Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 2:14 का अर्थ और संदर्भ
इस पद से स्पष्ट होता है कि मूसा ने नृशंस हिंसा के कारण मिस्र के पहरेदार के सामने अपनी कथा, और अपने आप पर गंभीर चुनौती देखते ही भय के कारण एक तरह से धोखा-छिपाव की आवश्यकता को महसूस किया। जिस प्रकार उसने मिस्री के खिलाफ घात किया, वह बात अब एक स्थानीय अनुक्रम में उसके इरादों का खुलना संकेत है; इसलिए वह डर गया कि उसकी पहचान खुल जाएगी और उसे दंड मिल सकता है।
संदर्भीय पृष्ठभूमि
निर्गमन ग्रन्थ में मूसा के जीवन से यह घटना तब आती है जब वह इजरायली दासों के बीच रहता है। मिस्र की सिंहासन-परंपरा और दास-समाज के बीच से उसका आकाश-सीखा निर्णय उसके भीतर एक आक्रोश और राहत दोनों की प्रतिक्रिया जगाता है। यह पाठ, जहाँ एक तरफ उसने मिस्र के एक अधिकारी को मार डाला, दूसरी तरफ ईश्वर की योजना के भीतर उसके चयनित चरित्र की परिचय देता है—पर्यवेक्षक बनने से पहले उसकी अपनी सुरक्षा चिंता प्रमुख होती है।
interpretive observations
छोटे थेमैटिक बिंदु
क्रॉस-रेफरेंसेस और संकल्प
यही विषय परिवार के अन्य भागों में भी प्रकट होता है—एक तरफ जोश जोशियात (जीवन के लिए खतरा) और दूसरी तरफ परमेश्वर की दृष्टि से सही समय पर सही कदम उठाने की आवश्यकता।
नोट: नीचे दिए क्रॉस-रेफरेंसेस केवल संदर्भ के लिए: पहले क्रॉस-रेफरेंस में मूसा के उद्देश्य और भय का साथ, फिर भविष्य में ईश्वर के चयनित मार्ग के संकेत, और आख़िर में दया और दंड का संयोजन दिखते हैं।
व्यावहारिक takeaway
अतिरिक्त टिप्पणी और उद्धरण संदर्भ
टिप्पणीकारों में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke ने इस घटना को मानवीय भय, अधिकार और दायित्व की दृष्टि से गहराई से देखा है। यदि उपलब्ध हों, तो उनके छोटे उद्धरण इस सार को और पुष्ट करते हैं; किन्तु पाठ के मूल अर्थ को बनाये रखना ही उचित है।
छोटे उद्धरण (जहाँ उपलब्ध)
— Matthew Henry के संक्षिप्त निष्कर्ष: “यह घटना दिखाती है कि परमेश्वर कभी-कभी हमारे डर के बावजूद भी अपनी योजना के अनुसार आगे बढ़ते हैं।”
ये टिप्पणियाँ इस बात को सुगम बनाती हैं कि मूसा का निर्णय केवल एक हिंसक घटना नहीं, बल्कि एक प्रबुद्ध चरण है जो ईश्वर के उद्धारकार्य के लिए आवश्यक कारण बनता है।