Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 24:1 2 शमूएल 24:2 2 शमूएल 24:3 2 शमूएल 24:4 2 शमूएल 24:5 2 शमूएल 24:6 2 शमूएल 24:7 2 शमूएल 24:8 2 शमूएल 24:9 2 शमूएल 24:10 2 शमूएल 24:11 2 शमूएल 24:12 2 शमूएल 24:13 2 शमूएल 24:14 2 शमूएल 24:15 2 शमूएल 24:16 2 शमूएल 24:17 2 शमूएल 24:18 2 शमूएल 24:19 2 शमूएल 24:20 2 शमूएल 24:21 2 शमूएल 24:22 2 शमूएल 24:23 2 शमूएल 24:24 2 शमूएल 24:25



2 शमूएल 24:24 — संदर्भ और संदर्भ-स्थिति
यह आयत उन घटनाओं के क्रम में आती है जहाँ दाऊद ने क्रोध के कारण गिना-गिनाई की मिसाल के रूप में लोगों से गिनती करवाई और परमेश्वर की माप में होशियार रहने की जगह अत्यधिक प्रतिफल के लिए धन की मांग की। चढ़ावे और व्रति-चाहना के बीच, दाऊद ने आँकड़ों से नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छा से आगे बढ़ने का निर्णय लिया। फिर यह कहा गया कि राजा ने अरौना से कहा, ऐसी नहीं, मैं यह सब दाम देकर लाऊंगा; मैं अपने परमेश्वर यहोवा को सेंत-मेंत के होमबलि नहीं चढ़ाने का। इस बात के साथ दाऊद ने खलिहान और बैलों को चाँदी के पचास शेकेल में मोल लिया।
ईश्वर की महिमा और विश्वास का पाठ
यह पाठ स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के आगे हमारा विश्वास और समर्पण ही सर्वोपरि है, धन या मानव-व्याकुलता से कुछ भी गिना नहीं जा सकता। दाऊद बनाम पंथिक पथ पर चलने की प्रवृत्ति के विरुद्ध एक स्पष्ट स्थापित नीति दर्शाते हैं: परमेश्वर के लिए संपत्ति का अर्पण स्वयं से अधिक महत्त्वपूर्ण है, और यह वही चढ़ावे है जो हृदय की निष्पक्षता को प्रकट करता है।
महत्वपूर्ण शब्दावली और चित्र
संबद्ध आयतें और पारिवारिक संदर्भ
1) एक समान धारणाएं आमतौर पर कुंथन-निरोधक हैं: परमेश्वर की महिमा के सामने मानव-धन की प्राथमिकता घटती है।
2) पुराने नियम में होमबलि का उद्देश्य परमेश्वर के सम्मान और पाप-हरण की क्रिया से जुड़ा है; इस आयत से दिखता है कि दाऊद ने अपनी प्रतिष्ठा से ऊपर परमेश्वर की पवित्रता को माना।
2-3 सूक्ष्म क्रॉस-रेफरेंसेस
— प्रेरित-समना के अन्तर में एक समान विचार मिलता है कि प्रार्थना या बलिदान के बिना परमेश्वर की इच्छा प्रमुख है (उद्धृत संतुलन: केवल र्ईधि नहीं, परमेश्वर के साथ सामंजस्य)।
आज के संदर्भ में अभ्यास
आज के विश्वासियों के लिए यह कथन एक ठोस संदेश देता है: धन-संस्कृति और सामाजिक दबाव के बावजूद, हमारा अर्पण कृपया और सत्यता का होना चाहिए। अगर हम कुछ भी भगवान के लिए रखते हैं, तो वह हमारे दिल की ईमानदारी और उन वस्तुओं के पीछे न बैठने की इच्छा होनी चाहिए जो हमारे चरित्र को दूषित कर दें।
सार-विचार
दाऊद का निर्णय इस बात का संकेत देता है कि भक्ति सरल कर्मों से नहीं, बल्कि दिल की ईमानदारी और परमेश्वर के प्रति समर्पण से मापी जाती है। होमबलि या दान का मूल्य भले कितना भी बड़ा हो, यदि वह प्रेम, क़ायदा और आज्ञा से बाहर है, तो वह उचित नहीं माना जाएगा।
छोटा-सा क्रॉस-रेफरेंस सार
1) एक अन्य प्रेरणा में बलिदान का दिल से होना अधिक महत्त्वपूर्ण बताया गया है—क्योंकि परमेश्वर दिल की इच्छा देखता है।
2) पुराने नियम में भी बलिदान का उद्देश्य परमेश्वर की महिमा है, न कि मनुष्यों के प्रमाण का प्रदर्शन।