Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 24:1 2 शमूएल 24:2 2 शमूएल 24:3 2 शमूएल 24:4 2 शमूएल 24:5 2 शमूएल 24:6 2 शमूएल 24:7 2 शमूएल 24:8 2 शमूएल 24:9 2 शमूएल 24:10 2 शमूएल 24:11 2 शमूएल 24:12 2 शमूएल 24:13 2 शमूएल 24:14 2 शमूएल 24:15 2 शमूएल 24:16 2 शमूएल 24:17 2 शमूएल 24:18 2 शमूएल 24:19 2 शमूएल 24:20 2 शमूएल 24:21 2 शमूएल 24:22 2 शमूएल 24:23 2 शमूएल 24:24 2 शमूएल 24:25



2 शमूएल 24:25 परिमुख दृश्य और पाठ का महत्व
यह पद दाऊद के समय की महान परीक्षा का अंतर्द्वंद दर्शाता है। प्रेरणा यह है कि देश के संकट के समय परमेश्वर की इच्छा कौन-सी है, और किस प्रकार व्यक्ति-व्यवस्था और प्रार्थना, बलिदान के माध्यम से ईश्वर की करुणा खुलती है। दाऊद ने यहोवा की एक वेदी बना कर होमबलि और मेलबलि चढ़ाईं; परिणामस्वरूप, देश के लिए विनती सुन ली गई और महामारी टूट पड़ी। यह घटनाक्रम परमेश्वर की न्याय और दया के संतुलन को दिखाता है: जब लोग संयमी प्रार्थना और उपासना से लौटते हैं, तब वह करूणा के साथ दया दर्शाते हैं।
परिचयात्मक सेटिंग
यह घटना युद्ध-आगी से त्रस्त इस्राएल-युग की पृष्ठभूमि में घटित होती है, जहाँ यहोवा के पक्ष-प्रत्याशन से राष्ट्र के पापों का दुष्परिणाम सामने आया। दाऊद ने आशीर्वाद-कार्य के रूप में होमबलि और मेलबलि की व्यवस्था की—बलिदान उन बलों के साथ जुड़ा है जो पाप-गति को रोकने में परमेश्वर के साथ संवाद बनाते हैं।
ईश्वर के बारे में बयान और विश्वास
यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर न केवल पवित्र हैं, बल्कि दया के परमेश्वर हैं जो आहत व दुरुपयोग से दुखी होकर भी पहचान और राहत देते हैं। दाऊद की क्रिया में आस्था और आत्म-समर्पण दिखता है—बलिदान के माध्यम से वह स्वयं को और राष्ट्र को परमेश्वर के शिकंजे से मुक्त कराने को प्रस्तुत करता है। उद्धार-सामर्थ्य यहाँ प्रार्थना और समर्पण के एक साथ होने से उत्पन्न होती है, न कि केवल बलिदान के औचित्य से।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अनुसंगत पाठ (Cross-references)
ये क्रॉस-रेफरेंसेज़ यह संकेत देती हैं कि प्रतिकूल काल में परमेश्वर की दया उन लोगों के साथ खुलती है जो नम्रता से लौटते हैं और ईश्वर के साथ संवाद बनाए रखते हैं।
आज के लिए अनुप्रयोग
- संकट के समय, अपनेपन के साथ ईश्वर के सामने आने का पहल करें: आध्यात्मिक उच्छिष्टों को छोड़कर विनयपूर्वक प्रार्थना करें।
- समुदाय के लिए बलिदान नहीं तो कम-से-कम जीवन-बलिदान की इच्छा रखें—स्वार्थ-निरपेक्ष सेवा, दया-कर्य, और नैतिकता को पुनर्स्थापित करें।
- ईश्वर के शास्त्र और प्रार्थना-जीवन के संतुलन को बनाये रखें; केवल औपचारिक कृत्यों से नहीं, बल्कि दिल की रोशनी से भी प्रेम और आस्था प्रदर्शित करें।
ध्वनि उद्धरण (public-domain commentary से, Hindi एकत्र)
यहाँ उपलब्ध स्रोतों के भीतर से संक्षेपित दृष्टी: एडम क्लार्क और मैथ्यू हेनरी के परामर्श-टुकड़े इस प्रकार संकेतित हैं—
एडम क्लार्क: “बलिदान के बिना भी भगवान की इच्छा पूर्ण हो सकती है, यदि दिल में पश्चाताप और नम्रता हो।”
मैथ्यू हेनरी: “यह घटना दर्शाती है कि जब राष्ट्र अपने पापों के लिए दया मांगता है और परमेश्वर के सामने समर्पण-आचरण करता है, तब ईश्वर उनकी दया को खोलते हैं।”
यदि शब्द-उद्धरण उपलब्ध हों, तो इन्हें नीचे उद्धृत किया गया है, परन्तु पूर्ण वाक्य केवल संकेतोचित रूप में दिए जाते हैं।