Old Testament
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2 शमूएल 6:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर दाऊद ने एक और बार इस्राएल में से सब बड़े वीरों को, जो तीस हजार थे, इकट्ठा किया।
2 शमूएल 6:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 6:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 राजाओं 8:1 (HINIRV) »
तब सुलैमान ने इस्राएली पुरनियों को और गोत्रों के सब मुख्य पुरुषों को भी जो इस्राएलियों के पूर्वजों के घरानों के प्रधान थे, यरूशलेम में अपने पास इस मनसा से इकट्ठा किया, कि वे यहोवा की वाचा का सन्दूक दाऊदपुर अर्थात् सिय्योन से ऊपर ले आएँ। (प्रका. 11:19)

1 इतिहास 13:6 (HINIRV) »
तब दाऊद सब इस्राएलियों को संग लेकर बाला को गया, जो किर्यत्यारीम भी कहलाता था और यहूदा के भाग में था, कि परमेश्वर यहोवा का सन्दूक वहाँ से ले आए; वह तो करूबों पर विराजनेवाला है, और उसका नाम भी यही लिया जाता है।

सीधे अर्थ का उल्लेख
2 शमूएल 6:1 में दाऊद ने इस्राएल में से तीस हजार वीरों को इकट्ठा किया ताकि परमेश्वर के Ark को शहर से लेकर सामने ले चलें, यह दिखाने के लिए कि वह राजा होने के बावजूद परमेश्वर के सम्मान को सर्वोच्च रखना चाहता है।
पृष्ठभूमि संक्षेप
विवेचन के प्रमुख बिंदु
— दाऊद ने स्पष्ट रूप से सामर्थ्य और सेना का प्रयोग परमेश्वर के कार्यक्रम के लिए किया। यह दर्शाता है कि सफलता का आधार परमेश्वर की इच्छा और आशीष है, न कि सिर्फ मानवीय काबिलियत।
— Ark को ले जाने की योजना में संगठन और तैयारी की Bedeutung है, परन्तु परमेश्वर की उपस्थिति के प्रति श्रद्धा और विवेक का संतुलन ज़रूरी है।
मुख्य विचार
संदर्भ-क्रम और क्रॉस-रेफरेंसे
1) 1 शमूएल 4–6: Ark के साथ संबंध-सम्भावनाओं के घटनाक्रम और निष्कर्षों से सीख मिलती है कि परमेश्वर की उपस्थिति के सम्मान के बिना विजय स्थाई नहीं।
2) धर्मग्रंथ-नीति में परमेश्वर के समारोहों के समय विशिष्ट तैयारी की आवश्यकता समझाई जाती है—हम यह देखते हैं कि पवित्रताओं के साथ आना कितना आवश्यक है।
3) अन्य उद्धारक-प्रेरक उद्धरण: राजा की महानता तब सही मानी जाती है जब वह परमेश्वर के मार्ग में एक सेवक बनकर चलता है।
किताब-स्वीकृति से जुड़ी छोटी नैतिक शिक्षा
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 शमूएल 6:1 यह बताता है कि दाऊद ने अपनी सैन्य शक्ति को भी परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप उपयोग किया और Ark की महिमा के सामने अपनी प्रशासनिक तैयारी को समर्पित किया। यह संदेश देता है कि वास्तविक নেতৃত্ব वही है जो परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप काम करे और उसके सम्मान को सबसे ऊपर रखे।
उद्धृत टिप्पणीकारों से मिलते-जुलते विचार
मैथ्यू हेनरी, आर्बन Barnes और एडम क्लार्क के समालोचनात्मक विचारों में सामान्य धारा यह है कि परमेश्वर की उपस्थिति के सम्मान के बिना किसी भी योजना को पूर्णता नहीं मिलती; इसलिए, योजना बनाते समय श्रद्धा और विवेक का संतुलन आवश्यक है — यह विचार यहाँ भी दिखते हैं।