Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 24:1 2 शमूएल 24:2 2 शमूएल 24:3 2 शमूएल 24:4 2 शमूएल 24:5 2 शमूएल 24:6 2 शमूएल 24:7 2 शमूएल 24:8 2 शमूएल 24:9 2 शमूएल 24:10 2 शमूएल 24:11 2 शमूएल 24:12 2 शमूएल 24:13 2 शमूएल 24:14 2 शमूएल 24:15 2 शमूएल 24:16 2 शमूएल 24:17 2 शमूएल 24:18 2 शमूएल 24:19 2 शमूएल 24:20 2 शमूएल 24:21 2 शमूएल 24:22 2 शमूएल 24:23 2 शमूएल 24:24 2 शमूएल 24:25



2 शमूएल 24:15 पर दृष्टि: इस्राएल में मरी फैलाने वाला कष्ट और परम प्रतिदान
इस पद के पीछे का इतिहास यह है कि दाऊद ने पाप की ही परीक्षा में एक गिनती कराई और परमेश्वर के आदेश के विरुद्ध गिनती को रोकने के लिए शास्त्रों के अनुसार नहीं चाला गया। परिणामस्वरूप परमेश्वर ने सारी सेना के विरुद्ध दण्ड रखा—सवेरे से लेकर समय के अंत तक और दान से लेकर बेर्शेबा तक के भीतर ठहराए हुए लोगों में से हजारों मरे गए। यह घटनाक्रम हमें यह सीख देता है कि प्रभु के पथ से हटा कर अपनी योजनाओं को चलाने का परिणाम विनाशकारी होता है और हमारे कर्मों की कीमत हमारी परिस्थितियों पर पड़ती है।
प verse का पाठ-परिचय और अध्यायगत संदर्भ
यह अध्याय दाऊद की गिनती के निर्णय के परिणाम को स्पष्ट करता है—जब उसने संख्याओं के फेर में पड़कर अपने लोगों को गिनना चाहा, तो परमेश्वर ने दण्ड दिया। यह एक चेतावनी है कि प्रभु की योजना के बिना मानव इच्छा से चलना, यहाँ तक कि प्रेरित उद्देश्य apparent सफल दिखे, अंततः विनाशकारी हो सकता है। इस अध्याय का समापन दाऊद की प्रायश्चित और परमेश्वर के दयालु मार्ग की ओर इशारा करता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
- परमेश्वर की व्यवस्था पर अटल आस्था रखना चाहिए: गिनती जैसी साधारण क्रिया भी परमेश्वर के निर्देश के विरुद्ध हो तो परिणाम विपरीत हो सकता है।
- पाप की कीमत समाज पर भी गिरती है: सैकड़ों लोग नहीं सिर्फ दाऊद का दोष—समस्त समुदाय पर प्रभाव पड़ता है जिससे सामुदायिक उत्तरदायित्व स्पष्ट होता है।
अनुचित गिनती के परिणामों के प्रकाश में अन्य बाइबिल संदर्भ
संदर्भ 1: सामुएल की गिनती के समय परमेश्वर ने दंड दिया, ताकि मनुष्यों का विश्वास केवल गिनती में न हो, बल्कि परमेश्वर के वादों और आज्ञाओं में हो।
संदर्भ 2: यहूदा के वैराग कर अपने पाप के लिए आह्वान और प्रतिफल—किताबों में कहा गया कि प्रभु अपने लोगों को दण्ड के साथ-साथ दया भी दिखाते हैं।
संदर्भ 3: कुछ अन्य घटनाओं में भी ईश्वर अपने लोगों के अहंकार और बाबतों के कारण सचेतन दण्ड देते हैं, परन्तु फिर उनकी कृपा और रीति से उद्धार रहता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप) और उनके संदेह-पूर्ण संयोग
- इतिहास में परमेश्वर के निर्देशों से विमुख होकर गिनती या शक्ति प्रदर्शन करने पर साहसिकता की कीमत ऐसी घटनाओं से उठती है; इस प्रकार के संदर्भ हमें आज भी प्रभु की आज्ञाओं के अनुरूप चलने को प्रेरित करते हैं।
उद्धरण: यह अनुभाग किसी भी पूर्ण पाठ से उद्धरण नहीं देता; केवल संदर्भित सिद्धांतों का सार प्रस्तुत किया गया है।
संक्षेप एवं निष्कर्ष
2 शमूएल 24:15 हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर की व्यवस्था के विरुद्ध मनुष्य-उद्धार की मंशा भी विनाशकारी हो सकती है। दाऊद के कठोर निर्णय के परिणामस्वरुप पल-पल जीवन पर असर पड़ा, परन्तु पूर्णत: परमेश्वर की दया और सुधारी यात्रा जारी रही। यह अनुभव हमें यह सिखाता है कि धार्मिक कदमों की ऊँचाइयाँ केवल outward गणनाओं पर नहीं बल्कि परमेश्वर के वचन के अनुसार विश्वासपूर्ण जीवन पर टिकती हैं।