Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 21:1 2 शमूएल 21:2 2 शमूएल 21:3 2 शमूएल 21:4 2 शमूएल 21:5 2 शमूएल 21:6 2 शमूएल 21:7 2 शमूएल 21:8 2 शमूएल 21:9 2 शमूएल 21:10 2 शमूएल 21:11 2 शमूएल 21:12 2 शमूएल 21:13 2 शमूएल 21:14 2 शमूएल 21:15 2 शमूएल 21:16 2 शमूएल 21:17 2 शमूएल 21:18 2 शमूएल 21:19 2 शमूएल 21:20 2 शमूएल 21:21 2 शमूएल 21:22



2 शमूएल 21:16 पर टिप्पणी
पैग़ंबर-समय के संदर्भ में यह पंक्ति दाऊद के शासन के दौरान उनके साम्राज्य के भीतर उपस्थित खतरों और विरासत के कारणों को दर्शाती है। यहाँ यिशबोबनोब (या यिशबो-नोब) रापा वंश का एक शत्रु न होकरagnarak, एक परम-प्रतिशोधक के रूप में उपस्थित है; उसका लक्ष्य दाऊद को मारना है। यह कड़वा तथ्य बताता है कि विजयी राजा भी अपने समय में शक्तिशाली विरोध के समक्ष असुरक्षित हो सकता है, और परमेश्वर के समर्थन के बिना कोई भी प्रयास नाकाम हो सकता है।
मुख्य अर्थ
इस पाप-पूर्वक योजना में लोहे की तलवार और पीतल के भारी बाहु-बल दिखाई देता है—यानी भौतिक शक्ति से निर्णायक दबदबा बनाने की इच्छा। परंतु विवरण यह भी संकेत देता है कि दाऊद के सैनिकों के बीच एक पूर्व-निर्धारित शत्रु है, जो उनकी सुरक्षा के लिए खड़ा है। यह साक्ष्य देता है कि राजा भी भीतर-भीतर खतरे से घिरे रहते हैं और संभव तकनीकी मारक क्षमता के बावजूद, ईश्वर की कृपा नहीं मिलती तो सब कुछ एक दुर्भाग्य बन सकता है।
तीन प्रमुख विषय
अन्य संदर्भ के साथ संयोग
- संदर्भ 1: दाऊद की आर्थिक-सामरिक चुनौतियाँ और उनके समय के शत्रु; यह दिखाता है कि सत्ता संभालना सुरक्षा से जुड़ा है, न कि केवल युद्ध-तकनीक से।
- संदर्भ 2: परमेश्वर के निर्देश और साहस का संयोजन: दाऊद के समय भविष्य के खतरे से निपटने के लिए ईश्वर की सहायता आवश्यक है।
- संदर्भ 3: आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के विचार: कि केवल बाहरी हथियार नहीं, बल्कि आंतरिक नैतिकता और चित्तशक्ति भी सुरक्षा का भाग है।
योजना-आत्म-चिंतन
आज के पाठ से सीख मिलती है कि सफलता के लिए बाहरी शक्ति पर्याप्त नहीं है। प्रतिष्ठा और शक्ति के बावजूद, परमेश्वर की सुरक्षा और मार्गदर्शन आवश्यक है। अपने जीवन में भी जब मन में प्रतिशोध की आग जले, तब स्मरण रखें कि प्रभु ही हमारे सुरक्षित ठिकाने हैं। कमजोरियों के समय भी ईश्वर को याद करना और उनके प्रेम-निर्देशन पर निर्भर रहना wiser है।
संक्षिप्त सार
इस पद में दाऊद के समय के अंदर एक भारी खतरा उभरता है—यिशबोबनोब का प्रतिशोध-इरादा। यह दर्शाता है कि सत्ता-संरक्षण भी खतरे से मुक्त नहीं, पर ईश्वर की कृपा और संरक्षण के बिना कोई भी योजना टिक नहीं पाती।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) उदाहरण के तौर पर अन्य दाऊद-काल के संघर्ष जहाँ बाहरी शक्ति के साथ ईश्वरीय उद्धार आवश्यक है।
2) राजा की नैतिक जिम्मेदारी और आंतरिक सुरक्षा के बारे में पाठ।
3) परमेश्वर के डर से भरे नेतृत्व की आवश्यकता पर एक स्मरण—युद्ध में असली विजय आत्म-नियमन और आशीर्वाद से मिलती है।
नोट: इस पाठ के व्याख्या में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-उद्धरणों के संक्षिप्त वाक्यों का उपयोग आवश्यकतानुसार किया गया है; यदि उनके किसी स्पष्ट उद्धरण का उल्लेख हो, तो उसे यहाँ उद्धृत या स्थित रूप में शामिल किया गया है।