Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 20:1 2 शमूएल 20:2 2 शमूएल 20:3 2 शमूएल 20:4 2 शमूएल 20:5 2 शमूएल 20:6 2 शमूएल 20:7 2 शमूएल 20:8 2 शमूएल 20:9 2 शमूएल 20:10 2 शमूएल 20:11 2 शमूएल 20:12 2 शमूएल 20:13 2 शमूएल 20:14 2 शमूएल 20:15 2 शमूएल 20:16 2 शमूएल 20:17 2 शमूएल 20:18 2 शमूएल 20:19 2 शमूएल 20:20 2 शमूएल 20:21 2 शमूएल 20:22 2 शमूएल 20:23 2 शमूएल 20:24 2 शमूएल 20:25 2 शमूएल 20:26



2 शमूएल 20:26 — संदर्भ और अर्थ
यह श्लोक 2 शमूएल की कथा में दाऊद के शासन के दौरान घटनाओं के बीच एक पारस्परिक कथन के रूप में आता है। यहाँ संदर्भ है कि दाऊद के एक मंत्री याईरी ईरा (हिंदी संस्करण में एक मंत्री का नाम) का उल्लेख किया गया है, जो दाऊद के कार्यक्रमों और शासन में भूमिका निभाता है। पाठ इसका संकेत देता है कि दाऊद के केंद्र में शक्तिशाली और विश्वसनीय अधिकारी थे, जो राज्य के संचालन में सहकार्य करते रहे।
मुख्य संदेश
इस श्लोक का केंद्रगत अर्थ यह है कि दाऊद के समय के राजनीतिज्ञों और सलाहकारों के साथ उनका संबंध कैसे प्रशासनिक निर्णयों में सहारा देता था। मंत्री की उपस्थिति से यह स्पष्ट होता है कि दाऊद के शासन में नेतृत्व के साथ साथ कर्तव्य-निष्ठा और सेवाभाव भी उपस्थित थे।
तीन प्रमुख थीम
संबद्ध पाठ (Cross-references)
1) 2 शमूएल 8:15-18 — दाऊद की सैन्य और राजनीतिक ताकत के वितरण में मंत्री और अधिकारियों की भूमिका का संकेत। समझें कि नेतृत्व किस प्रकार प्रशासनिक संरचना से समर्थित रहता है।
2) 1 शमूएल 22:7-9 — राज्य संचालन में मंत्री-परिषद की भूमिका और राजा के निर्देशों के पालन का महत्व।
3) 2 शमूएल 23:1-2 — दाऊद के वक्त spoken कविता और विद्वान मंत्रियों के साथ निर्णय को पवित्रता और प्रामाणिकता से जोड़ना।
व्यावहारिक विचार
इस पाठ से सीखने योग्य बात यह है कि किसी भी नेतृत्व-स्थिति में भरोसेमंद सहयोगी और समर्थक संस्थाओं की महत्ता समान होती है। नेतृत्व को सफलता तब मिलती है जब मंत्री, सलाहकार और समर्थक स्पष्ट उद्देश्य, ईमानदारी और सेवा-भाव के साथ साथ चलते हैं। इसका धार्मिक दार्शनिक आह्वान यह है कि परमेश्वर के उद्देश्य में भागीदारी तब मजबूत होती है जब अधिकारी और राजा एक दूसरे के साथ सत्यनिष्ठा से कार्य करें।
छोटी समापन-सार
2 शमूएल 20:26 का छोटा किनारा भी यह बताता है कि दाऊद के शासन में मंत्री और अधिकारी एक संस्थागत समर्थन थे। यह दृश्य हमें यह याद दिलाता है कि राजा के साथ समाज के विविध भाग मिलकर एक स्थिर और ईमानदार शासन को बनाते हैं।
उद्धरण संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सत्यापित विचार यहाँ संक्षेप में समाहित हैं; यदि किसी उद्धरण की पंक्ति सीधे उद्धृत हो, तो नीचे दिया गया संकेत स्पष्टीकरण देता है।
नोट: इस पाठ में किसी विशिष्ट श्लोक के मूल पाठ के सीधे उद्धरण को शामिल नहीं किया गया है; केवल उनके प्रभाव और अर्थ के अनुवाद-समरूप सार को प्रस्तुत किया गया है।