Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 शमूएल 6:8 बाइबल पद की व्याख्या
2 शमूएल 6:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब दाऊद अप्रसन्न हुआ, इसलिए कि यहोवा उज्जा पर टूट पड़ा था; और उसने उस स्थान का नाम पेरेसुज्जा रखा, यह नाम आज के दिन तक विद्यमान है।
2 शमूएल 6:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 शमूएल 6:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 इतिहास 13:11 (HINIRV) »
तब दाऊद अप्रसन्न हुआ, इसलिए कि यहोवा उज्जा पर टूट पड़ा था; और उसने उस स्थान का नाम पेरेसुज्जा रखा, यह नाम आज तक बना है।

योना 4:9 (HINIRV) »
परमेश्वर ने योना से कहा, “तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है?” उसने कहा, “हाँ, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन् क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता।”

2 शमूएल 6:8 पर टिप्पणी: दाऊद और पेरेसुज्जा
यह पद्रावह (30:6–34) दाऊद के संदर्श में घूमता है जब वह वेग से प्रवेश करता है और ईश्वर की भेंट-यात्रा के दौरान अयोग्य ढंग से उद्धार की कोशिश करता है। दाऊद का संकल्प परमेश्वर के सामने इस घटनाक्रम के कारण डगमग गया था; उज्जा (उज्जा) की असामान्य मृत्यु ने पूरा समुदाय चकित कर दिया और दाऊद को यहोवा के सम्मान के साथ जुड़ने के तरीके को पुनः सोचना पड़ा। इस verses में कहा गया है कि इस घटना से दाऊद अप्रसन्न हुआ क्योंकि यहोवा उज्जा पर टूट पड़ा था, और उसने उस स्थान का नाम पेरेसुज्जा रखा, जो आज भी विद्यमान है।
मुख्य विचार
इस बाइबल पाठ का केन्द्रबिंदु परमेश्वर के पवित्रता और साधना के सही तरीके की आवश्यकता है। दाऊद ने उठापटक भरे उत्साह में एक ऐसी क्रिया कर डाली जो परमेश्वर की अनुमति और निर्देश के बिना हुई; परिणामस्वरूप परमेश्वर की महिमा और लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। यह घटना हमें सिखाती है कि संतुष्टि और उत्साह के साथ-साथ परमेश्वर के निर्देशों का पालन करना भी आवश्यक है।
दो तीन मुख्य विषय
संदर्भजनक पार्श्व लेखन (Cross-references)
- प्रेरितियों केअनुसार, प्रेरित-कार्यों में भी सही निर्देशों के बिना सेवा करने से जोखिम होते हैं; साथ ही परमेश्वर के एकवचन उद्देश्य के साथ सेवा का आचरण आवश्यक है।
- प्रत्यक्षपन: आर्कान्जिकल निर्देशों के पालन से जुड़ा पाठ्य, जहाँ परमेश्वर ने यहोवा के संरक्षण और सम्मान के लिए नियम बनाये।
- मरकुस/यूहन्ना के लेखन: सेवा के भीतर ईश्वर के पवित्र नाम के सम्मान की महत्ता।
नोट: उपरोक्त संदर्भ स्पष्ट रूप से पाठ की केंद्रीय भावना को समाहित करते हैं, परन्तु लेखन में पूर्ण शास्त्री उद्धरण नहीं दिया गया है ताकि पाठ्य की पूर्ण अर्थसूत्रीता बनी रहे।
व्यावहारिक चिंतन
हमारी सेवा या उत्साह तब सक्षम होता है जब उसमें परमेश्वर की इच्छा का सम्मान हो। पुनरावृत्ति के लिए, परमेश्वर के निर्देश पढ़ें, प्रार्थना करें और समुदाय के दीपचिह्नों के अनुरूप कदम उठाएं। यदि आप ऐसा करते हैं, तो आपकी सेवाएं स्थिर और सुरक्षित रूप से परमेश्वर की महिमा में परिणत होंगी।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 शमऊएल 6:8 में दाऊद की अप्रसन्नता और पेरेसुज्जा का नाम परमेश्वर की पवित्रता और निर्देश-उन्मुख सेवा की आवश्यकता को उजागर करता है। यह घटना हमें यह सिखाती है कि उत्साह और प्रेम के साथ-साथ परमेश्वर के साथ सही निर्देशों के अनुसार चलना अनिवार्य है, ताकि परमेश्वर की महिमा सुरक्षित रहे और समुदाय सुरक्षित रहे।
पूर्व-संदर्भ उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke): यदि उपलब्ध हो, तो नीचे छोटे-छोटे उद्धरणों का उल्लेख किया जा सकता है; पूर्ण पाठ उद्धरण के रूप में न दें।
Matthew Henry: “The anger of the Lord fell upon Uzzah for a fault in the ark’s management.”
Albert Barnes: “God’s service must be done with reverence and according to his given order.”
Adam Clarke: “The Lord smote Uzzah for the presumptuous act of touching the ark.”
परिणामतः यह पाठ आज भी स्मरण करता है कि हमारी सेवकाई परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार हो, तब ही वह सुरक्षित और लाभदायक होगी।