचित्र मूल्य चुकाने का निर्णय लिया। यह दिखाता है कि परमेश्वर के घर की स्थापना में क्रिया-प्रवाह का केंद्रित मूल्य है—न कि केवल भौतिक संपत्ति। हमारी जीवन-यात्रा में भी वही नियम लागू होता है: हमारी योजनाओं, संसाधनों और समय का उपयोग परमेश्वर की इच्छा के अनुसार करना, ताकि आराधना एक सच-जीवित और सम्मानपूर्ण अनुभव बने।
Matthew Henry से एक संक्षिप्त विचार: “जहाँ परमेश्वर की इच्छा हों, वहाँ तौला हुआ मूल्य भी कम नहीं पड़ता; दाऊद ने वही किया जिसे परमेश्वर ने ठीक समझा।” Barnes और Clarke के समान धारणा का सार भी यही है कि धार्मिक संस्थापन में मूल्य और प्रेरणा दोनों परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप हों।