Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 2:23 के Immediately Setting और उसकी गहराई
बहुत दिनों के बीतने पर मिस्र का राजा मर गया। और इस्राएली कठिन सेवा के कारण लम्बी-लम्बी साँस लेकर आहें भरने लगे, और पुकार उठे, और उनकी दुहाई जो कठिन सेवा के कारण हुई वह परमेश्वर तक पहुँची।
ईश्वर के संकेत और भरोसे की राह
यह पंक्ति इस बड़े पथ के शूरवीर के आरम्भ के क्षणों को उद्घाटित करती है जब आह्वान और सहायता की पुकार सीधे परमेश्वर तक जाती है। समय की अवधि का उल्लेख बताता है कि दयालुता और न्याय के बीच ईश्वर अपने लोगों की स्थिति को सुनते हैं, भले ही उत्तर तुरंत न दिखे। इस्राएलियों के आह्वान में उनका दर्द,वे स्पष्ट करते हैं कि उनकी निर्भरता केवल मानव सहायता पर नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा पर है।
मुख्य शब्द और चित्र स्पष्ट करना
संबंधित बाइबल घटनाएं और उनसे सीख
यहां से तीन निकटवर्ती संदर्भ जुड़ते हैं:
इन संदर्भों में दिखता है कि ईश्वर का उत्तर नीचे से ऊपर की ओर आता है, और यह तब भी होता है जब परिस्थितियाँ अत्यंत कठिन हों।
पाठ से आज के लिए शिक्षा
- पीड़ा के समय भी प्रार्थना के रास्ते खुले रहते हैं; आह्वान के समय ईश्वर सुनते हैं।
- राजा के परिवर्तन से भी सत्ता-घड़ी निर्भर नहीं रहती; परमेश्वर के काल-चक्र में पितृ-स्नेह बना रहता है।
- हमारे लिए यह स्मरणीय है कि कठिन परिश्रम, दया-प्रार्थना, और विश्वास—तीनों एक साथ चलें तो उद्धार के मार्ग खुलते हैं।
पेशेवर टिप्पणीकारों के संकेत
मैथ्यू हेनरी के विचार के अनुसार यह समय ईश्वर की चिता में रोना-धोना नहीं, बल्कि पथ-प्रेरणा का आरम्भ है—ईश्वर ने अपने चुने हुए लोगों की दुहाई सुनी।
एल्बर्ट बार्न्स कहते हैं कि अल्पकालिक नतीजे के बजाय, परमेश्वर के समय के अनुसार पीड़ा का उद्देश्य गहराई से मुस्कान और भरोसे को फिर से स्थापित करना है।
एडम क्लार्क के अनुसार यहाँ यह देखा जाता है कि देश-राज्य का परिवर्तन भी ईश्वरीय योजना में एक संकेत है, जो मसीह की प्रतीक्षा में अखंड विश्वास की आवश्यकता को स्थापित करता है।
त्वरित क्रॉस-रेफरेंस
1) निर्गमन 3:7 — परमेश्वर ने देखा, सुना, और अपने लोग की दुहाई को जाना; उद्धार की शुरुआत उनका है।
2) निर्गमन 6:5 — परमेश्वर ने अपने लोगों के रोने को याद रखा और उनकी पीड़ा के कारण bondage से बाहर निकाला।
3) भजन 34:18 — जो दुखी हों, वे निकट हैं; पथ-प्रकाशन में ईश्वर का निकट आना स्पष्ट है।