Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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निर्गमन 2:25 - immediate setting
इस पाठ में परमेश्वर इस्राएलियों की दासता के समय उनके दुख-दर्द को देखते हैं और उनके गरजे को हृदय से सुनते हैं। यह घटना मोशे के लौट आने के ठीक पहले की है, जब मिस्र की ज़िद और दमन के बीच इस्राएलियों की दुआँ परमेश्वर के पास पहुँचती हैं।
पारगमन वेदना पर परमेश्वर की दृष्टि और चित्ताकर्षण
वाक्य के अनुसार, "परमेश्वर ने इस्राएलियों पर दृष्टि करके उन पर चित्त लगाया"—यह कहना कि ईश्वर उनकी पीड़ा और अत्याचार को गहराई से अनुभव करते हैं और उनके लिए एक क्रिया-शील प्रेरणा बनते हैं। यह दृष्टि और चित्ताकर्षण दो अलग but related पहलुओं को एक साथ प्रस्तुत करते हैं: एक ओर परमेश्वर का सचेत रहना और तुरंत उत्तर देने की तयारी, दूसरी ओर करुणा से भरा हृदय जो संकटपूर्ण स्थिति में सहायता के लिए उठ खड़ा होता है।
महत्वपूर्ण शब्द और भाव
गौरवशाली पूर्व-वचन (Cross-references)
1) तेलुसन 2:19–20 के समान आत्म-विश्लेषण में परमेश्वर की करुणा और मदद की इच्छा को उद्धृत किया गया है—यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए निष्क्रिय नहीं रहते।
2) याकूब 5:11 के संदर्भ में धैर्य और परमेश्वर की दया के मिलन को दर्शाने वाला दृश्य—गंभीर परीश्रम में भी ईश्वर का न्याय और करुणा एक साथ रहते हैं।
3) योशua 1:9 से प्रेरणा: परमेश्वर की दृष्टि और चित्ताकर्षण उनके लोगों की यात्रा में साहस और आश्वासन प्रदान करती है।
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने लोगों के दर्द को अनदेखा नहीं करते, बल्कि उन्हें सम्बल और ताकत प्रदान करते हैं।
युवविधिवत निष्कर्ष (Present-day application)
आज के पाठक के लिए यह संदेश है कि कठिनाई या दासी-युग के बंधनों में हरBeliever स्वस्थ विश्वास और निर्भरता में रहें: परमेश्वर देख रहे हैं, वे सहानुभूति के साथ उपस्थित हैं, और समय आने पर उनकी कृपा और मदद खुलती है। आपकी प्रार्थनाओं में धैर्य रखें, और किसी भी परिस्थिति में यह याद रखें कि परमेश्वर का चित्त डगमग नहीं होता; वह हमारी पीड़ा से परिचित हैं और उद्धार के लिए रास्ते बनाते हैं।
सारांश
निर्गमन 2:25 में बतलाया गया है कि परमेश्वर इस्राएलियों के दर्द को केवल देखा नहीं, बल्कि उनके लिए चित्त कर उठे। यह संकेत है कि उनकी दास्यता के बीच भी ईश्वर की करुणा सक्रिय है और वह समय आने पर क्रिया-शील रहते हैं। इससे हमारे विश्वास को आश्वस्ति मिलती है कि कठिन समय में भी 하나님 हमारे साथ हैं और उद्धार के लिए मार्ग बनाते हैं।
मूल विचारधार के अनुसार यह पाठ यह दिखाता है कि परमेश्वर की नीतियां मानव इतिहास के हर चरण में करुणा, न्याय और कृपा के साथ आगे बढ़ती हैं—और यह क्रिया-शीलता आज भी उसी भरोसे को बनाए रखती है।