Old Testament
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2 शमूएल 9:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
दाऊद ने पूछा, “क्या शाऊल के घराने में से कोई अब तक बचा है, जिसको मैं योनातान के कारण प्रीति दिखाऊँ?”
2 शमूएल 9:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 शमूएल 9:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 20:42 (HINIRV) »
तब योनातान ने दाऊद से कहा, “कुशल से चला जा; क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे से यह कहके यहोवा के नाम की शपथ खाई है, कि यहोवा मेरे और तेरे मध्य, और मेरे और तेरे वंश के मध्य में सदा रहे।” तब वह उठकर चला गया; और योनातान नगर में गया।

मरकुस 9:41 (HINIRV) »
जो कोई एक कटोरा पानी तुम्हें इसलिए पिलाए कि तुम मसीह के हो तो मैं तुम से सच कहता हूँ कि वह अपना प्रतिफल किसी तरह से न खोएगा।”

मत्ती 25:40 (HINIRV) »
तब राजा उन्हें उत्तर देगा, ‘मैं तुम से सच कहता हूँ, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से* किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया।’
सारांश स्पष्ट कहावत
दाऊद पूछता है कि क्या शाऊल के घराने में से अभी भी कोई बचा है ताकि वह योनातान के कारण उसकी कृपा दिखा सके। यह वचन यह दर्शाता है कि दाऊद के मन में शाऊल और उसका परिवार के प्रति दयालु स्मरण बना हुआ है, और यह दाऊद की नीति में मित्रता, करुणा और वचनबद्धता की मिसाल बनती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह संदर्भ 2 शमूएल के काल की है, जहाँ दाऊद ने योनातान के प्रेम-कथन को स्मरण कर शाऊल के घराने के किसी जीवित सदस्य की प्रत्यक्ष कृपा करने की इच्छा जताई। योनातान और दाऊद के बीच गहरी मित्रता थी, जिसके कारण दाऊद शाऊल के वंशावली के सदस्य के लिए आत्मीयता दिखाने को प्रेरित हुआ। यह संकेत है कि दाऊद, सत्ता-प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि दयालुता और शद्धान-आचरण के मार्ग पर अग्रसर रहता है।
व्याख्या के प्रमुख बिंदु
संबद्ध पाठ और संक्षिप्त व्याख्या
• 2 शमूएल 9:1 के आसपास के अन्य विचार यह संकेत करते हैं कि दाऊद ने शाऊल के उत्तराधिकारियों के प्रति सम्मान बनाए रखा और यह दर्शाता है कि वह किस प्रकार प्रभु का प्रेम-पथ अपनाने के लिए प्रेरित रहा।
• उद्धृत कथन के साथ जुड़ाव यह दिखाता है कि किस प्रकार मित्रता और करुणा इतिहास के नैतिक उदाहरण बनते हैं।
• अगर किसी अन्य पात्र से जुड़ा संदर्भ देखें, तो यह बताता है कि समाज और परिवार के सदस्यों के प्रति दया एक वास्तविक नेतृत्व की पहचान है।
खास उद्धरण और पूर्ववर्ती विचार
प्रसिद्ध पवित्र-टिप्पणीकार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों से मिलती-जुलती प्रवृत्ति यह है कि दाऊद का यह प्रश्न सामर्थ्य और करुणा के साथ संतुलित प्रशासन का परिचय देता है—परन्तु किसी भी स्पष्ट अलंकारिक दयालुता के स्थान पर यह क्रमशः स्मरणीय प्रेम की पुष्टि है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (संरक्षित रूप से तीनों लेखकों से): यदि उपलब्ध हो तो इन टिप्पणीकारों के छोटे-से कथन शब्दों का उल्लेख किया गया है; विस्तृत पूर्ण उद्धरण इस पन्ने में नहीं दिया गया है ताकि पाठ का संतुलन बना रहे।
व्यावहारिकtakeaway
हम भी बड़े स्तर पर सत्ता या स्थिति से परे जाकर कमजोरों के प्रति दया दिखाएँ। अपनापन, स्मरण और करुणा से यह दिख सकता है कि हम ईश्वर के प्रेम की साक्षी हैं: एक अलौकिक दया जो रिश्तों को मजबूत बनाती है और नेतृत्व को मानव-हित में संचालित करती है।
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
- केसल-उद्धार के लिए दया का बारंबार उल्लेख: 2 समूएल 4:4; 1 शमूएल 20:14-17 — यह दिखाता है कि मित्रता और करुणा पुराने संबंधों को भी पवित्र प्रेरणा देती है।
- शाऊल परिवार के प्रति दया का विचार: 2 शमूएल 1:24; 2 शमूएल 9:6-7 — यह दर्शाता है कि राजनयिक और व्यक्तिगत दयालुता एक साथ चलती है।
नोट: उपरोक्त में शामिल विशिष्ट शाब्दिक पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पूर्ण उद्धरण नहीं हैं; उनके अंदरूनी विचारों के निष्कर्ष और शैली का समेकित सार यहां प्रयोजित गया है।