निर्गमन 2:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब उसने अपनी बेटियों से कहा, “वह पुरुष कहाँ है? तुम उसको क्यों छोड़ आई हो? उसको बुला ले आओ कि वह भोजन करे।”

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निर्गमन 2:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

निर्गमन 2:20 — सरल अभिधान में अर्थ

इस वाक्य में बताया गया है कि मिस्र से भागकर आया मूसा खिदमत के लिये अपनी पत्नी और बेटीों के घर पहुंचा है। पूवकथा में शेष जीवन की पहली यात्रा के रूप में यह दृश्य है: पत्नी की बहनें अब नहीं, बल्कि पति को बुलाकर भोजन का प्रयोजन भी है। यहाँ कहावत है कि वह पुरुष कहाँ है? तुम उसको बुला कर ले आओ कि वह भोजन करे।

संदर्भ पृष्ठभूमि

निर्गमन-2 का भाग पितृकथा से जुड़ा है: मूसा, जो इजराइल की बुलाहट का हेतु बनता है, उसके जीवन की प्रारम्भिक त्रुटियाँ और आघात भी दिखते हैं—वह एक बंधुआ बालक के रूप में बड़ा हुआ, पर परमेश्वर की योजना में उसका स्थान स्थापित है। इस छंद में मिस्त्री के मानवीय अनुभव की झलक है: परिवार, पहचान, और समुदाय के साथ एक सुरक्षित ठिकाना चाहना।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

•提出 वाक्य में मातृत्व-परिवार के प्रति जिम्मेदारी का अभिव्यंजन दिखता है: मूसा के परिवार के प्रति पिता की भूमिका, और उन्होंने सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा की चिंता की।

• यह पंक्ति दिखाती है कि किस प्रकार परमेश्वर की योजना में लोग एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं—पति, पत्नी और बच्चे एक साथ निर्णय लेते हैं ताकि आवश्यकता के समय भोजन और आश्रय मिल सके।

• यह संकेत देता है कि मूसा अपने परिवार के साथ एक सुरक्षित जीवन के लिए प्रयासरत रहा; किन्तु परमेश्वर के बुलावे के साथ उसका मार्ग आगे बढ़ेगा।

मुख्य विचार (थीमैटिक बिंदु)

  • परिवारिक सुरक्षा बनाम आंतरिक बुलाहट: मूसा का परिवार पहली प्राथमिकता रहा, पर परमेश्वर की योजना उसे आगे बढ़ाती है।
  • आत्म-स्थिति का संज्ञान: अपने स्थान, पहचान और दायित्वों को समझना—कब家 और कब बुलावा की ओर जाना है।
  • संतुलन का अनुभव: घर-परिवार के साथ संतुलन बनाकर भी परमेश्वर के कार्य के लिए तैयार हो जाना।

अन्य आयाम और संदर्भ

• माता-पिता-परिवार के साथ देखभाल और जिम्मेदारी पर एक गहरे संदेश के रूपक के रूप में; यह शिशु मोर के लिए सुरक्षा और आश्रय का संकेत देता है।

• दूसरे संदर्भ जो इस घटना को परिप्रेक्ष्य देते हैं: मूसा की पहली बुलाहट के पास-पड़ाव से जुड़ी घटनाएँ; पिता-उद्धार की योजना में परिवार की भूमिका; समूह के सदस्य एक साथ भोजन और विश्राम के क्षण दिखाते हैं।

संक्षिप्त प्रायोगिक takeaway

ईमानदारी से जीवन के प्रत्येक चरण में सुरक्षा और सुरक्षा-प्राप्ति के साथ परमेश्वर की बुलाहट का संतुलन बनाने का पाठ। घर-परिवार की आवश्यकताओं पर ध्यान देते हुए भी, जब परमेश्वर कहे, तब कर्तव्य-गति खोलना चाहिए।

Cross-References (संक्षेप में)

  • निर्गमन 3:7-10 — यह दिखाता है कि परमेश्वर ने मूसा के लिए बुलाहट कैसे तय की, जबकि उसकी पारिवारिक और सामाजिक स्थितियाँ भी प्रकट होती हैं। यह संबंध बताता है कि बुलाहट परमेश्वर के समय और जगह पर आती है।
  • यशायाह 6:8 — ‘हाँ, यहाँ है मेरा वलीक’—परमेश्वर की बुलाहट और मानवीय उपलब्धियों के बीच संतुलन का संदेश देता है।
  • याकूब 1:5 — यदि किसी को ज्ञान की कमी हो, तो वह परमेश्वर से माँग ले, और वह सब को देता है; यह संकेत देता है कि जीवन के निर्णयों में परमेश्वर के मार्गदर्शन का महत्व है।

नोट: इस पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; यदि आवश्यक हो, तो उनके व्याख्या से संक्षिप्त निष्कर्ष लिए जा सकते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 2:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब यह सुनकर, कि आज हमको यहीं भोजन करना होगा, उन्होंने यूसुफ के आने के समय तक, अर्थात् दोपहर तक, उस भेंट को इकट्ठा कर रखा।

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फिर मैं एक टुकड़ा रोटी ले आऊँ, और उससे आप अपने-अपने जीव को तृप्त करें; तब उसके पश्चात् आगे बढ़ें क्योंकि आप अपने दास के पास इसलिए पधारे हैं।” उन्होंने कहा, “जैसा तू कहता है वैसा ही कर।”

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