2 शमूएल 21:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसके बाद पलिश्तियों के साथ गोब में फिर युद्ध हुआ; उस समय हूशाई सिब्बकै ने रापा के वंश के सफ को मारा।

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2 शमूएल 21:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 शमूएल 21:18 संदर्भ और अर्थ

यह पदावली कहानी के क्रम में आता है जहाँ दाऊद के शासनकाल के दौरान पिलिश्तियों से जुड़ी लंबी संघर्ष-युद्ध की घटनाएं चलती हैं। पिछले घटनाक्रमों के पीछे यह विचार स्थापित होता है कि राजा दाऊद के समय इजराइल के लिए सुरक्षा परिश्रम और युद्ध-उत्पात एक गतिमान भाग था। यहाँ “हूशाई सिब्बकै” नामक वीर का उल्लेख आता है, जो रापा के वंश से है, और उसने पलिश्तियों के साथ गोब में एक निर्णायक विजय हासिल की। यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि दाऊद के शासनकाल में सेना के प्रमुख योद्धाओं की भूमिका कितनी निर्णायक रही है, और परमेश्वर की कृपा से ही विजयी होना संभव हुआ।

मुख्य अर्थ

इस verse में एक बार फिर शत्रुओं के विरुद्ध वीरता और शौर्य की आवश्यकता उजागर होती है। हूशाई सिब्बकै की फौजी विजय से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर के लोगों के साथ संघर्ष में पारंपरिक शक्तियों से नहीं, बल्कि परमेश्वर की सहायता और विश्वसनीय निष्ठा से सफलता मिलती है। यह भी दिखता है कि जो वंश रापा से हैं, वे भी परमेश्वर के कार्य में भागीदार बनते हैं, और उनके द्वारा दी गई विजय इतिहास में दर्ज हो जाती है।

महत्वपूर्ण विषय

  • धैर्य और बल की संयुक्त भूमिका: युद्ध के समय शस्त्र और रणनीति के साथ परमेश्वर की मदद की आशा भी अनिवार्य रहती है।
  • विश्वास की विरासत: रापा वंश के एक योद्धा की विजय यह दर्शाती है कि परमेश्वर सभी को सशक्त कर सकता है जो विश्वास से आगे बढ़ते हैं।
  • युद्ध-न्याय और सुरक्षा: शत्रुओं के साथ लड़ाई में देश की सुरक्षा और शासन के लिए सही नीतियाँ बननी चाहिए, ताकि भविष्य में पुनः आक्रमण रोके जा सकें।

संबंधित आयतें (Cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

• एक अन्य उल्लेखनीय वीरता का संदर्भ: परमेश्वर के साथ एकाग्रता बनाये रखना आवश्यक है ताकि शत्रु पीछे न हटे। (उद्धरण के बिना संदर्भित आयतों का संकेत)
• शासनकाल के भीतर वीरों की भूमिका: राजा के गुरु-योद्धाओं की वीरता से राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
• पवित्रता की स्मृति: विजय केवल सामर्थ्य नहीं, बल्कि परमेश्वर पर विश्वास का परिणाम है।

व्यावहारिक विचार

आज के संदर्भ में यह अनुभूति दे कि कठिन परिस्थियों में भी हमें संयम, विश्वास और साहस के साथ कदम बढ़ाने चाहिए। सफलता तब मिलती है जब हम ईश्वर की दिशा में कदम उठाते हैं, अपनी योग्यताओं के साथ उसे जोड़ते हैं, और एक समुदाय के रूप में एक दूसरे का सहारा बनते हैं।

संक्षिप्त समापन

2 शमूएल 21:18 का वृहत पाठ यह है कि परमेश्वर के लोग कठिनाइयों के बीच भी साहस, विश्वास और एकता से आगे बढ़ते हैं। हूशाई सिब्बकै की विजय एक स्मृति है कि वीरता के साथ परमेश्वर की सहायता पर निर्भर रहना ही वास्तविक जीत देता है।

टिप्पणीकृत संदर्भ (संक्षेप)

यह अध्याय युद्ध-युग की एक श्रृंखला है जहां युद्ध-व्यवस्था और धार्मिक विश्वास एक साथ चलते हैं। विवरणपूर्ण टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार विचार ऐसे हैं जो संघर्ष के समय आत्म-निर्भरता का पाठ और परमेश्वर की कृपा को मजबूत करते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 शमूएल 21:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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सिब्बकै हूशाई, अहोही ईलै,

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2 शमूएल 21:20 (HINIRV) »
फिर गत में भी युद्ध हुआ, और वहाँ बड़े डील-डौल वाला एक रापा के वंश का पुरुष था, जिसके एक-एक हाथ पाँव में, छः-छः उँगली, अर्थात् गिनती में चौबीस उँगलियाँ थीं।

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2 शमूएल 21:16 (HINIRV) »
तब यिशबोबनोब, जो रापा के वंश का था, और उसके भाले का फल तौल में तीन सौ शेकेल पीतल का था, और वह नई तलवार बाँधे हुए था, उसने दाऊद को मारने का ठान लिया था।

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