Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 21:1 2 शमूएल 21:2 2 शमूएल 21:3 2 शमूएल 21:4 2 शमूएल 21:5 2 शमूएल 21:6 2 शमूएल 21:7 2 शमूएल 21:8 2 शमूएल 21:9 2 शमूएल 21:10 2 शमूएल 21:11 2 शमूएल 21:12 2 शमूएल 21:13 2 शमूएल 21:14 2 शमूएल 21:15 2 शमूएल 21:16 2 शमूएल 21:17 2 शमूएल 21:18 2 शमूएल 21:19 2 शमूएल 21:20 2 शमूएल 21:21 2 शमूएल 21:22



2 शमूएल 21:1 — संदर्भन और अर्थ
इस पद में दाऊद केroi के समय अकाल का कहना है और यह अकाल क्षेत्रीय समाजिक आक्रांताओं से नहीं, बल्कि शाऊल के शासनकाल के आतंरिक अपराध के कारण था। गिबोनियों के साथ क्या हुआ, यह एक पुरानी शपथ-तोड़ घटना के कारण उत्पन्न कठिनाईयों की वजह बनती है। यहोवा दाऊद से कहता है कि यह उद्धार की समस्या शाऊल के घराने के खूनी कर्म के कारण आई है—गिबोनियों के प्रति आस्था और न्याय के उल्लंघन की जिम्मेदारी दाऊद के पड़ोसी शासन से जुड़ी नहीं है, बल्कि तत्कालीन सत्ता-व्यवस्था के अपराध से जुड़ी है।
मुख्य अर्थ
यह verse बताता है कि शास्त्र-समय के दौरान यदि समुदाय पर अकाल या विपत्ति आती है, तो उसका कारण अक्सर पूर्व के निर्णयों और अधर्म के परिणाम होते हैं। दाऊद को एहसास होता है कि भगवान का क्रोध कभी-न-कभी उन लोगों पर नहीं बल्कि राजनीतिक-यात्राओं के प्रभावों में प्रकट होता है जो नैतिक जिम्मेदारियों से भागते हैं। उद्धारकर्ता-न्याय की इस व्याख्या में, परमेश्वर अपनी धार्मिक-न्याय की नीति को आगे बढ़ाते हैं—किसी भी समाज की सुरक्षा और शांति तब तक नहीं मिलती जबतक वह अन्यायपूर्ण कर्मों के साथ जुड़ाव बनाए रखता है।
केंद्रीय विषय
कथा-योग्य क्रिस्पिएंस/अनुशंसित cross-references
- रोम 3:25-26 जैसे राजाओं और समुदायों के बीच न्याय के संयम की चर्चा में यह दर्शाता है कि परमेश्वर दया के साथ सच्चे न्याय के लिए देरी कर सकता है।
- पवित्र गिनती 25:6-8 के समय की तरह पाप के परिणाम से निपटते समय विश्वासियों के लिए पश्चात्ताप और पुनर्स्थापन की राह खुलती है।
- निर्गमन 34:7 और मनोनीत घटनाओं में, परमेश्वर अपने पहिले-पहिले किये गए अनुबंध के अनुरूप दया और न्याय का संतुलन दिखाते हैं।
व्यवहारिक विचार
किसी समुदाय के लिए यह याद दिलाता है कि हमारी नैतिकता और ईमानदारी में सुधार कैसे सभी के लिए भलाई ला सकता है। अन्यायपूर्ण कर्मों के विरुद्ध सजग रहने, शपथ-पालन और गिबोनियों जैसी प्रतिज्ञाओं का सम्मान हमारे दैनिक जीवन में भी एक नमूना है। यदि हम गलतियों के परिणामों के समय में होते हैं, तो प्रार्थना और पश्चात्ताप से परमेश्वर की कृपा फिर से खोली जा सकती है।
छोटा संक्षेप
इस पद से हमें यह सीख मिलती है कि अपराधों की जड़ें इतिहास-निर्भर होती हैं और परमेश्वर न्याय के साथ उत्तर देते हैं; दाऊद की प्रार्थना से यह दिखता है कि पश्चात्ताप और नीति-निर्माण दोनों ही आवश्यक हैं ताकि विपत्ति दूर हो सके।
संदर्भ-नोट
यहाँ उपयुक्त संकेत: शाऊल के घराने के कृत्यों के परिणामस्वरूप अकाल आया—यह तात्कालिक राजनीतिक निर्णयों से ऊपर एक धार्मिक-न्याय विषय है।
नोट: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; यदि आवश्यक हो तो उनके सार्वजनिक-domain विचारों के सारांश को समाहित किया गया है।