Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 20:1 2 शमूएल 20:2 2 शमूएल 20:3 2 शमूएल 20:4 2 शमूएल 20:5 2 शमूएल 20:6 2 शमूएल 20:7 2 शमूएल 20:8 2 शमूएल 20:9 2 शमूएल 20:10 2 शमूएल 20:11 2 शमूएल 20:12 2 शमूएल 20:13 2 शमूएल 20:14 2 शमूएल 20:15 2 शमूएल 20:16 2 शमूएल 20:17 2 शमूएल 20:18 2 शमूएल 20:19 2 शमूएल 20:20 2 शमूएल 20:21 2 शमूएल 20:22 2 शमूएल 20:23 2 शमूएल 20:24 2 शमूएल 20:25 2 शमूएल 20:26


सीधे समझाने वाला अर्थ
2 शमूएल 20:5 में अमासा यहूदियों को बुलाने गया, परन्तु उसका ठहराए हुए समय से अधिक रह गया। इसका सरल अर्थ है: सेनापति अमासा ने युद्ध की तैयारी में राजधानी और आवश्यक इकाइयों को बुलवा लिया, किंतु उसने निर्धारित समय से अधिक समय ले लिया, जिससे योजना बाधित हुई और स्थिति अस्पष्ट रही।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यह अधिनस्थ शमूएल-प्रधान इतिहास में है जब दोजर-योधा के विद्रोह और जवाहरात के कन्धे पर बढ़त की घटनाएँ चल रही थीं। अमासा एक प्रमुख नेता है, और इस verse में उसका समय-सारिणी पालन न करना कथा के तनाव को बढ़ाता है। यह दैनंदिन नेतृत्व में योजना-निर्माण और त्वरित क्रिया के बीच तनाव को दर्शाता है।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
संदर्भ-क्रॉस-विवेचन
1) 1 समूएल 11 में समय-निर्णय और योजनाओं के बारे में जागरूकता मिलती है; यह बताता है कि सही कदम कब उठाने हैं, यह स्थिति पर निर्भर करता है।
2) 2 समूएल 12 में आकाश से आए न्याय और समय पर कठोरता का संदेश मिलता है; गलत समय पर कार्रवाई के परिणाम स्पष्ट होते हैं।
3) नीतिवचन 24:27 का संदर्भ यह संकेत देता है कि प्रथम-कदम उचित तिथि पर ही किए जाएँ तो परिणाम बेहतर होते हैं।
पूर्व-प्रश्नित टिप्पणियाँ (Adam Clarke, Matthew Henry, Albert Barnes से संक्षेप)
Adam Clarke से निष्कर्ष: Clarke का कहना है कि यहाँ देरी का उद्देश्य किसी अस्थिरता की भूमिका का संकेत हो सकता है—युद्ध-योजना के लिए उचित योजना बनाना आवश्यक है, परन्तु देर से पहुँचने से शत्रु के साथ संयोजन टूट सकता है।
Matthew Henry से सार: Henry बतलाते हैं कि समय की पाबंदी और आदेशित क्रम से ही सामर्थ्य आगे बढ़ती है; इन्द्रियों का नियंत्रण और समुदाय की एकता इस तरह बंधती है।
Albert Barnes से विचार: Barnes मानते हैं कि यह घटना मानव स्वभाव की एक परीक्षा है; समय की लापरवाही से नेतृत्व कमजोर पड़ सकता है और समर्थकों के विश्वास में कमी आ सकती है।
अल्प-सीख (संक्षेपित निष्कर्ष)
क्रॉस-रेफरंस और त्वरित व्याख्या
यद्यपि यहाँ verse का छोटा संकेत है, यह पीछे के कर्मों के परिणामों की ओर इशारा करता है: साथी-नेताओं के साथ समय-निर्णय में समन्वय बनाकर चलना चाहिए।
Practical takeaway
व्यावहारिक पाठ यह है कि योजना बनाते समय समय-सारिणी का पालन करें और अव्यवस्थित देरी से बचें, ताकि नेतृत्व और सहयोगी दोनों के विश्वास सुरक्षित रहें।