Old Testament
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2 शमूएल 6:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब यहोवा का सन्दूक उठानेवाले छः कदम चल चुके, तब दाऊद ने एक बैल और एक पाला पोसा हुआ बछड़ा बलि कराया।
2 शमूएल 6:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 6:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 राजाओं 8:5 (HINIRV) »
और राजा सुलैमान और समस्त इस्राएली मंडली, जो उसके पास इकट्ठी हुई थी, वे सब सन्दूक के सामने इतने भेड़ और बैल बलि कर रहे थे, जिनकी गिनती किसी रीति से नहीं हो सकती थी।

गिनती 4:15 (HINIRV) »
और जब हारून और उसके पुत्र छावनी के कूच के समय पवित्रस्थान और उसके सारे सामान को ढाँप चुकें, तब उसके बाद कहाती उसके उठाने के लिये आएँ, पर किसी पवित्र वस्तु को न छूएँ, कहीं ऐसा न हो कि मर जाएँ। कहातियों के उठाने के लिये मिलापवाले तम्बू की ये ही वस्तुएँ हैं।

1 इतिहास 15:15 (HINIRV) »
तब उस आज्ञा के अनुसार जो मूसा ने यहोवा का वचन सुनकर दी थी, लेवियों ने सन्दूक को डंडों के बल अपने कंधों पर उठा लिया।
मुख्य व्याख्या बिंदु
2 शमूएल 6:13 में दाऊद के समय जब यहोवा के सन्दूक को उठाने वाले गलादों के कदम छः पूरे कर चुके थे, तब दाऊद ने एक बैल और एक पाला पोसा हुआ बछड़ा बलि के लिए चढ़ाया। यह घटनाक्रम सन्दूक के सम्मान, उत्साह, और निष्ठा के साथ Yehova के सम्मुख समर्पण की गहरी आत्म-स्थापना दर्शाता है। प्रेस्क्स की तरह के उत्सव-आचरण के बीच यह बलिदान यह संकेत देता है कि सन्दूक के साथ चलना चेतना, धर्मग्रंथ के अनुसार, समझदारी और विनम्र आचार-नीति की आवश्यकता है।
सारगर्भित साहित्यिक संदर्भ
यह कथा ऐसा मर्म दिखाती है कि परमेश्वर के साथ चलने में भक्ति-शासन के साथ संवेदनशील विनम्रता भी अनिवार्य है। ऐतिहासिक-पवित्रता के इस प्रसंग में, दाऊद की उत्साहवर्धक धार्मिकता और सामाजिक-जवाव के बीच संतुलन देखने को मिलता है।
धर्मशास्त्रीय महत्व
- यहोवा के სადूक के आगमन के समय बलिदान का प्राथमिक संकेत—ईश्वर के सम्मुख गाड़ी-गति से आगे बढ़ना, और उत्सव के साथ शुद्धता को बनाए रखना।
- दाऊद का बलिदान देना यह दर्शाता है कि भक्ति केवल आंतरिक उठान नहीं, बल्कि सार्वजनिक आचरण और धार्मिक्त्व का सम्मिलन है।
पंच-आयामिक लिंक
पढ़ना-प्रश्न (चिंतन के लिए)
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 शमूएल 6:13 यह दर्शाता है कि परमेश्वर के साथ यात्रा बड़े उत्साह के साथ शुरू होती है, परंतु उसे पवित्रता, विनम्रता और सामूहिक आराधना के संतुलन से आकार मिलना चाहिए। दाऊद का बलिदान संकेत देता है कि सन्दूक के सम्मान में आचरण और विश्वास-निर्माण एक साथ चलते हैं, जिससे समुदाय में परमेश्वर की महानता प्रकट होती है।
Cross-references (संदर्भ-संलाप)
- 2 शमूएल 6:12-13: सन्दूक के आगमन के संदर्भ में दाऊद का उत्साह और बलिदान।
- प्रदान-आयंन 1:3-4 (नैतिक-आस्था और जीवन-उत्साह के साथ): प्रभु के साथ रहने का आनंद और जीवन में सत्य का महत्व।
- निर्गमन 29:38-42: बलिदान-यज्ञ के उद्देश्य और परमेश्वर की महिमा के लिए समर्पण की व्यवस्था।
नोट: मार्फत उद्धृत सीमित मार्डेन-हेनरी, अलबर्ट बार्न्स या एडम क्लार्काे से सीधे पूर्ण उद्धरण यहां संक्षेप में शामिल नहीं किए गए हैं; यदि आप चाहें तो मैं इनमें से किसी एक स्रोत के छोटे-सी पंक्तियाँ भी उद्धृत कर सकता हूँ और उनकी व्याख्या दे सकता हूँ।