Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 शमूएल 6:17 बाइबल पद की व्याख्या
2 शमूएल 6:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और लोग यहोवा का सन्दूक भीतर ले आए, और उसके स्थान में, अर्थात् उस तम्बू में रखा, जो दाऊद ने उसके लिये खड़ा कराया था; और दाऊद ने यहोवा के सम्मुख होमबलि और मेलबलि चढ़ाए।
2 शमूएल 6:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 6:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 इतिहास 15:1 (HINIRV) »
तब दाऊद ने दाऊदपुर में भवन बनवाए, और परमेश्वर के सन्दूक के लिये एक स्थान तैयार करके एक तम्बू खड़ा किया*।

2 इतिहास 1:4 (HINIRV) »
परन्तु परमेश्वर के सन्दूक को दाऊद किर्यत्यारीम से उस स्थान पर ले आया था जिसे उसने उसके लिये तैयार किया था, उसने तो उसके लिये यरूशलेम में एक तम्बू खड़ा कराया था।

2 शमूएल 6:17 का अर्थ-सार
इस शास्त्रीय वाक्य में कहा गया है कि यहोवा का सन्दूक लोगों के बीच लौटा लाया गया और दाऊद ने उसके सामने होमबलि और मेलबलि चढ़ाए; इसका तात्पर्य यह है कि परमेश्वर के उपस्थित रहने का अवसर पुनः बन गया और लोग जागरूक होकर यहोवा की पवित्रता के सामने समर्पण कर रहे थे।
संदर्भ-पृष्ठभूमि
युद्ध-यात्रा के बाद यहोवा के सन्दूक का पुनः आगमन इतिहास के एक निर्णायक मोड़ को दर्शाता है। दाऊद ने यहूदा के勢े में एक तम्बू बनवाकर सन्दूक के लिए स्थान निश्चित किया, ताकिIsraelites के बीच प्रभु की महिमा नयी तरह से प्रकट हो। यह घटना यह दिखाती है कि दाऊद एक विनम्र और श्रद्धायुक्त राजा था जो परमेश्वर के निर्देशों को महत्त्व देता है, और लोग भी सन्दूक के लौटने पर उपासना-आरोहण में दृढ़ थे।
व्याख्यात्मक विचार
2-3 मुख्य क्रॉस-रेफरेंसेस
- हलाक का संदर्भ: आश्रयस्थल और परमेश्वर की उपस्थिति के साथ समुदाय की आराधना का महत्व स्पष्ट होता है। यह दृश्य यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के बीच स्वर्गीय उपस्थिती की अनुभूति कराता है।
- 1 इतिहास 13:2-3: यह भी स्मरण कराता है कि एक सन्दूक के लिये सही निर्देशों का पालन करना परमেশ्वर के साथ संबन्धित आशीर्वादों के लिए आवश्यक है।
- नेतृत्व-प्रेरणा: दाऊद की भूमिका में श्रद्धा और सुधार-आशीष दोनों दिखते हैं; यह संदेश देता है कि नेता को परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप कदम उठाने चाहिए।
नोट: उपरोक्त क्रॉस-रेफरेंसेस केवल संदर्भ-संयोजन के लिये संकेत हैं; पूर्ण पद नहीं दिये गये हैं।
संक्षिप्त विषय-सार
व्यावहारिक लेना-देना
यह कथा हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर के सामने आकर हम भी अपनी जीवन-यात्रा में हर दिन पवित्रता और पूर्ण समर्पण के साथ आगे बढ़ें। चाहे कोई कठिनाई हो, प्रभु की उपस्थिति और संगति में ही हमारी शक्ति मिलती है। अभ्यास में: - व्यक्तिगत pray-समय और समुदायिक आराधना दोनों को प्राथमिकता दें। - परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप निर्णय लें, न कि केवल अपनी इच्छा के अनुसार।
महत्वपूर्ण उद्धरणों का नोट
यह भाग उद्घोषणा-सीधा नहीं है; यदि आप चाहें तो मारकण, ऐल्बर्ट बॉर्न्स और अडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से प्रेरणा के छोटे-संदर्भ देख सकते हैं।