Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 24:1 2 शमूएल 24:2 2 शमूएल 24:3 2 शमूएल 24:4 2 शमूएल 24:5 2 शमूएल 24:6 2 शमूएल 24:7 2 शमूएल 24:8 2 शमूएल 24:9 2 शमूएल 24:10 2 शमूएल 24:11 2 शमूएल 24:12 2 शमूएल 24:13 2 शमूएल 24:14 2 शमूएल 24:15 2 शमूएल 24:16 2 शमूएल 24:17 2 शमूएल 24:18 2 शमूएल 24:19 2 शमूएल 24:20 2 शमूएल 24:21 2 शमूएल 24:22 2 शमूएल 24:23 2 शमूएल 24:24 2 शमूएल 24:25



सार-सारांश (2 शमूएल 24:5, HINIRV)
यह पंक्ति बताती है कि David ने यरदन पार कर के अरोएर नगर के दाहिनी ओर डेरा डाल दिए—यह स्थान गाद की घाटी के बीच में और याजेर की दिशा में स्थित है। यह विवरण उद्धारक-यात्रा के क्रम में सैनिक-युद्ध या गिनती के समय की सैनिक गतिविधि का भाग है, जो उस समय के घटनाक्रमों की फोटोग्राफी जैसे क्षण को दर्शाता है।
पायदान-खण्ड के भीतर verse का लेखाजोखा
पद में दिखाया गया है कि דוד ने कौन सा भू-भाग उद्घाटन किया और किन सीमा-निर्देशों के अनुसार डेरा डाला। यह स्थान याद दिलाता है कि योद्धाओं के बीच साथ-साथ इलाके की सीमा-रेखा की जानकारी रखना और पड़ाव तय करना कितना आवश्यक था।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
यह पंक्ति एक सामान्य सैनिक-घटना से अधिक है: यह सही स्थान पर ठहरकर भविष्य की योजना बनाने, सुरक्षा की दृष्टि से दृष्टि-नियोजन और नेतृत्व की भागीदारी को उजागर करती है। गुरु-नेतृत्व में परमेश्वर के निर्देशित मार्ग पर चलना, और अपने समुदाय के लिए उपयुक्त ठहराव चुनना महत्त्वपूर्ण है।
अन्य बाइबिल संदर्भों से तुलना
इन संदर्भों से यह निष्कर्ष निकलता है कि लक्ष्य-स्थल की पहचान और सुरक्षा के लिए सही स्थान पर ठहराव आवश्यक है, ताकि आगे की गतिविधियाँ सुचारु रहें और समुदाय सुरक्षित रहे।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
कुल मिलाकर संक्षेप
2 शमूएल 24:5 में शहर के पास डेरा डालना एक स्मरण है कि निर्णय-निर्णय की हर अवस्था में परमेश्वर के मार्गदर्शन की प्रतीक्षा और अनुशासन आवश्यक है। यह पंक्ति प्रगतिशील यात्रा के एक पड़ाव को दर्शाती है, जहाँ नेतृत्व और योजना साथ-साथ चलते हैं ताकि आगे की कार्रवाइयाँ सुरक्षित और प्रेरित हों।
Cross-reference - संक्षेप विचार
यहोशू 3–4: अग्रिम पग-निर्णय और स्मारक-स्थानों की स्थापना; यह दिखाता है कि प्रारम्भ में संकल्प कैसे स्थिर होता है।
यिर्मयाह 29:11 के भविष्य-वाणी-प्रोफेशन में स्थान चयन का आध्यात्मिक महत्त्व नजर आता है।
ध्यान दें: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं, पर उनकी परंपरागत व्याख्याओं से प्रेरित सामान्य विचार यहाँ समाहित किये गये हैं ताकि पाठक को समग्र धारा समझ में आये।