Old Testament
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2 शमूएल 9:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
दाऊद ने उससे कहा, “मत डर; तेरे पिता योनातान के कारण मैं निश्चय तुझको प्रीति दिखाऊँगा, और तेरे दादा शाऊल की सारी भूमि तुझे फेर दूँगा; और तू मेरी मेज पर नित्य भोजन किया कर।”
2 शमूएल 9:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 9:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 शमूएल 9:1 (HINIRV) »
दाऊद ने पूछा, “क्या शाऊल के घराने में से कोई अब तक बचा है, जिसको मैं योनातान के कारण प्रीति दिखाऊँ?”

1 राजाओं 2:7 (HINIRV) »
फिर गिलादी बर्जिल्लै के पुत्रों पर कृपा रखना, और वे तेरी मेज पर खानेवालों में रहें, क्योंकि जब मैं तेरे भाई अबशालोम के सामने से भागा जा रहा था, तब उन्होंने मेरे पास आकर वैसा ही किया था।

2 शमूएल 19:28 (HINIRV) »
मेरे पिता का समस्त घराना तेरी ओर से प्राण दण्ड के योग्य था; परन्तु तूने अपने दास को अपनी मेज पर खानेवालों में गिना है। मुझे क्या हक़ है कि मैं राजा की दुहाई दूँ?”
2 शमूएल 9:7 का अर्थ और संदर्भ
सीधे शब्दों में परम संकेत यह है कि दाऊद बिशपाली मेफिस किंगडम के नये हर मोड़ पर दया और स्थिरता का संकेत दे रहा है; वह यूणातान पुत्र योआबे के कारण मीकाशयक सम्बन्ध के साथ मेज पर स्थान और सुरक्षा दे रहा है.
संदर्भभूमि
यह अध्याय दाऊद की दयालु राजनीतिक नीति का भाग है। योनातान के सगे भाई-बंधुओं को शाऊल के दामन से अलग-थलग किया गया था, पर दाऊद यह स्पष्ट कर देता है कि वह उनके वंश के प्रति संवेदनशील है। मिड-पूर्व राजनीतिक जीवन में राजा की कृपा से भूमि और भोजन का अधिकार मोल तौल कर बाँटा जाता था; यहाँ दाऊद कह रहा है कि बंजर-परिवार भी उसकी मेज़ पर सम्मान पाएगा।
मुख्य interpretive observations
संक्षिप्त थीमैटिक बिंदु
अनुरूप क्रॉस-रेफरेंस
1) 2 शमूएल 9:1–3 — दाऊद का पूछ-ताछ कर कहना कि क्या उन्मुक्तता से शाऊल के घर के किसी व्यक्ति के साथ व्यवहार संभव है; यह दृश्य दायित्व और करुणा पर बल देता।
2) 2 शमूएल 4:4 — यून्नान के पुत्र महिशेल के जीवन के संदर्भ में दाऊद की नीति के बारे में स्मरण देता है कि व्यक्तिगत संबंधों के बजाय रियायत और कृपा अधिक महत्वपूर्ण है।
3) रोम 12:17–18 — “जो कुछ भी हो, अपनी दृष्टि में भमत नहीं करना; आपसी शांति बनाए रखें”—यह सन्देश दाऊद के व्यवहार में एक नैतिक दिशा देता है कि शत्रुता के बजाय सहयोग और सम्मान से व्यवहार करें।
परोपकारी अभ्यास के लिए छोटा takeaway
किशोर या नया व्यक्ति यदि सत्ता या असुरक्षा के समय में आए, तो दाऊद की तरह कृपा और प्रतिष्ठा की नीति अपनाएं: पुराने रिश्तों के प्रति सम्मान बनाए रखें, कमजोरों को सुरक्षा दें, और भोजन-संसाधन तक पहुँच सुनिश्चित करें।
इस पाठ का सार यह है कि साम्राज्य-नीति में भी मानवीय दया की जगह है—जहाँ एक राजा अपने पूर्वज-वंशज के प्रति संवेदना दिखाकर परिवारों के बीच स्थिरता और समुदाय-भरोसा बनाता है।
इस पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे उद्धरण नहीं मिलते, अतः केवल उनके विचारों के सार को समन्वित किया गया है और उपलब्ध पौराणिक-टिप्पणियों के आधार पर एक सम्मिलित अर्थ प्रस्तुत किया गया है।