Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 शमूएल 6:16 बाइबल पद की व्याख्या
2 शमूएल 6:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब यहोवा का सन्दूक दाऊदपुर में आ रहा था, तब शाऊल की बेटी मीकल ने खिड़की में से झाँककर दाऊद राजा को यहोवा के सम्मुख नाचते कूदते देखा, और उसे मन ही मन तुच्छ जाना*।
2 शमूएल 6:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 6:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 2:14 (HINIRV) »
परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उसकी दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उनकी जाँच आत्मिक रीति से होती है।

1 इतिहास 15:29 (HINIRV) »
जब यहोवा की वाचा का सन्दूक दाऊदपुर में पहुँचा तब शाऊल की बेटी मीकल ने खिड़की में से झाँककर दाऊद राजा को कूदते और खेलते हुए देखा, और उसे मन ही मन तुच्छ जाना।

2 शमूएल 3:14 (HINIRV) »
फिर दाऊद ने शाऊल के पुत्र ईशबोशेत के पास दूतों से यह कहला भेजा, “मेरी पत्नी मीकल, जिसे मैंने एक सौ पलिश्तियों की खलड़ियाँ देकर अपनी कर लिया था, उसको मुझे दे-दे।”
2 शमूएल 6:16 का संक्षिप्त परिचय और दृष्टि
इस व verse में यहोवा के सन्दूक के साथ दाऊद का उन्नति-उल्लास और ईश्वर के सामने अधिकार-संस्कार का दृश्य है। यह प्रकरण दाऊद के राजशाही नृत्य और उसके परिवार के प्रति प्रतिक्रिया के बीच एक नैतिक और आध्यात्मिक पाठ को दर्शाता है: परमेश्वर के सामने जीवन का उत्सव मनाने की आस्था और मानवीय आत्म-संयम की चुनौती। जब सन्दूक यहोवा के सामने आ रहा है, दाऊद का नृत्य उसकी भक्ति का संकेत है; लेकिन शाऊल की बेटी मीकल की नज़र इसे तुच्छ और अपमानजनक समझती है, जो प्रभु के सम्मान के प्रति एक आंतरिक संघर्ष को उजागर करता है।
मुख्य संदेश
यह वचन हमें दिखाता है कि परमेश्वर के आशीर्वाद और उसकी उपस्थिति के सामने नृत्य, उत्सव और खुषी के प्रदर्शन भी आंतरिक विनय और श्रद्धा के साथ जुड़ना चाहिए। दाऊद यहाँ ईश्वर के सामने गम्भीरता बनाए रखकर भी अपने हृदय में आनंद दिखाते हैं; मलिन-आलोचना के बावजूद उसका परमेश्वर-उन्नति में विश्वास बना रहता है।
मुख्य विषय
क्रॉस-रेफरेंसे (संक्षेप में)
1) 2 समूएल 6:14-15 — दाऊद का व्यवहार और मूर्तियों से मुक्त भीड़-भीड़ में परमेश्वर की महिमा का प्रदर्शन। यह दृश्य दाऊद के उत्साह और ईश्वर के सम्मान के बीच संतुलन पर विचार कराता है।
2) लूट/आशीर्वाद के कारण नृत्य और प्रभु के भवन के महत्व पर संदर्भ: परमेश्वर की उपस्थिति के समय मानव अभिव्यक्ति के रूप में उत्साह की स्वीकृति।
3) स्वर्गीय महिमा बनाम मानव आलोचना: आत्म-परिष्कार और आत्म-प्रकाशन के बीच चयन की स्थिति।
व्यावहारिक मनन
हर विश्वासी के लिए यह सीखा जा सकता है कि प्रभु की उपस्थिति में खुशी और विनय साथ चलते हैं। जब लोग आपकी खुशी को देखते हैं, तब भी याद रखें कि परमेश्वर की महिमा ही सर्वोपरि है, न कि व्यक्तिगत प्रशंसा। अपनी आस्था को सामाजिक मानकों पर नहीं तौलें, वरन परमेश्वर के मूल्य पर आधारित रखें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 शमूएल 6:16 हमें अवसर देता है कि हम परमेश्वर के सामने अपने हृदय की सच्चाई और विनय को पहचानें—खुशी में भी पवित्रता, और आलोचना के बीच भी प्रभु की महिमा ही केंद्र में बनी रहे। दाऊद की विश्वास-यात्रा से प्रेरणा लेते हुए, हमें अपने उत्साह को ईश्वर के सम्मान के अनुरूप ढालना चाहिए।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे उद्धरण उपलब्ध हैं यदि आवश्यक हों, पर सार-संरचना मौलिक है और सार्वजनिक डोमेन के इन विचारों के संगत समेकन के अनुसार है.