Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 शमूएल 6:21 बाइबल पद की व्याख्या
2 शमूएल 6:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
दाऊद ने मीकल से कहा, “यहोवा, जिस ने तेरे पिता और उसके समस्त घराने के बदले मुझ को चुनकर अपनी प्रजा इस्राएल का प्रधान होने को ठहरा दिया है, उसके सम्मुख मैं ऐसा नाचा—और मैं यहोवा के सम्मुख इसी प्रकार नाचा करूँगा।
2 शमूएल 6:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 शमूएल 6:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 शमूएल 13:14 (HINIRV) »
परन्तु अब तेरा राज्य बना न रहेगा; यहोवा ने अपने लिये एक ऐसे पुरुष को ढूँढ़ लिया है जो उसके मन के अनुसार है; और यहोवा ने उसी को अपनी प्रजा पर प्रधान होने को ठहराया है, क्योंकि तूने यहोवा की आज्ञा को नहीं माना।” (प्रेरि. 13:22)

1 शमूएल 15:28 (HINIRV) »
तब शमूएल ने उससे कहा, “आज यहोवा ने इस्राएल के राज्य को फाड़कर तुझ से छीन लिया, और तेरे एक पड़ोसी को जो तुझ से अच्छा है दे दिया है।

2 शमूएल 6:16 (HINIRV) »
जब यहोवा का सन्दूक दाऊदपुर में आ रहा था, तब शाऊल की बेटी मीकल ने खिड़की में से झाँककर दाऊद राजा को यहोवा के सम्मुख नाचते कूदते देखा, और उसे मन ही मन तुच्छ जाना*।
सीधे अर्थ का सार
दाऊद ने मीकल से कहा कि वह परमेश्वर की महिमा में अपने आचरण के कारण नहीं जी रहा है, बल्कि उसने यह स्पष्ट किया है कि उसने जो किया वह Yahweh की प्रभुता और इस्राएल के लिए उसकी नियुक्ति के कारण है।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
2 शमूएल 6 का प्रसंग दाऊद की ईश्वर-प्रिय राजा की यात्रा में है। ताबूत को यरदन नदी पार करने के बाद, दाऊद ने उसे यरूशलेम लाने की उत्साहभरी योजना बनाई। मीकल, सिंहासन के भीतर पुत्री होने के कारण, भावनात्मक रूप से दाऊद के नाच-गाने पर असंतुष्ट रही, पर दाऊद की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि वहGod के उद्देश्य के अनुरूप अपने राज्य-कार्य को मान्यता देता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- दाऊद अपने नाच-गाने की प्रकृति को पुनः स्थापित करता है—यह ईश्वर के सामने उत्सव और आस्था का प्रदर्शन है, न कि केवल व्यक्तिगत प्रशंसा का प्रदर्शन।
- वह इस बात को स्वीकार करता है कि उसकी सत्ता, उसकी उपलब्धियाँ और उसकी तत्त्परता सब कुछ यहोवा के चयन और आदेश के कारण है।
- यहाँ “जहाँ तेरे पिता और उसके घराने के बदले मुझ को चुनकर” का उद्घोष यह दर्शाता है कि परमेश्वर ने क्षुद्र से महान बनने की राह चुनी है और दाऊद इसे ईश्वर की कृपा के रूप में स्वीकारता है।
विचार-योग्य टिप्पणियाँ
सम्बद्ध पंक्तियाँ (संश्लेषणित संकेत)
1) अन्यथा प्रभु के आशीर्वाद के सामने our response—यहां आचरण का असली मापदण्ड परमेश्वर के सम्मान में हमारा उत्साह है।
2) इस प्रकार की प्रतिक्रिया इस्राएल के राजा में परमेश्वर के उद्देश्यों की पूर्णता को दर्शाती है, जो आचरण के दृढ़ विश्वास को दर्शाती है।
3) दाऊद का यह कथन यह भी इंगित करता है कि धार्मिक रीति-रिवाज़ और व्यक्तिगत भावनाएँ परमेश्वर के राज्य-कार्य के बीच संतुलन बनाती हैं।
छोटे thematic बिंदु
दूसरे ग्रंथों से संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस
- प्रेषित 1 समूएल 12:22-24: परमेश्वर के लिए समर्पण और वफ़ादारी की आवश्यकता के बारे में संकेत। संक्षेप में, यह दाऊद के भाव के अनुरूप कि परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार ही हमारे अच्छे-खर्च की जोड़ी बनती है।
- 2 समूएल 7:18-22: दाऊद का आशीर्वचन और परमेश्वर की दीर्घ-दीर्घायु योजना का संदर्भ, जहां दाऊद जान लेता है कि उसकी राजधानी और राजकार्य परमेश्वर की कृपा से संभव हुआ है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम भी ऐसे ही रहें: परमेश्वर के सामने अपने उत्साह और आचरण को मिलाकर दिखाएँ। अपनी सफलताओं को केवल अपने से नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा के साथ समझें, और हर गतिविधि में उसकी महिमा बने।
स्थिति-सार: दाऊद का वक्तव्य हमें यह सिखाता है कि प्रभु के लिए किए गए कार्यों में विनम्रता और आस्था बनाए रखना चाहिए, ताकि आंतरिक धार्मिक जीवन और सार्वजनिक नेतृत्व एक साथ चलते रहें।
नोट: उपरोक्त उद्धरण में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे पूरे उद्धृत वाक्य नहीं दिए गए हैं; केवल उनके विचार-स्तम्भों से प्रेरित सार संकलन दिया गया है।